क्या बांग्लादेश आतंकियों, अलगाववादियों और हिंदू विद्रोहियों का गढ़ बन चुका है?
सारांश
Key Takeaways
- बांग्लादेश में हिंदुओं की सुरक्षा के लिए चिंता बढ़ी है।
- आतंकवाद और अलगाववाद के मुद्दे गंभीर हैं।
- अंतरराष्ट्रीय समुदाय को इस पर ध्यान देना चाहिए।
- हिंदू समुदाय को एकजुट होकर अपनी आवाज उठानी चाहिए।
- कट्टरपंथी सोच से बाहर निकलने की आवश्यकता है।
नई दिल्ली, 18 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) के राष्ट्रीय प्रवक्ता विनोद बंसल ने बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे अत्याचारों को लेकर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि यह पड़ोसी देश अब आतंकियों, अलगाववादियों और हिंदू विद्रोहियों का गढ़ बन गया है।
विनोद बंसल ने समाचार एजेंसी राष्ट्र प्रेस से बातचीत में कहा कि बांग्लादेश अब जिहादियों का अड्डा और हिंदुओं के लिए श्मशान बनता जा रहा है। लगातार हत्याएं हो रही हैं। 2025 में ही दर्जनों हत्याएं हो चुकी हैं। यदि हम केवल दिसंबर और जनवरी की घटनाओं पर ध्यान दें, तो इस्लामिक जिहादियों की चरमपंथी हरकतों के कारण एक दर्जन से अधिक हिंदुओं की जान जा चुकी है।
उन्होंने आगे कहा, "बांग्लादेश, जो कभी शांतिपूर्ण क्षेत्र माना जाता था जब हिंदू बहुमत में थे, वहां देवी दुर्गा और काली के जयकारे गूंजते थे। आज यह देश आतंकियों, अलगाववादियों और हिंदू विद्रोहियों का गढ़ बन चुका है। इतने अशांत क्षेत्र में भी नोबेल शांति पुरस्कार विजेता कोई शांति की पहल नहीं कर रहे हैं।"
वीएचपी प्रवक्ता ने सवाल उठाया, "दो दिन पहले ब्रिटिश संसद में इस मुद्दे पर आवाज उठाई गई है, लेकिन यह समझ नहीं आता कि दुनियाभर के मानवाधिकार संगठन और संस्थाएं कहां छिपी हुई हैं? यह उनकी परीक्षा की घड़ी है कि वे कब मौन व्रत तोड़ेंगे और कब हिंदुओं के लिए आवाज उठाई जाएगी?"
गुजरात में पतंगबाजी को लेकर शुरू हुए विवाद पर विनोद बंसल ने कहा कि पतंगबाजी के दौरान मस्जिद से घोषणाएं की जा रही थीं कि यह इस्लाम के खिलाफ है। इसका असर भी देखने को मिला और बहुत से लोग छतों से नीचे उतर आए।
उन्होंने कहा, "पतंग बनाने वाले और बेचने वाले अधिकतर मुस्लिम लोग हैं। ये हिंदू तीर्थयात्राओं में धन कमाते हैं और मंदिरों के बाहर प्रसाद भी बेचते हैं।" इसके साथ ही, विनोद बंसल ने कहा कि दूसरे समुदाय के लोगों को कट्टरपंथी सोच से बाहर निकलकर आगे बढ़ना चाहिए।