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क्या ग्रेटर नोएडा के डेल्टा वन में दूषित जलापूर्ति की शिकायत पर प्राधिकरण ने सही कार्रवाई की?

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क्या ग्रेटर नोएडा के डेल्टा वन में दूषित जलापूर्ति की शिकायत पर प्राधिकरण ने सही कार्रवाई की?

सारांश

ग्रेटर नोएडा में दूषित जलापूर्ति की शिकायत के बाद प्राधिकरण ने तत्काल जांच की। क्या जल विभाग ने प्रभावी कार्रवाई की है? जानिए इस रिपोर्ट में।

मुख्य बातें

जल की गुणवत्ता की जांच की गई और कोई दूषित पानी का साक्ष्य नहीं मिला है।
जल विभाग ने तकनीकी खराबियों का समाधान किया है।
सुरक्षा के लिए पानी के सैंपल एकत्र किए गए हैं।
प्राधिकरण ने क्षेत्रवासियों से शिकायत करने का आग्रह किया है।
स्वच्छ पेयजल की उपलब्धता प्राथमिकता है।

ग्रेटर नोएडा, 7 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। ग्रेटर नोएडा के सेक्टर डेल्टा-वन में दूषित जलापूर्ति की शिकायत मिलने के बाद ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण ने इस मुद्दे को गंभीरता से लेते हुए तुरंत जांच शुरू की। प्राधिकरण के अपर मुख्य कार्यपालक अधिकारी (एसीईओ) सुनील कुमार सिंह के निर्देश पर जल विभाग की टीम ने मौके पर पहुंचकर सेक्टरवासियों के घरों में सप्लाई किए जा रहे पानी की जांच की। जल विभाग की टीम ने उन घरों को प्राथमिकता दी, जहां से दूषित पानी की शिकायत की गई थी।

जांच के दौरान, अधिकांश घरों में पानी को साफ पाया गया। विभाग के अनुसार, केवल एक घर के सप्लाई कनेक्शन में तकनीकी खराबी थी, जबकि एक अन्य स्थान पर पाइपलाइन में लीक मिला। इन दोनों मामलों में जल विभाग ने त्वरित मरम्मत कर समस्या का समाधान कर दिया। जांच में कहीं भी जलापूर्ति में सीवर के पानी के मिश्रण के कोई साक्ष्य नहीं मिले हैं।

इसके साथ ही, जल विभाग की टीम ने एहतियात के तौर पर शाम के समय जलापूर्ति शुरू होने पर दोबारा पानी के सैंपल एकत्र किए हैं। इन सैंपलों को विस्तृत जांच के लिए प्रयोगशाला भेजा जाएगा, ताकि पानी की गुणवत्ता के बारे में किसी भी तरह की आशंका को पूरी तरह से दूर किया जा सके। हाल ही में इंदौर में हुई दूषित जल की घटना को ध्यान में रखते हुए ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) एनजी रवि कुमार ने पूरे ग्रेटर नोएडा क्षेत्र में जल की रैंडम जांच कराने के निर्देश दिए हैं।

एसीईओ सुनील कुमार सिंह ने बताया कि जहां-जहां प्राधिकरण द्वारा जलापूर्ति की जाती है, वहां पानी की गुणवत्ता की जांच स्वयं प्राधिकरण कराएगा। इसके अतिरिक्त, बिल्डर सोसाइटियों और कोऑपरेटिव सोसाइटियों को भी निर्देश दिए गए हैं। इन सोसाइटियों की प्रबंधन समितियों, बिल्डरों या अपार्टमेंट ओनर्स एसोसिएशन (एओए) को अपने जलाशयों की नियमित सफाई कराने, पानी के सैंपल लेकर जांच कराने और उसकी रिपोर्ट प्राधिकरण के जल विभाग में जमा करने के लिए कहा गया है।

इस संबंध में जल विभाग की ओर से औपचारिक पत्र जारी कर जानकारी दी जा रही है। औद्योगिक, व्यावसायिक, आईटी और संस्थागत क्षेत्रों में भी पानी की गुणवत्ता की जांच कराने के निर्देश दिए गए हैं। प्राधिकरण ने क्षेत्रवासियों से अपील की है कि यदि कहीं भी दूषित जलापूर्ति की शिकायत हो तो तुरंत जल विभाग को सूचित करें। इसके लिए वरिष्ठ प्रबंधक जल के मोबाइल नंबर 9205691408 और प्रबंधक जल के मोबाइल नंबर 8937024017 पर संपर्क किया जा सकता है। प्राधिकरण का कहना है कि स्वच्छ और सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराना उसकी सर्वोच्च प्राथमिकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

यह कहना उचित है कि जल गुणवत्ता की जांच और सुधार की प्रक्रिया अनिवार्य है। प्राधिकरण ने उचित कदम उठाए हैं, परंतु भविष्य में ऐसी घटनाओं से बचने के लिए स्थायी समाधान आवश्यक हैं।
RashtraPress
20 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

क्या ग्रेटर नोएडा में जलापूर्ति की गुणवत्ता की जांच की गई है?
जी हां, प्राधिकरण ने जलापूर्ति की गुणवत्ता की जांच की है और कोई सीवर मिश्रण नहीं पाया गया।
कहाँ से शिकायत की जा सकती है?
आप जल विभाग के वरिष्ठ प्रबंधक के मोबाइल नंबर 9205691408 और प्रबंधक जल के मोबाइल नंबर 8937024017 पर संपर्क कर सकते हैं।
क्या किसी प्रकार की तकनीकी खराबी पाई गई थी?
हां, केवल एक घर के सप्लाई कनेक्शन में तकनीकी खराबी पाई गई थी।
जल विभाग की अगली कार्रवाई क्या होगी?
जल विभाग ने पानी के सैंपल एकत्र किए हैं, जिन्हें प्रयोगशाला में जांच के लिए भेजा जाएगा।
क्या प्राधिकरण ने भविष्य के लिए कोई योजना बनाई है?
जी हां, प्राधिकरण ने पूरे क्षेत्र में जल की रैंडम जांच कराने के निर्देश दिए हैं।
राष्ट्र प्रेस
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