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हिमाचल सरकार को हाईकोर्ट की चेतावनी, 10 लाख का जुर्माना

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हिमाचल सरकार को हाईकोर्ट की चेतावनी, 10 लाख का जुर्माना

सारांश

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को बुनियादी ढांचे में सुधार न करने पर 10 लाख रुपए का जुर्माना लगाया है। यह निर्णय सरकार की अनदेखी और कार्यवाही में कमी के चलते आया है।

मुख्य बातें

हिमाचल हाईकोर्ट ने राज्य सरकार पर 10 लाख का जुर्माना लगाया है।
सरकार ने न्यायपालिका के बुनियादी ढांचे में सुधार के लिए कई निर्देशों की अनदेखी की।
अगली सुनवाई 4 मई को होगी।
कोर्ट ने सरकार को स्पष्ट चेतावनी दी है कि ठोस कदम नहीं उठाए गए तो सख्त आदेश दिए जा सकते हैं।
एनडीपीएस मामलों की बढ़ती संख्या पर भी चिंता व्यक्त की गई है।

शिमला, 7 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को एक गंभीर चेतावनी दी है। यह मामला न्यायपालिका के बुनियादी ढांचे से संबंधित है, और सरकार द्वारा उच्च न्यायालय के अनुरोधों को नजरअंदाज करना महंगा साबित हुआ है। हाईकोर्ट ने राज्य सरकार पर 10 लाख रुपए का जुर्माना लगाया है।

हिमाचल हाईकोर्ट ने बार-बार राज्य सरकार को निर्देश दिए थे कि न्यायालयों के लिए आवश्यक बुनियादी ढांचे में सुधार किया जाए, नए अदालतें स्थापित की जाएं और आवश्यक पदों को भरा जाए। लेकिन सरकार ने इन निर्देशों की अनदेखी की।

मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया की अगुवाई वाली खंडपीठ ने सरकार के इस रवैये पर कड़ी नाराजगी व्यक्त की। अदालत ने कहा कि सरकार केवल आश्वासन दे रही है, जबकि वास्तविकता में कोई ठोस कदम नहीं उठाए जा रहे हैं। सुनवाई के दौरान यह भी सामने आया कि विभिन्न अधिकारी एक-दूसरे पर जिम्मेदारियों का बोझ डालने की कोशिश कर रहे हैं, जिससे कार्य में और अधिक देरी हो रही है।

कोर्ट ने उस हलफनामे का भी गहन विश्लेषण किया, जिसमें बताया गया था कि कुछ प्रस्ताव कैबिनेट के समक्ष रखे जाएंगे। अदालत ने यह सवाल उठाया कि जब कैबिनेट की बैठकें नियमित होती हैं, तो इतने समय में कोई निर्णय क्यों नहीं लिया गया। तीन महीने से अधिक समय बीत जाने के बाद भी कोई ठोस प्रगति नहीं हुई, जिसे अदालत ने गंभीरता से लिया।

कोर्ट ने कुछ विशिष्ट स्थानों पर न्यायाधीशों और अदालतों की आवश्यकता को उजागर किया। इसके बजाय, सरकार ने कहीं और अदालतें स्थापित करने की योजना बनाई, जो कि आवश्यक नहीं थी। अदालत ने यह भी पूछा कि सरकार किस आधार पर ऐसे निर्णय ले रही है।

साथ ही, एनडीपीएस मामलों (नशे से संबंधित मामलों) की बढ़ती संख्या पर भी अदालत ने चिंता व्यक्त की। अदालत ने कहा कि केंद्र सरकार बार-बार विशेष अदालतें बनाने की बात कर चुकी है, लेकिन राज्य सरकार ने इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया। केवल हिमाचल को ड्रग-फ्री बनाने के दावे किए जा रहे हैं, जबकि आवश्यक बुनियादी ढांचा ही नहीं बनाया जा रहा।

अदालत ने कहा कि बढ़ती जनसंख्या और मामलों की संख्या के अनुसार बुनियादी ढांचे को बढ़ाना आवश्यक है। 20 साल पुराना सिस्टम वर्तमान की आवश्यकताओं को पूरा नहीं कर सकता। ऐसे में सरकार का यह रवैया संविधान के तहत उसकी जिम्मेदारियों से बचने जैसा है।

इन सभी बातों को ध्यान में रखते हुए, हाईकोर्ट ने राज्य सरकार पर 10 लाख रुपए का जुर्माना लगाया है और निर्देश दिया है कि यह राशि अदालत की रजिस्ट्री में जमा कराई जाए। इसके साथ ही, वित्त विभाग के प्रमुख सचिव को यह निर्देश दिया गया है कि वे अगले साल के बजट में न्यायपालिका के लिए कितनी राशि रखी गई है, इसकी पूरी जानकारी दें और पिछले साल के मुकाबले इसमें वृद्धि हुई है या नहीं, यह भी बताएं।

हाईकोर्ट ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि अगली सुनवाई तक सरकार ने ठोस और सक्रिय कदम नहीं उठाए, तो और भी कड़े आदेश दिए जा सकते हैं। अब इस मामले की अगली सुनवाई 4 मई को होगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो कि नागरिकों के अधिकारों और न्याय की उपलब्धता के लिए महत्वपूर्ण है।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

हाईकोर्ट ने राज्य सरकार पर जुर्माना क्यों लगाया?
राज्य सरकार ने न्यायपालिका के बुनियादी ढांचे में सुधार के लिए हाईकोर्ट के निर्देशों की अनदेखी की, जिसके कारण 10 लाख रुपए का जुर्माना लगाया गया।
क्या जुर्माना राज्य सरकार को भुगतान करना होगा?
हाँ, राज्य सरकार को यह जुर्माना अदालत की रजिस्ट्री में जमा करना होगा।
अगली सुनवाई कब होगी?
इस मामले की अगली सुनवाई 4 मई को होगी।
क्या सरकार ने पहले भी हाईकोर्ट के निर्देशों का पालन नहीं किया?
हाँ, राज्य सरकार को कई बार निर्देश दिए गए थे, लेकिन उसने कोई ठोस कदम नहीं उठाए।
केंद्र सरकार ने इस मुद्दे पर क्या कहा?
केंद्र सरकार ने भी विशेष अदालतें बनाने की बात की है, लेकिन राज्य सरकार ने इस दिशा में कुछ नहीं किया।
राष्ट्र प्रेस
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