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क्या डोभाल ने एससीओ बैठक में आतंकवाद के खिलाफ दोहरे मापदंड न अपनाने की अपील की?

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क्या डोभाल ने एससीओ बैठक में आतंकवाद के खिलाफ दोहरे मापदंड न अपनाने की अपील की?

सारांश

बीजिंग में आयोजित एससीओ बैठक में NSA अजीत डोभाल ने आतंकवाद के खिलाफ दोहरे मापदंडों को छोड़ने की अपील की। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र से प्रतिबंधित आतंकवादी संगठनों पर ठोस कार्रवाई की आवश्यकता पर जोर दिया। जानिए इस महत्वपूर्ण बैठक में भारत के प्रस्ताव और आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में उठाए गए कदमों के बारे में।

मुख्य बातें

आतंकवाद के खिलाफ एकजुट होना आवश्यक है।
दोहरे मापदंडों को छोड़ना होगा।
संयुक्त राष्ट्र से ठोस कार्रवाई की अपेक्षा।
भारत ने 'ऑपरेशन सिंदूर' के तहत कदम उठाए।
एससीओ देशों से सहयोग की आवश्यकता है।

बीजिंग, 24 जून (राष्ट्र प्रेस)। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) अजीत डोभाल ने मंगलवार को बीजिंग में शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) सदस्य देशों की सुरक्षा परिषद सचिवों की 20वीं बैठक में आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में दोहरे मापदंडों को छोड़ने और संयुक्त राष्ट्र से प्रतिबंधित आतंकवादी समूहों तथा उनके नेटवर्क के खिलाफ ठोस कदम उठाने की आवश्यकता पर जोर दिया।

डोभाल ने जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में 22 अप्रैल को हुए बर्बर आतंकवादी हमले और उसके जवाब में भारत के 'ऑपरेशन सिंदूर' का उल्लेख करते हुए कहा कि यह आतंक के ढांचे को नष्ट करने और सीमा पार से भारत में घुसपैठ रोकने के लिए एक ठोस और गैर-उकसाने वाला कदम था।

उन्होंने कहा कि टीआरएफ (द रेजिस्टेंस फ्रंट) ने इस हमले में भारतीय और नेपाली नागरिकों को धर्म के आधार पर अलग करके 26 लोगों की हत्या की थी।

एनएसए ने कहा कि भारत को लश्कर-ए-तैयबा, जैश-ए-मोहम्मद, अल-कायदा, आईएसआईएस और उनके सहयोगी संगठनों से बने यूएन द्वारा नामित आतंकी संगठनों से लगातार खतरा है, जिनका मुख्यालय पाकिस्तान में है और जिन्हें राज्य का समर्थन प्राप्त है।

उन्होंने एससीओ देशों से अपील की कि वे आतंकवाद के हर रूप, विशेषकर सीमा पार आतंकवाद, को मानवता के विरुद्ध अपराध मानें और उसके प्रायोजकों, आयोजकों, वित्तीय मददगारों और हमलावरों को न्याय के कटघरे में लाने में सहयोग करें।

एनएसए डोभाल ने एससीओ मंच पर भारत की ओर से कई महत्वपूर्ण प्रस्ताव भी रखे। इनमें अंतरराष्ट्रीय आतंकवादी संगठनों के खिलाफ संयुक्त कार्यों का एक 'एल्गोरिदम ऑफ जॉइंट एक्शन्स', आतंकवाद, उग्रवाद और अलगाववाद को जन्म देने वाले कट्टरपंथ से निपटने के लिए संयुक्त उपाय और आतंकी विचारधाराओं से मुकाबला करने के लिए संयुक्त सूचना अभियान शामिल हैं।

उन्होंने इन प्रस्तावों के समर्थन के लिए अन्य सदस्य देशों का आभार भी व्यक्त किया।

इससे पहले, अजीत डोभाल ने चीन के उपराष्ट्रपति हान झेंग और रूस की राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के उप सचिव अलेक्ज़ेंडर वेनेडिक्टोव से भी मुलाकात की। रूस ने जल्द ही भारत-रूस रणनीतिक संवाद के अगले चरण के लिए डोभाल को आमंत्रित किया है।

संपादकीय दृष्टिकोण

यह स्पष्ट है कि आतंकवाद एक वैश्विक समस्या है जो सभी देशों को प्रभावित करती है। डोभाल के द्वारा उठाए गए मुद्दे और प्रस्ताव न केवल भारत के लिए, बल्कि पूरे क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण हैं। हम सभी को मिलकर इस चुनौती का सामना करना होगा।
RashtraPress
14 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

डोभाल ने एससीओ बैठक में क्या मुद्दा उठाया?
डोभाल ने आतंकवाद के खिलाफ दोहरे मापदंडों को छोड़ने और संयुक्त राष्ट्र से प्रतिबंधित आतंकवादी संगठनों के खिलाफ ठोस कार्रवाई की आवश्यकता पर बल दिया।
भारत ने आतंकवाद के खिलाफ क्या कदम उठाए हैं?
भारत ने 'ऑपरेशन सिंदूर' के तहत आतंकवाद के ढांचे को नष्ट करने के लिए ठोस कदम उठाए हैं।
एससीओ देशों से भारत की क्या अपेक्षाएँ हैं?
भारत चाहता है कि एससीओ देश आतंकवाद के हर रूप को मानवता के विरुद्ध अपराध मानें और उसके प्रायोजकों को न्याय के कटघरे में लाने में सहयोग करें।
राष्ट्र प्रेस
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