क्या पहले नौकरियों में होती थी बंदरबांट, योग्य युवा होते थे भेदभाव का शिकार? : सीएम योगी

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क्या पहले नौकरियों में होती थी बंदरबांट, योग्य युवा होते थे भेदभाव का शिकार? : सीएम योगी

सारांश

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश की राजनीतिक स्थिति को लेकर गंभीर बयान दिया है। उन्होंने बताया कि कैसे भ्रष्टाचार और बंदरबांट ने प्रदेश को बीमारू बना दिया। योगी ने 2017 से पहले की नियुक्तियों में भेदभाव और भ्रष्टाचार के प्रभाव के बारे में बात की, जो आज भी युवाओं को प्रभावित कर रहा है।

Key Takeaways

  • भ्रष्टाचार और बंदरबांट ने यूपी को बीमारू बना दिया है।
  • 2017 से पहले योग्य युवाओं को भेदभाव का सामना करना पड़ा।
  • महिलाओं की भर्ती और सशक्तिकरण पर जोर दिया जा रहा है।
  • यूपी का आर्थिक योगदान 1960 के बाद कम हुआ।
  • सरकार द्वारा पोषण मिशन और आंगनबाड़ी केंद्रों का विकास किया जा रहा है।

लखनऊ, 27 अगस्त (राष्ट्र प्रेस)। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बताया कि उत्तर प्रदेश केवल बीमारू राज्य नहीं था, बल्कि असत्याचार और राजनीतिक दलों ने इसे ऐसी स्थिति में पहुंचा दिया था। भ्रष्टाचार और बंदरबांट की राजनीति ने इस समृद्ध प्रदेश को पहचान के संकट में डाल दिया था। 2017 से पहले, नियुक्तियों में बंदरबांट होती थी, जिससे योग्य अभ्यर्थी भेदभाव और भ्रष्टाचार का शिकार होते थे।

उन्होंने आगे कहा कि 1947 के बाद से 1960 तक यूपी देश का अग्रणी प्रदेश था, जिसका योगदान 14 प्रतिशत से अधिक था। परंतु, 1960 के बाद गिरावट आई और 1990 के बाद यह और तेज हो गई, जिससे 2017 तक यूपी का योगदान 8 प्रतिशत से भी कम हो गया।

सीएम योगी ने बुधवार को लोकभवन सभागार में उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग द्वारा निष्पक्ष और पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया के तहत चयनित 2,425 मुख्य सेविकाओं और 13 फार्मासिस्टों को नियुक्ति पत्र वितरण कार्यक्रम में लोगों को संबोधित किया। इस अवसर पर, खाद्यान्न उत्पादन, इंफ्रास्ट्रक्चर, और निवेश में यूपी पिछड़ता गया। नौजवान यूपी से बाहर जाते थे, लेकिन वहां भी उन्हें पहचान के संकट का सामना करना पड़ता था। यह दंगों और परिवारवादी राजनीति का परिणाम था, जिसने यूपी को लूट का अड्डा बना दिया।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सीएम योगी ने कहा कि महिला और बाल विकास विभाग के तहत नवचयनित मुख्य सेविकाओं और फार्मासिस्टों को नियुक्ति पत्र वितरण प्रदेश भर की बेटियों के लिए एक अवसर है। उन्होंने सभी नवचयनितों को बधाई देते हुए अधीनस्थ सेवा चयन आयोग को इस निष्पक्ष प्रक्रिया के लिए धन्यवाद भी दिया। उन्होंने कहा कि हर युवक के मन में सपना होता है और सरकार का दायित्व है कि उसे मंच दे। युवाओं की प्रतिभा और ऊर्जा का सही इस्तेमाल होना चाहिए, और इसके लिए भेदभाव और भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई जरूरी है। 2017 से पहले यूपी में नियुक्तियां नहीं होती थीं, और होती भी तो बंदरबांट के कारण योग्य युवा पीछे रह जाते थे। परिणामस्वरूप, यूपी बीमारू राज्य बन गया।

उत्तर प्रदेश में स्कूल मर्जर के संबंध में सीएम ने विपक्ष पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि विपक्ष के पास मुद्दा नहीं है, केवल नकारात्मकता है। जर्जर भवनों को शिफ्ट करने और छात्र-शिक्षक अनुपात सुधारने का प्रयास राष्ट्रीय शिक्षा नीति का हिस्सा है। एक जर्जर भवन गिरने से बच्चे मरे, लेकिन विपक्ष भ्रम फैलाता है। हम खाली विद्यालयों में प्री-प्राइमरी और बाल वाटिका चलाने की योजना बना रहे हैं, जिनमें 5000 बाल वाटिकाएं सफलतापूर्वक संचालित हो रही हैं। इन विद्यालयों में विभिन्न गतिविधियों के माध्यम से पोषण मिशन से 3-6 वर्ष के बच्चों का मानसिक विकास होगा, जो कि स्वस्थ समाज के लिए आवश्यक है।

