क्या वायुसेना के गरुड़ कमांडो विशेष अभियानों के लिए तैयार हैं?

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क्या वायुसेना के गरुड़ कमांडो विशेष अभियानों के लिए तैयार हैं?

सारांश

भारतीय वायु सेना के गरुड़ कमांडो ने कठिन प्रशिक्षण पूरा किया। उनके अद्वितीय कौशल और विशेष अभियानों के लिए तैयार होने की कहानी जानें। यह भारत की सुरक्षा का एक महत्वपूर्ण पहलू है।

Key Takeaways

  • गरुड़ कमांडो का प्रशिक्षण पूरा हुआ है।
  • यह विशेष बल भारतीय वायु सेना की क्षमता को बढ़ाएगा।
  • कठोर प्रशिक्षण से कमांडो को विशेष अभियानों के लिए तैयार किया गया है।

नई दिल्ली, 18 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। भारतीय वायु सेना की ‘गरुड़’ फोर्स के विशेष कमांडो कर्मियों का प्रशिक्षण सफलतापूर्वक पूरा हो गया है। वर्तमान सुरक्षा परिदृश्य के अनुसार, इस प्रशिक्षण में गरुड़ कमांडो को कठोर प्रशिक्षण दिया गया है। उल्लेखनीय है कि ऑपरेशन सिंदूर ने भारतीय वायु सेना के विशेष बलों की महत्वपूर्ण भूमिका को उजागर किया है। इसे ध्यान में रखते हुए, ये विशेष बल संचालक भारतीय वायु सेना को खास अभियानों में और अधिक सक्षम बनाएंगे।

वायुसेना के ये कमांडो दुश्मन के हवाई क्षेत्रों में घुसपैठ कर उन्हें नष्ट करने, रडार सिस्टम को ध्वस्त करने, आतंकवादियों के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई करने और स्पेशल ऑपरेशंस में प्रशिक्षित हैं। भारतीय वायुसेना के गरुड़ कमांडो कई युद्ध कलाओं में माहिर हैं।

रक्षा मंत्रालय के अनुसार, गरुड़ कमांडो को युद्धक फायरिंग के अलावा, बंधक बनाए गए लोगों के बचाव और फायरिंग ड्रिल का प्रशिक्षण दिया गया है। अपने पासिंग आउट समारोह में, ‘गरुड़ कमांडो’ ने युद्धक फायरिंग, बंधकों का बचाव, फायरिंग ड्रिल, विस्फोटक सामग्री पर हमला, बाधा पार करना, दीवार पर चढ़ना, रेंगना, रस्सियों से उतरना और सैन्य मार्शल आर्ट जैसे विभिन्न कौशल प्रदर्शित किए। प्रशिक्षण के सफल समापन के उपलक्ष्य में, गरुड़ रेजिमेंटल ट्रेनिंग सेंटर (जीआरटीसी), वायु सेना स्टेशन चांदीनगर में मैरून बेरेट की औपचारिक परेड आयोजित की गई।

वायु सेना संचालन के सहायक प्रमुख (वायु रक्षा) ने इस परेड का निरीक्षण किया। यहां गरुड़ रेजिमेंटल ट्रेनिंग सेंटर के कमांडेंट ने मुख्य अतिथि का स्वागत किया और उन्हें प्रशिक्षण के विभिन्न पहलुओं के बारे में जानकारी दी। मुख्य अतिथि ने गरुड़ कमांडो को सफलतापूर्वक प्रशिक्षण पूरा करने पर बधाई दी। युवा कमांडो को संबोधित करते हुए उन्होंने तेजी से बदलते सुरक्षा परिदृश्य के अनुसार कठोर प्रशिक्षण और विशेष बलों के कौशल को निखारने के महत्व पर जोर दिया।

उन्होंने सफल गरुड़ प्रशिक्षुओं को मैरून बेरेट, गरुड़ प्रोफिशिएंसी बैज और विशेष बल टैब प्रदान किए और पुरस्कार विजेताओं को ट्राफियां दीं। यह मैरून बेरेट औपचारिक परेड ‘गरुड़ कमांडो’ के लिए गर्व और उपलब्धि का क्षण है। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह एक कठिन प्रशिक्षण कार्यक्रम का समापन है। यह विशिष्ट गरुड़ बल में शामिल युवा विशेष बल संचालकों के रूप में उनके परिवर्तन का प्रतीक है। ऑपरेशन सिंदूर में भारतीय वायु सेना के विशेष बलों की भूमिका को देखते हुए, उत्तीर्ण हुए ये युवा विशेष अभियानों में भारतीय वायु सेना की क्षमता को और मजबूत करेंगे।

Point of View

भारतीय वायु सेना के गरुड़ कमांडो का प्रशिक्षण एक महत्वपूर्ण कदम है। यह न केवल हमारे सुरक्षा बलों को सशक्त बनाता है, बल्कि देश की सुरक्षा को भी सुनिश्चित करता है। ऐसे विशेष बलों की आवश्यकता हमेशा बनी रहती है, और उनका यह प्रशिक्षण उन्हें चुनौतियों का सामना करने के लिए तैयार करता है।
NationPress
18/01/2026

Frequently Asked Questions

गरुड़ कमांडो क्या करते हैं?
गरुड़ कमांडो विशेष अभियानों के लिए प्रशिक्षित होते हैं, जैसे दुश्मन के क्षेत्र में घुसपैठ करना और आतंकवादियों के खिलाफ कार्रवाई करना।
इनका प्रशिक्षण कैसे होता है?
इनका प्रशिक्षण कठोर और विविध होता है, जिसमें युद्धक फायरिंग, बंधकों का बचाव और सैन्य मार्शल आर्ट शामिल हैं।
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