प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना: गुजरात के कच्छ, दाहोद और छोटा उदयपुर को राष्ट्रीय पुरस्कार
सारांश
मुख्य बातें
प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना के अंतर्गत गुजरात के कच्छ, दाहोद और छोटा उदयपुर जिलों को 12 अक्टूबर 2026 को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित किया गया। नई दिल्ली में केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय द्वारा आयोजित समारोह में कच्छ को बेहतर प्रशासन एवं सेवा वितरण के लिए, जबकि आदिवासी बहुल दाहोद और छोटा उदयपुर को सिंचाई बुनियादी ढाँचे में उल्लेखनीय सुधार के लिए यह पुरस्कार प्रदान किए गए। योजना के पहले ही वर्ष में इस उपलब्धि को गुजरात के लिए महत्वपूर्ण सफलता माना जा रहा है।
पुरस्कार समारोह का विवरण
यह समारोह सोमवार को नई दिल्ली में केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय द्वारा प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना की पहली वर्षगांठ के उपलक्ष्य में आयोजित किया गया था। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने राष्ट्रीय समीक्षा बैठक में देशभर के उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले 18 जिलों को पुरस्कृत किया, जिनमें गुजरात के तीन जिले शामिल रहे।
गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने कच्छ, दाहोद और छोटा उदयपुर के जिला प्रशासन तथा कृषि विभाग के अधिकारियों को इस उपलब्धि पर बधाई दी।
किस जिले को किस उपलब्धि पर मिला सम्मान
कच्छ जिले को बेहतर प्रशासनिक कार्यप्रणाली और किसानों तक योजनाओं की प्रभावी पहुँच सुनिश्चित करने के लिए पुरस्कार दिया गया। वहीं दाहोद और छोटा उदयपुर — दोनों पहाड़ी और आदिवासी बहुल क्षेत्र — को सिंचाई क्षमता विस्तार, बुनियादी ढाँचे को सुदृढ़ करने और किसानों को पर्याप्त जल उपलब्धता सुनिश्चित करने के प्रयासों के लिए सम्मानित किया गया।
राज्य सरकार के अनुसार, इन प्रयासों से कृषि उत्पादन और उत्पादकता दोनों में उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया गया है। गौरतलब है कि गुजरात के कच्छ, दाहोद, छोटा उदयपुर और पंचमहल — कुल चार जिले — इस योजना के अंतर्गत आते हैं, और पहले ही वर्ष में इनमें से तीन का राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित होना विशेष उपलब्धि है।
प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना क्या है
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 12 अक्टूबर 2025 को इस योजना की शुरुआत की थी। ₹24,000 करोड़ की लागत वाली यह योजना देश के उन 100 कृषि आकांक्षी जिलों को कवर करती है, जहाँ कृषि विकास की संभावनाएँ तो हैं, लेकिन उत्पादकता और आर्थिक प्रगति के मामले में वे अभी भी पिछड़े हुए हैं।
इन जिलों में कम कृषि उत्पादकता, मध्यम फसल तीव्रता और कृषि ऋण की औसत से कम उपलब्धता जैसी चुनौतियाँ मौजूद हैं। योजना इन चुनौतियों से निपटने के लिए छह प्रमुख क्षेत्रों में सुधार पर केंद्रित है।
योजना के छह प्रमुख उद्देश्य
इस योजना के तहत कृषि उत्पादकता बढ़ाने, फसल विविधीकरण और टिकाऊ कृषि पद्धतियों को प्रोत्साहन, फसल कटाई के बाद भंडारण क्षमता विस्तार, सिंचाई बुनियादी ढाँचे में सुधार, अल्पकालिक एवं दीर्घकालिक कृषि ऋण तक पहुँच बढ़ाने तथा प्रशासन और सेवा वितरण को सुदृढ़ करने पर ध्यान केंद्रित किया जाता है।
यह ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब देश के कई आदिवासी और सुदूर ग्रामीण जिलों में सिंचाई सुविधाओं की कमी कृषि विकास की सबसे बड़ी बाधा बनी हुई है। दाहोद और छोटा उदयपुर जैसे जिलों की सफलता इस दिशा में एक प्रेरक उदाहरण बन सकती है।
आगे की राह
योजना की पहली वर्षगांठ पर हुई राष्ट्रीय समीक्षा बैठक से यह संकेत मिलता है कि केंद्र सरकार जिला-स्तरीय प्रदर्शन की निगरानी और सर्वश्रेष्ठ कार्यप्रणालियों को प्रोत्साहन देने पर जोर दे रही है। गुजरात के इन तीन जिलों की उपलब्धि अन्य राज्यों के लिए भी अनुसरणीय मॉडल के रूप में सामने आ सकती है।