सीएम योगी ने 2047 के विकसित भारत के संकल्प को दोहराते हुए कहा कि यह रास्ता आंगनबाड़ी केंद्रों से शुरू होता है। उन्होंने नवचयनित मुख्य सेविकाओं और फार्मासिस्टों से ईमानदारी और भेदभाव-मुक्त सेवा की अपील की, यह कहते हुए कि स्वस्थ बचपन से ही समृद्ध भविष्य बनेगा। आपकी जिम्मेदारी देश के बचपन को बचाने की है, जैसा कि मां यशोदा ने भगवान कृष्ण का पालन किया।

महिला सशक्तिकरण पर जोर देते हुए सीएम ने कहा कि यूपी पुलिस में 2 महीने पहले 60,244 भर्तियों में 12,045 बेटियां चयनित हुईं। 1947-2017 में केवल 10,000 महिला पुलिसकर्मी थीं, लेकिन 8 साल में 40,000 से अधिक बेटियों को भर्ती किया गया। बेसिक शिक्षा परिषद में 1,56,000 शिक्षकों में ज्यादातर बेटियां हैं। मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना का उल्लेख करते हुए बताया कि इसमें 26 लाख से अधिक बेटियों को 25,000 रुपये का पैकेज मिला। इसके अलावा, 4 लाख बेटियों की शादी सामूहिक विवाह योजना से हुई और मातृ वंदना योजना में 183 करोड़ रुपये वितरित किए गए।

उन्होंने कहा कि एनएफएचएस सर्वे (2015-16) के बाद 2017 से महिलाओं में एनीमिया 5.1 प्रतिशत, स्टंटिंग 6.6 प्रतिशत, अल्पवजन 7.4 प्रतिशत, और सूखापन 0.6 प्रतिशत कम हुआ। शिशु मृत्यु दर 38 और मातृ मृत्यु दर 197 हो गई। उन्होंने आंगनबाड़ी केंद्रों में पोषाहार और कुपोषण निवारण पर जोर देते हुए कहा कि स्मार्टफोन और रियल-टाइम मॉनिटरिंग से आंकड़े बेहतर होंगे। हर आंगनबाड़ी केंद्र के अंदर समय पर पोषाहार मिल सके, और सभी प्रकार की योजनाओं का लाभ समय पर मिल सके, इसके लिए मुख्य सेविकाओं को एक लीडर के रूप में आगे आना चाहिए।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विभाग की उपलब्धियों को गिनाते हुए बताया कि इस वर्ष 19424 आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और 3000 सहायिकाओं का प्रमोशन हुआ और 22,290 मिनी आंगनबाड़ी को मुख्य में तब्दील किया गया। उन्होंने कहा कि 1,90,000 आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों और 1,90,000 सहायिकाओं के पद स्वीकृत हैं। ऑपरेशन कायाकल्प से आंगनबाड़ी केंद्रों का पुनरुद्धार हुआ। सीएम योगी ने लाभार्थियों से कहा कि आप सरकार की मंशा के अनुसार परिणाम दें ताकि यूपी एक सशक्त प्रदेश की दिशा में आगे बढ़ सके।

Point of View

वह केवल उत्तर प्रदेश की नहीं, बल्कि देश के अन्य हिस्सों में भी देखने को मिलती है। राजनीतिक दलों का भ्रष्टाचार और नियुक्तियों में भेदभाव ने युवाओं के लिए अवसरों को सीमित कर दिया है। यह जरूरी है कि सरकारें इस दिशा में ठोस कदम उठाएं ताकि सभी युवाओं को समान अवसर मिल सकें।
NationPress
30/08/2025

Frequently Asked Questions

सीएम योगी ने नियुक्तियों में भेदभाव के बारे में क्या कहा?
सीएम योगी ने कहा कि 2017 से पहले यूपी में नियुक्तियों में बंदरबांट होती थी, और योग्य अभ्यर्थी भेदभाव के शिकार होते थे।
उत्तर प्रदेश की आर्थिक स्थिति के बारे में क्या जानकारी दी गई?
सीएम योगी ने बताया कि 1960 के बाद यूपी का योगदान आर्थिक रूप से कम हुआ और 2017 तक यह 8 प्रतिशत से भी कम हो गया।
महिला सशक्तिकरण के लिए सरकार ने क्या कदम उठाए हैं?
महिला सशक्तिकरण के तहत, यूपी पुलिस में बड़ी संख्या में बेटियों की भर्ती की गई है और कन्या सुमंगला योजना के तहत आर्थिक सहायता प्रदान की गई है।