गोधन दिवाली महोत्सव 2026: जगदीश मुखी और VHP की गोवंश संरक्षण के लिए केंद्रीय कानून की मांग
सारांश
मुख्य बातें
नई दिल्ली के जनकपुरी स्थित दिल्ली हाट में 7 नवंबर 2026 को राष्ट्रीय गौधन महासंघ द्वारा आयोजित 'गोधन दिवाली महोत्सव 2026' का सफल आयोजन हुआ, जिसमें विश्व हिंदू परिषद (VHP) के अध्यक्ष आलोक कुमार और असम के पूर्व राज्यपाल जगदीश मुखी समेत कई प्रमुख हस्तियों ने भाग लिया। इस अवसर पर वक्ताओं ने गोवंश के संरक्षण और संवर्धन के साथ-साथ संपूर्ण भारत में गोहत्या पर पाबंदी के लिए राष्ट्रीय स्तर पर एकसमान केंद्रीय कानून बनाने की माँग जोरदार तरीके से उठाई।
कार्यक्रम का ऐतिहासिक संदर्भ
VHP अध्यक्ष आलोक कुमार ने कहा कि 7 नवंबर का दिन गोसंरक्षण आंदोलन के इतिहास में अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने याद दिलाया कि वर्ष 1966 में इसी तारीख को गोवंश की सुरक्षा की माँग को लेकर देशभर के संत दिल्ली पहुँचे थे और तत्कालीन पुलिस ने उन पर गोलीबारी और लाठीचार्ज किया था। उस घटना में कई संतों ने अपने प्राण गँवाए और अनेक घायल हुए थे। कुमार ने कहा, 'आज हमने उन सभी बलिदानियों को श्रद्धांजलि अर्पित की।'
उन्होंने आगे कहा कि उन शहीदों को सच्ची श्रद्धांजलि तभी मिलेगी जब देश में गोसंरक्षण कानून बनेगा और घर-घर में गाय पाली जाएगी। उन्होंने गाय के गोबर और गोमूत्र के उपयोग को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया।
जगदीश मुखी का व्यक्तिगत अनुभव
असम के पूर्व राज्यपाल जगदीश मुखी ने 1966 की घटना से जुड़ा अपना व्यक्तिगत संस्मरण साझा किया। उन्होंने बताया कि उस वक्त वे एम.कॉम के छात्र थे और उस ऐतिहासिक प्रदर्शन में अग्रिम पंक्ति में खड़े थे। अचानक गोलीबारी शुरू होने और कर्फ्यू लागू होने के कारण वे रातभर हॉस्टल नहीं लौट सके और अगले दिन सुबह चार बजे पैदल चलकर हॉस्टल पहुँचे।
मुखी ने कहा कि आज इस कार्यक्रम में उपस्थित होकर उन्हें गहरी आत्मसंतुष्टि मिली। उन्होंने पिछले 10-12 वर्षों में गोवंश की संख्या में वृद्धि को एक सकारात्मक संकेत बताया।
गोवंश का आर्थिक और धार्मिक महत्व
मुखी ने कहा कि आज देशभर की गोशालाओं में गोबर और गोमूत्र से विभिन्न उत्पाद तैयार किए जा रहे हैं और इनकी माँग तेजी से बढ़ने की संभावना है। उनके अनुसार, गाय न केवल धार्मिक दृष्टि से पूजनीय है बल्कि आर्थिक दृष्टिकोण से भी देश के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण संसाधन है। गौरतलब है कि गोबर-आधारित उत्पादों का बाज़ार हाल के वर्षों में तेजी से विस्तारित हुआ है।
केंद्रीय कानून की माँग
मुखी ने रेखांकित किया कि गोवंश संरक्षण के लिए केंद्रीय कानून की माँग दशकों पुरानी है। उन्होंने कहा कि भाजपा शासित राज्यों में इस दिशा में अलग-अलग कानून बनाए जा चुके हैं, परंतु अब पूरे देश में एकसमान कानून लागू करने की माँग निरंतर मजबूत हो रही है। पूर्व राज्यपाल ने उम्मीद जताई कि केंद्र सरकार का रुख इस विषय में सकारात्मक है और एक दिन संपूर्ण भारत में गोहत्या पर पूर्ण प्रतिबंध वाला कानून लागू होगा।
आगे की राह
इस महोत्सव ने गोसंरक्षण आंदोलन को एक नई राजनीतिक और सामाजिक ऊर्जा दी है। वक्ताओं ने एकमत से कहा कि समाज और सरकार दोनों को मिलकर इस दिशा में ठोस प्रयास करने होंगे। यह आयोजन ऐसे समय में हुआ है जब गोसंरक्षण को लेकर राष्ट्रीय बहस एक बार फिर तेज होती दिख रही है।