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क्या संस्थागत और राजनीतिक स्तर पर ही निकलेगा कलाकारों की समस्या का समाधान? : दीपक पराशर

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क्या संस्थागत और राजनीतिक स्तर पर ही निकलेगा कलाकारों की समस्या का समाधान? : दीपक पराशर

सारांश

क्या कलाकारों की समस्याओं का समाधान केवल संस्थागत और राजनीतिक स्तर से संभव है? दीपक पराशर ने इस मुद्दे पर विचार करते हुए इंडस्ट्री की हकीकत को उजागर किया है। उन्होंने बड़े सितारों की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं। जानें उनकी राय और समाधान के लिए की गई अपील।

मुख्य बातें

कलाकारों की समस्याओं का समाधान संस्थागत और राजनीतिक स्तर पर होना चाहिए।
दीपिका पादुकोण ने ८ घंटे की शिफ्ट के मुद्दे को उठाया।
बड़े सितारे शायद ही कभी संघर्षरत कलाकारों की मदद करते हैं।
कोरोना महामारी के दौरान कई सितारे मदद के लिए आगे आए।
मजबूत सिने आर्टिस्ट एसोसिएशन की आवश्यकता है।

मुंबई, २५ जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। हिंदी सिनेमा में पिछले कुछ महीनों से शिफ्ट को लेकर बहस चल रही है। हाल ही में मां बनने के बाद दीपिका पादुकोण ने ८ घंटे की शिफ्ट की मांग रखी, जिससे यह मुद्दा एक बार फिर चर्चा में आ गया है। इस संदर्भ में वरिष्ठ अभिनेता दीपक पराशर ने राष्ट्र प्रेस से खास बातचीत में इंडस्ट्री की अंदरूनी सच्चाइयों और संघर्षरत कलाकारों की स्थिति पर खुलकर बात की है। साथ ही पीएम मोदी और गृह मंत्री अमित शाह से मदद की गुहार लगाई।

राष्ट्र प्रेस से बातचीत में दीपक पराशर ने कहा, ''दीपिका पादुकोण की ओर से उठाया गया आठ घंटे की शिफ्ट का मुद्दा अपनी जगह सही हो सकता है, लेकिन इसका सीधा फायदा उन कलाकारों को नहीं मिलता जो रोज काम की तलाश में भटकते हैं। टॉप पर बैठे कलाकारों के लिए समय, पैसा और काम कभी समस्या नहीं होते। उनके पास अपने नियम तय करने की आजादी होती है, लेकिन जो कलाकार छोटे रोल करते हैं या रोजी-रोटी के लिए संघर्ष कर रहे हैं, उनकी जिंदगी इन फैसलों से नहीं बदलती।''

उन्होंने कहा, ''इंडस्ट्री उन्हीं सितारों के इर्द-गिर्द घूमती है जो बॉक्स ऑफिस और टीआरपी के लिहाज से सेलिंग फैक्टर होते हैं।''

दीपक पराशर ने सवाल उठाया कि क्या बड़े सितारे कभी जरूरतमंद कलाकारों के हक में खुलकर सामने आएंगे।

उन्होंने कहा, ''इंडस्ट्री के बड़े नाम शायद ही कभी सड़क पर उतरकर आंदोलन करेंगे। जो लोग सुविधाजनक स्थिति में हैं, वे अपनी सुरक्षित दुनिया से बाहर निकलकर संघर्ष कर रहे कलाकारों की लड़ाई लड़ने से बचते हैं। यही वजह है कि सामूहिक और मजबूत आंदोलन अब तक खड़ा नहीं हो पाया है।''

उन्होंने कहा, ''अब सीनियर कलाकार इस दिशा में पहल कर रहे हैं। यह पहली बार है जब पूनम ढिल्लों, पद्मिनी कोल्हापुरे, और उपासना सिंह जैसे अनुभवी कलाकार एक मंच पर आए हैं। इन सभी ने चार से पाँच दशकों तक इंडस्ट्री में काम किया है और अब वे अपने अनुभव के आधार पर जरूरतमंद कलाकारों की समस्याओं को सुलझाने की कोशिश कर रहे हैं।''

