29 जुलाई 2026
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चुनाव आयोग ने सुप्रतिम सरकार की तमिलनाडु में पर्यवेक्षक के रूप में राहत की याचिका खारिज की

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चुनाव आयोग ने सुप्रतिम सरकार की तमिलनाडु में पर्यवेक्षक के रूप में राहत की याचिका खारिज की

सारांश

भारत के चुनाव आयोग ने कोलकाता के पूर्व पुलिस आयुक्त सुप्रतिम सरकार की याचिका को खारिज करते हुए उन्हें तमिलनाडु में केंद्रीय पर्यवेक्षक के रूप में रिपोर्ट करने का आदेश दिया। जानिए इस मामले का पूरा विवरण।

मुख्य बातें

चुनाव आयोग ने सुप्रतिम सरकार की याचिका खारिज की।
उन्हें तमिलनाडु में रिपोर्ट करने का निर्देश दिया गया।
पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव 23 और 29 अप्रैल को होंगे।
भाजपा ने मतदान प्रक्रिया में हस्तक्षेप के खिलाफ चिंता जताई।
सुप्रतिम सरकार को पहले 4 अप्रैल को नियुक्त किया गया था।

कोलकाता, 6 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। भारत का चुनाव आयोग (ईसीआई) ने कोलकाता पुलिस के पूर्व आयुक्त और वर्तमान में पश्चिम बंगाल सीआईडी के अतिरिक्त महानिदेशक (एडीजी) सुप्रतिम सरकार की उस याचिका को खारिज कर दिया है, जिसमें उन्होंने चुनावी राज्य तमिलनाडु में केंद्रीय पर्यवेक्षक के रूप में नियुक्ति से राहत मांगी थी।

एक आयोग के सूत्र के अनुसार, आयोग ने सुप्रतिम सरकार को तमिलनाडु के पांच विधानसभा क्षेत्रों - तिरुनेलवेली, अम्बासमुद्रम, पलायमकोट्टई, नांगुनेरी और राधापुरम में पुलिस पर्यवेक्षक के रूप में रिपोर्ट करने का निर्देश दिया है।

इससे पहले, 4 अप्रैल को आयोग ने सरकार को तमिलनाडु में पुलिस पर्यवेक्षक के रूप में भेजने का निर्णय लिया था। हालांकि, सुप्रतिम सरकार ने तात्कालिक चिकित्सा कारणों का हवाला देते हुए आयोग से राहत की मांग की।

अब, आयोग द्वारा याचिका खारिज किए जाने के बाद, सरकार के पास सोमवार तक तमिलनाडु में रिपोर्ट करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा।

पश्चिम बंगाल में मतदान की तारीखों की घोषणा से कुछ दिन पहले, ममता सरकार ने मनोज कुमार वर्मा के स्थान पर सुप्रतिम सरकार को कोलकाता पुलिस का आयुक्त नियुक्त किया था।

हालांकि, आचार संहिता लागू होने के बाद आयोग ने उन्हें उस पद से हटा दिया और पश्चिम बंगाल में चुनाव संबंधी किसी भी कार्य से प्रतिबंधित कर दिया। आयोग के निर्देशानुसार अजय नाना को नियुक्त किया गया है।

इसके बावजूद, भारतीय जनता पार्टी ने मतदान अवधि के दौरान सुप्रतिम सरकार को राज्य से बाहर भेजने की मांग उठाई।

भाजपा का कहना है कि यदि सरकार जैसे पुलिस अधिकारियों को राज्य से नहीं हटाया गया, तो वे मतदान प्रक्रिया को प्रभावित करने का प्रयास करेंगे।

गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल में दो चरणों में विधानसभा चुनाव 23 अप्रैल और 29 अप्रैल को होंगे। पहले चरण में 152 और दूसरे चरण में 142 विधानसभा क्षेत्रों में मतदान होगा। परिणाम 4 मई को घोषित किए जाएंगे।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

चुनाव आयोग ने सुप्रतिम सरकार की याचिका क्यों खारिज की?
चुनाव आयोग ने सुप्रतिम सरकार की याचिका खारिज की क्योंकि उन्हें तमिलनाडु में केंद्रीय पर्यवेक्षक के रूप में रिपोर्ट करने का आदेश दिया गया था।
सुप्रतिम सरकार को कब तक रिपोर्ट करना है?
सुप्रतिम सरकार को सोमवार तक तमिलनाडु में रिपोर्ट करना है।
पश्चिम बंगाल में चुनाव कब होंगे?
पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव 23 और 29 अप्रैल को होंगे।
भाजपा ने सुप्रतिम सरकार के खिलाफ क्या कहा?
भाजपा ने कहा कि अगर सुप्रतिम सरकार जैसे अधिकारी राज्य में बने रहें, तो वे मतदान प्रक्रिया को प्रभावित कर सकते हैं।
आयोग ने सुप्रतिम सरकार को पहले कब नियुक्त किया था?
आयोग ने सुप्रतिम सरकार को 4 अप्रैल को तमिलनाडु में पुलिस पर्यवेक्षक के रूप में नियुक्त किया था।
राष्ट्र प्रेस
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