क्या दिल्ली विधानसभा में भाजपा विधायकों ने आतिशी के खिलाफ प्रदर्शन किया और सिख गुरु का अपमान करने का आरोप लगाया?
सारांश
Key Takeaways
- दिल्ली विधानसभा में भाजपा विधायकों का प्रदर्शन
- आतिशी पर आरोप: सिख गुरु का अपमान
- राजनीतिक बयानबाजी का असर
नई दिल्ली, 7 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। दिल्ली विधानसभा में बुधवार को सत्तारूढ़ दल के सदस्यों ने नेता प्रतिपक्ष आतिशी के विवादास्पद बयान के खिलाफ प्रदर्शन किया। भाजपा विधायकों ने आरोप लगाया कि आतिशी ने विधानसभा सत्र के दौरान सिख गुरु के खिलाफ कथित तौर पर 'असंवेदनशील शब्दों' का प्रयोग किया।
दिल्ली के मंत्री प्रवेश वर्मा ने कहा कि मंगलवार को विधानसभा सत्र में सदस्य सिख गुरुओं को सम्मान देने का कार्य कर रहे थे। उन्होंने बताया कि गुरु तेग बहादुर जी की 354वीं शहादत वर्षगाठ पर एक विशेष चर्चा की गई थी। वर्मा ने कहा, "एक ओर हम उन्हें श्रद्धांजलि दे रहे थे, जबकि दूसरी ओर आतिशी ने एक ऐसा बयान दिया, जिसने हमारी भावनाओं को आहत किया। हमें दुःख है कि पूर्व मुख्यमंत्री ने सिख गुरु का अपमान किया है। आज वह विधानसभा में भी उपस्थित नहीं थीं।"
मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने कहा, "मंगलवार को विधानसभा में जो हुआ, उसके लिए मुझे गहरा खेद है। मुझे सबसे ज्यादा दुःख इस बात का है कि आम आदमी पार्टी गुरु तेग बहादुर जी की महान शहादत पर श्रद्धांजलि अर्पित करे या नहीं, यह उनके भाव के ऊपर निर्भर करता है। लेकिन जब पूरी विधानसभा में लोग गुरु तेग बहादुर जी के बारे में चर्चा कर रहे थे, ऐसे में मंगलवार को बहुत दुखदायी शब्द कहे गए।"
सिरसा ने बताया कि ऐसी पवित्र चर्चा के दौरान अनजाने में भी किया गया अनादर एक गंभीर अपराध है। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार ने पहले ही अगले दिन प्रदूषण पर चर्चा का निर्णय लिया था, इसलिए श्रद्धांजलि सत्र के दौरान यह मुद्दा नहीं उठाया जाना चाहिए था।
दिल्ली के मंत्री कपिल मिश्रा ने भी आतिशी के व्यवहार की कड़ी आलोचना की, इसे बेहद शर्मनाक बताया। उन्होंने कहा, "विपक्ष की नेता आतिशी का कार्य बहुत शर्मनाक था और उन्होंने अब तक माफी नहीं मांगी है। मेरा मानना है कि उन्हें दिल्ली के लोगों, सिख समुदाय और इस विधानसभा से सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी चाहिए।"
भाजपा विधायक अरविंदर सिंह लवली ने कहा कि यह मुद्दा गुरु साहिब और सदन की भावनाओं के प्रति विपक्षी नेता के असंवेदनशील और गैर-जिम्मेदाराना रवैये को दर्शाता है। उन्होंने कहा, "विपक्ष की नेता राजनीति में इतनी मशगूल थीं कि उन्होंने ऐसे शब्दों का इस्तेमाल करने में संकोच नहीं किया जो गुरुओं के प्रति अनादर के बराबर थे। हम इसकी कड़ी निंदा करते हैं।"
एक अन्य भाजपा विधायक, तरविंदर सिंह मारवाह ने कहा कि गुरु तेग बहादुर जी पर चर्चा मंगलवार को ही शांतिपूर्ण ढंग से समाप्त हो जानी चाहिए थी। उन्होंने कहा, "मामला वहीं समाप्त हो जाना चाहिए था। आतिशी ने तब टिप्पणी की कि सदन गैर-जरूरी मुद्दों पर चर्चा कर रहा है जबकि प्रदूषण पर ध्यान नहीं दे रहा है। हालांकि, स्पीकर पहले ही साफ कर चुके थे कि प्रदूषण पर चर्चा बुधवार को होगी।