क्या गणतंत्र दिवस परेड की शुरुआत स्वदेशी तोपों की सलामी के साथ हुई?
सारांश
Key Takeaways
- गणतंत्र दिवस परेड स्वदेशी तोपों की सलामी के साथ शुरू हुई।
- राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने समारोह का नेतृत्व किया।
- स्वदेशी रक्षा उपकरणों का प्रदर्शन आत्मनिर्भरता का प्रतीक है।
- 21 तोपों की सलामी भारतीय सशस्त्र बलों द्वारा दिया जाने वाला सर्वोच्च सम्मान है।
- यह समारोह भारत की सांस्कृतिक विविधता और एकता का प्रतीक है।
नई दिल्ली, 26 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। इस वर्ष के गणतंत्र दिवस समारोह में स्वदेशी रक्षा उपकरणों की अद्भुत झलक देखने को मिली। गणतंत्र दिवस परेड की शुरुआत भी स्वदेशी तोपों की सलामी के साथ हुई। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने कर्तव्य पथ से इस समारोह का नेतृत्व किया।
इस अवसर पर यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। कर्तव्य पथ पर राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम के 150 वर्ष, भारत की अभूतपूर्व प्रगति, मजबूत सैन्य शक्ति, और समृद्ध सांस्कृतिक विविधता का प्रदर्शन किया गया।
कार्यक्रम की शुरुआत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के राष्ट्रीय युद्ध स्मारक के दौरे से हुई। यहां उन्होंने माल्यार्पण कर अपने प्राण न्योछावर करने वाले राष्ट्र नायकों को श्रद्धांजलि अर्पित की। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष के साथ 'पारंपरिक बग्गी' में कर्तव्य पथ पर प्रवेश किया। उनके साथ राष्ट्रपति के अंगरक्षक थे, जो भारतीय सेना की सबसे वरिष्ठ रेजिमेंट है। परंपरा के अनुसार कर्तव्य पथ पर राष्ट्रीय ध्वज फहराया गया। इसके बाद 105 एमएम लाइट फील्ड गन से 21 तोपों की सलामी दी गई। यह तोपखाना प्रणाली पूरी तरह से भारत में निर्मित है।
पहले 21 तोपों की सलामी के लिए ब्रिटिश काल की 25 पाउंडर तोपों का उपयोग किया जाता था, लेकिन अब 172 फील्ड रेजिमेंट की 1721 सेरेमोनियल बैटरी 21 तोपों की सलामी देती है। गणतंत्र दिवस समारोह में राष्ट्रीय ध्वज को 21 तोपों की सलामी देना एक महत्वपूर्ण परंपरा है। इस परंपरा के तहत 105 मिमी लाइट फील्ड गन का उपयोग किया गया है, जो आत्मनिर्भर भारत की दिशा में भारत की रक्षा निर्माण क्षमता को दर्शाती है।
रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, 105 मिमी लाइट फील्ड गन का उपयोग न केवल पुरानी परंपरा को आधुनिक रूप देता है, बल्कि भारतीय सेना की स्वदेशी रक्षा प्रणालियों के प्रति बढ़ते विश्वास को भी दर्शाता है। गणतंत्र दिवस पर 21 तोपों का सलामी समारोह भारतीय सशस्त्र बलों द्वारा राष्ट्रीय ध्वज को प्रदान किया जाने वाला सर्वोच्च सैन्य सम्मान है। यह सलामी कर्तव्य पथ के लॉन से दी जाती है।
भारतीय सेना द्वारा संचालित इस समारोह का हर क्षण अनुशासन, सटीकता और गरिमा का प्रतीक होता है। यह 21 तोपों की सलामी भारत की सैन्य परंपराओं की निरंतरता को दर्शाती है। साथ ही यह आधुनिक, सक्षम और आत्मनिर्भर भारतीय सेना की छवि को राष्ट्र और विश्व के समक्ष प्रस्तुत करती है। इसके बाद 'विविधता में एकता' थीम पर 100 सांस्कृतिक कलाकारों ने परेड की शुरुआत की। यह म्यूजिकल इंस्ट्रूमेंट्स का शानदार प्रदर्शन रहा।
इस दृश्य ने देश की एकता और समृद्ध सांस्कृतिक विविधता को दर्शाया। 129 हेलीकॉप्टर यूनिट के चार एमआई-17 हेलीकॉप्टर ध्वज फॉर्मेशन में फूलों की पंखुड़ियों की बारिश करते हुए कर्तव्य पथ पर आगे बढ़े। इस फॉर्मेशन का नेतृत्व ग्रुप कैप्टन आलोक अहलावत ने किया। इसके बाद राष्ट्रपति ने सलामी ली और परेड शुरू हुई।
दिल्ली क्षेत्र के जनरल ऑफिसर कमांडिंग परेड कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल भवनीश कुमार ने परेड की कमान संभाली। वह दूसरी पीढ़ी के अधिकारी हैं। मुख्यालय दिल्ली क्षेत्र के चीफ ऑफ स्टाफ मेजर जनरल नवराज ढिल्लों परेड के सेकंड-इन-कमांड थे। वह तीसरी पीढ़ी के सेना अधिकारी हैं। इसके बाद सर्वोच्च वीरता पुरस्कारों के विजेता आए, जिनमें परमवीर चक्र विजेता - सूबेदार मेजर (मानद कैप्टन) योगेंद्र सिंह यादव (रिटायर्ड) और सूबेदार मेजर संजय कुमार - और अशोक चक्र विजेता - मेजर जनरल सीए पिथावालिया (रिटायर्ड) और कर्नल डी श्रीराम कुमार शामिल थे।