दीपक पराशर ने बताया कि उन्होंने ४६ साल तक इंडस्ट्री में काम किया है और अब वह चाहते हैं कि आने वाली पीढ़ी को वही संघर्ष न झेलना पड़े जो उन्होंने और उनके साथियों ने देखा है।

दीपक पराशर ने कोरोना महामारी के समय मिली मदद को भी याद किया। उन्होंने कहा, ''उस कठिन दौर में कई बड़े सितारों ने मानवीय संवेदना दिखाते हुए आगे बढ़कर सहायता की थी। ऋतिक रोशन की मदद से जरूरतमंद कलाकारों को राशन और जरूरी सुविधाएं मिल सकीं। सोनू सूद ने बड़े पैमाने पर लोगों की मदद की, जबकि सलमान खान ने अपनी संस्था के जरिए सहयोग किया। शाहरुख खान और अक्षय कुमार ने भी आर्थिक और सामाजिक मदद पहुंचाई। उस समय व्यक्तिगत स्तर पर बहुत सहयोग मिला, लेकिन यह मदद किसी स्थायी व्यवस्था का विकल्प नहीं बन सकी।''

उन्होंने चिंता जताई कि इंडस्ट्री में कोई मजबूत और एकीकृत सिने आर्टिस्ट एसोसिएशन नहीं है। पहले फिल्म इंडस्ट्री सीमित थी, लेकिन अब टेलीविजन और डिजिटल प्लेटफॉर्म के जुड़ने से इसका दायरा बहुत बड़ा हो गया है। अलग-अलग माध्यमों में काम करने वाले कलाकारों को एक मंच पर लाना और उनकी समस्याओं पर एकजुट होकर आवाज उठाना बेहद मुश्किल हो गया है। इसी कारण बड़े स्तर पर सामूहिक कार्रवाई अब तक संभव नहीं हो पाई है।

दीपक पराशर ने उम्मीद जताई कि अब इस समस्या का समाधान केवल संस्थागत और राजनीतिक स्तर से ही निकल सकता है। उन्होंने कहा, ''हमारी आखिरी उम्मीद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और अभिनेता से नेता बने अरुण गोविल जैसे लोगों से है, जो नीति और व्यवस्था के स्तर पर कुछ ठोस कदम उठा सकते हैं और हमारी मदद कर सकते हैं।''

संपादकीय दृष्टिकोण

यह स्पष्ट है कि कलाकारों की समस्याओं को हल करने के लिए संस्थागत और राजनीतिक स्तर पर ठोस कदम उठाने की आवश्यकता है। हिंदी सिनेमा की यह चुनौती केवल व्यक्तिगत प्रयासों से नहीं सुलझ सकती।
RashtraPress
27 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दीपक पराशर ने किस मुद्दे पर चर्चा की?
दीपक पराशर ने कलाकारों की समस्याओं और दीपिका पादुकोण द्वारा उठाए गए ८ घंटे की शिफ्ट के मुद्दे पर चर्चा की।
क्या कलाकारों के लिए कोई संगठन है?
दीपक पराशर ने बताया कि इंडस्ट्री में कोई मजबूत और एकीकृत सिने आर्टिस्ट एसोसिएशन नहीं है।
क्या बड़े सितारे जरूरतमंद कलाकारों की मदद करते हैं?
दीपक पराशर के अनुसार, बड़े सितारे शायद ही कभी जरूरतमंद कलाकारों के हक में सामने आते हैं।
दीपक पराशर की अपील किसके लिए है?
उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह से मदद की अपील की है।
कोरोना महामारी के दौरान किसने मदद की?
दीपक पराशर ने बताया कि ऋतिक रोशन , सोनू सूद , सलमान खान और अन्य ने महामारी के दौरान कई जरूरतमंदों की मदद की।
राष्ट्र प्रेस
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