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क्या हरिका द्रोणावल्ली ग्रैंडमास्टर बनने वाली दूसरी भारतीय महिला खिलाड़ी हैं?

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क्या हरिका द्रोणावल्ली ग्रैंडमास्टर बनने वाली दूसरी भारतीय महिला खिलाड़ी हैं?

सारांश

भारतीय शतरंज की दुनिया में हरिका द्रोणावल्ली की यात्रा एक प्रेरणादायक कहानी है। ग्रैंडमास्टर बनने की राह में उन्होंने कई कीर्तिमान स्थापित किए हैं। जानें उनकी उपलब्धियों और संघर्षों के बारे में।

मुख्य बातें

हरिका द्रोणावल्ली ने भारतीय शतरंज में अद्वितीय योगदान दिया है।
उन्होंने कई बड़े पुरस्कार जीते हैं।
हरिका ने युवा खिलाड़ियों के लिए एक प्रेरणा का स्रोत बनकर उभरी हैं।
उनकी उपलब्धियों ने भारतीय महिला खेलों को नया आयाम दिया है।
हरिका का संघर्ष और समर्पण सभी के लिए एक उदाहरण है।

नई दिल्ली, 11 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। भारतीय शतरंज की दुनिया में हरिका द्रोणावल्ली का नाम एक विशेष सम्मान के साथ लिया जाता है। वह उन कुछ महिला खिलाड़ियों में से हैं, जिन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का नाम रोशन किया है।

हरिका द्रोणावल्ली का जन्म 12 जनवरी 1991 को गुंटूर, आंध्र प्रदेश में हुआ था। उन्होंने श्री वेंकटेश्वर बाला कुटीर स्कूल में शिक्षा प्राप्त की। बेहद कम उम्र में शतरंज खेलना शुरू करने वाली हरिका ने अंडर-9 राष्ट्रीय चैंपियनशिप में मेडल जीता था। इसके पश्चात, उन्होंने अंडर-10 लड़कियों के लिए विश्व युवा शतरंज चैंपियनशिप में सिल्वर मेडल हासिल किया। कोच एनवीएस रामाराजू ने उनके खेल को निखारा।

हरिका ने 2012, 2015 और 2017 में महिला विश्व शतरंज चैंपियनशिप में तीन कांस्य पदक जीते। 2016 में, उन्होंने चीन के चेंगदू में फिडे महिला ग्रैंड प्रिक्स इवेंट में विजय प्राप्त की और फिडे महिला रैंकिंग में दुनिया में 5वीं रैंक पर पहुँच गईं। वह 2024 में 45वें शतरंज ओलंपियाड में स्वर्ण पदक जीतने वाली महिला टीम का हिस्सा थीं। हरिका 2025 में फिडे महिला विश्व कप के क्वार्टर फाइनल में पहुँची थीं।

उपलब्धियों के संदर्भ में, हरिका ने 2003 में वुमन इंटरनेशनल मास्टर का खिताब जीता। यह खिताब जीतने वाली एशियाई महाद्वीप की सबसे कम उम्र की महिला खिलाड़ी बनीं। 2004 में वुमन ग्रैंडमास्टर खिताब, 2007 में इंटरनेशनल मास्टर खिताब, और 2011 में ग्रैंडमास्टर खिताब हासिल किया। वह ग्रैंडमास्टर बनने वाली दूसरी भारतीय महिला बनीं। 2009 में उन्होंने नेशनल विमेन चेस चैंपियनशिप, चेन्नई में स्वर्ण पदक जीता। पिछले 16 वर्षों में, उन्होंने विमेन 'ए' चैंपियनशिप, विमेन 'बी' चैंपियनशिप, नेशनल जूनियर गर्ल्स और सब-जूनियर गर्ल्स टाइटल्स समेत नेशनल स्तर पर 16 मेडल जीते हैं।

ग्रैंडमास्टर बनने वाली पहली भारतीय महिला खिलाड़ी एस. विजयलक्ष्मी थीं। उन्होंने वर्ष 2001 में यह प्रतिष्ठित खिताब हासिल किया।

हरिका को भारतीय सरकार ने वर्ष 2007-08 के लिए अर्जुन अवॉर्ड से सम्मानित किया। 2019 में, उन्हें खेल के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए पद्मश्री से नवाजा गया।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि यह भारतीय महिला खिलाड़ियों की विश्व मंच पर बढ़ती हुई ताकत का प्रतीक है। उनका संघर्ष और समर्पण हमें यह सिखाते हैं कि अगर ठान लिया जाए, तो कुछ भी संभव है।
RashtraPress
20 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

हरिका द्रोणावल्ली का जन्म कब हुआ?
हरिका द्रोणावल्ली का जन्म 12 जनवरी 1991 को गुंटूर, आंध्र प्रदेश में हुआ।
हरिका ने कब ग्रैंडमास्टर का खिताब प्राप्त किया?
हरिका ने 2011 में ग्रैंडमास्टर का खिताब प्राप्त किया।
हरिका द्रोणावल्ली को कौन-से पुरस्कार मिले हैं?
हरिका को अर्जुन अवॉर्ड (2007-08) और पद्मश्री (2019) जैसे कई पुरस्कार मिले हैं।
हरika की प्रमुख उपलब्धियाँ क्या हैं?
हरिका ने कई बार महिला विश्व चैंपियनशिप में पदक जीते और 16 राष्ट्रीय स्तर पर मेडल जीते हैं।
क्या हरिका द्रोणावल्ली पहली भारतीय महिला ग्रैंडमास्टर हैं?
नहीं, हरिका द्रोणावल्ली ग्रैंडमास्टर बनने वाली दूसरी भारतीय महिला हैं, पहली एस. विजयलक्ष्मी हैं।
राष्ट्र प्रेस
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