पंजाब के नए डीजीपी गौरव यादव: 1992 बैच के IPS अधिकारी को मिली नियमित नियुक्ति, 4 साल बाद समाप्त हुई कार्यवाहक व्यवस्था
सारांश
मुख्य बातें
पंजाब की भगवंत मान सरकार ने 9 अक्टूबर 2026 को 1992 बैच के वरिष्ठ IPS अधिकारी गौरव यादव को राज्य का नियमित पुलिस महानिदेशक (DGP) नियुक्त किया। गृह विभाग की आधिकारिक अधिसूचना के साथ ही जुलाई 2022 से चली आ रही कार्यवाहक डीजीपी की व्यवस्था औपचारिक रूप से समाप्त हो गई।
नियुक्ति की प्रक्रिया और पृष्ठभूमि
57 वर्षीय गौरव यादव को संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) द्वारा अनुशंसित तीन वरिष्ठ IPS अधिकारियों के पैनल में से चुना गया है। पैनल में उनके अलावा शरद सत्य चौहान और हरप्रीत सिंह सिद्धू के नाम शामिल थे। UPSC ने यह पैनल जुलाई 2026 में राज्य सरकार को भेजा था, जिसके बाद से अंतिम निर्णय का इंतजार किया जा रहा था।
गृह मामलों के विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव आलोक शेखर के हस्ताक्षर से जारी आदेश में कहा गया है, 'संघ लोक सेवा आयोग से प्राप्त पैनल पर विचार करने के बाद पंजाब के राज्यपाल श्री गौरव यादव, IPS को पंजाब का पुलिस महानिदेशक (पुलिस बल प्रमुख) नियुक्त करते हैं।' आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि उनका कार्यकाल पदभार ग्रहण करने की तिथि से न्यूनतम दो वर्ष का होगा।
हाईकोर्ट का हस्तक्षेप और कानूनी संदर्भ
इस नियुक्ति में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट की भूमिका भी महत्वपूर्ण रही। अदालत ने 1 अक्टूबर 2026 को राज्य सरकार को नियमित DGP नियुक्त करने का निर्देश दिया था और मुख्य सचिव के.ए.पी. सिन्हा से 13 अक्टूबर तक अनुपालन हलफनामा दाखिल करने को कहा था। नियुक्ति आदेश में सर्वोच्च न्यायालय के 22 सितंबर 2006 और 3 जुलाई 2018 के उन निर्देशों का हवाला दिया गया है, जो प्रकाश सिंह एवं अन्य बनाम भारत संघ मामले में पुलिस सुधारों से संबंधित हैं।
यह ऐसे समय में आया है जब लंबे समय तक अतिरिक्त प्रभार के आधार पर पुलिस प्रमुख का पद चलाए जाने को लेकर लगातार सवाल उठते रहे थे। गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट के दिशानिर्देशों के बावजूद कई राज्यों में नियमित DGP की नियुक्ति में देरी एक राष्ट्रव्यापी समस्या रही है।
गौरव यादव का कार्यकाल और योगदान
गौरव यादव को जुलाई 2022 में तत्कालीन DGP वी.के. भावरा के छुट्टी पर जाने के बाद पंजाब पुलिस प्रमुख का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया था। उस समय वह विशेष DGP (प्रशासन) के पद पर थे और मुख्यमंत्री भगवंत मान के कार्यालय से भी जुड़े हुए थे।
कार्यवाहक DGP के रूप में चार साल से अधिक के कार्यकाल में उन्होंने राज्य में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के साथ-साथ नशा तस्करी और गैंगस्टर नेटवर्क जैसी जटिल चुनौतियों से निपटने के लिए पुलिस बल का नेतृत्व किया। संगठित अपराध पर अंकुश लगाना, नशा विरोधी अभियान को सुदृढ़ करना और पुलिस प्रशासन में सुधार करना उनकी प्रमुख प्राथमिकताओं में रहा।
पंजाब पुलिस प्रशासन पर असर
नियमित नियुक्ति से पंजाब पुलिस के शीर्ष पद पर नेतृत्व की निरंतरता सुनिश्चित होगी। विशेषज्ञों का मानना है कि कार्यवाहक व्यवस्था में अधिकारी दीर्घकालिक नीतिगत निर्णय लेने में संकोच करते हैं, जबकि नियमित DGP संस्थागत सुधारों को अधिक दृढ़ता से लागू कर सकता है।
यह नियुक्ति इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि पंजाब, नशा तस्करी और सीमापार संगठित अपराध की दृष्टि से देश का एक संवेदनशील राज्य है — जहाँ पुलिस नेतृत्व की स्थिरता सीधे सुरक्षा परिणामों को प्रभावित करती है।
आगे क्या होगा
गौरव यादव के नियमित DGP बनने के साथ ही अब पंजाब पुलिस के शीर्ष पर उनकी स्थिति औपचारिक हो गई है। उनका न्यूनतम दो वर्ष का कार्यकाल राज्य में पुलिस सुधारों और अपराध नियंत्रण की दीर्घकालिक रणनीति बनाने का अवसर देगा। हाईकोर्ट के निर्देश के अनुपालन में मुख्य सचिव को 13 अक्टूबर तक अनुपालन हलफनामा भी दाखिल करना है।