महिला आरक्षण विधेयक: सुषमा खर्कवाल का लोकतंत्र को मजबूत बनाने का दृष्टिकोण
सारांश
Key Takeaways
- महिला आरक्षण विधेयक महिलाओं के सशक्तीकरण के लिए महत्वपूर्ण है।
- यह लोकतंत्र को और मजबूत करेगा।
- प्रधानमंत्री मोदी ने महिलाओं के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दिखाई है।
- महिलाएं हर क्षेत्र में आगे बढ़ रही हैं।
- सभी दलों को इस बिल का समर्थन करना चाहिए।
लखनऊ, 9 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। महिला आरक्षण विधेयक को लखनऊ की मेयर सुषमा खर्कवाल ने महिलाओं के सशक्तिकरण और समावेशी लोकतंत्र के लिए एक अत्यंत आवश्यक कदम बताया। उन्होंने कहा कि अब महिलाओं को राजनीति में सही प्रतिनिधित्व मिलने वाला है, जो देश के लोकतंत्र को और मजबूत करेगा।
सुषमा खर्कवाल ने प्रधानमंत्री मोदी की प्रशंसा करते हुए बताया कि जब वे 2014 में सत्ता में आए थे, तब उन्होंने महिलाओं से वादा किया था कि वे महिला आरक्षण विधेयक लाएंगे। आज उन्होंने अपनी बात को पूरा किया है। मैं सभी बहनों की तरफ से उन्हें ढेर सारी बधाई और शुभकामनाएं देती हूं।
उन्होंने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री ने जनता से किए गए अधिकतर वादों को पूरा किया है। लखनऊ की मेयर ने उदाहरण देते हुए कहा कि जनधन योजना में महिलाओं के नाम पर बैंक खाते खोले गए, राशन कार्ड में महिलाओं को मुखिया बनाया गया, आवास योजनाओं में घर महिलाओं के नाम पर दिए गए और गैस कनेक्शन भी महिलाओं के नाम पर जारी किए गए। ये सारे कदम महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण हैं।
लखनऊ की मेयर ने 'नारी शक्ति वंदन' जैसे अभियानों का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री ने अपने हाल के ब्लॉग में भी विपक्ष से सहयोग की अपील की है। उन्होंने कहा कि संसद में महिला आरक्षण से लोकतंत्र और अधिक समावेशी और मजबूत होगा। महिलाएं हर क्षेत्र में आगे बढ़ रही हैं, लेकिन राजनीति में उनकी भागीदारी अब भी कम है, जिसे इस विधेयक के माध्यम से बढ़ाया जा सकता है। 2014 के बाद से महिलाओं को लगातार सम्मान और अवसर दिए गए हैं। आज देश की राष्ट्रपति भी महिला हैं, उत्तर प्रदेश की राज्यपाल भी महिला हैं और मैं खुद लखनऊ की मेयर हूं। इससे पहले शायद ही किसी प्रधानमंत्री ने महिलाओं को इतना सम्मान दिया हो।
उन्होंने महिलाओं की कार्यशैली की सराहना करते हुए कहा कि जिस प्रकार महिलाएं घर का बजट संभालती हैं और हर छोटी-बड़ी चीज़ का ध्यान रखती हैं, उसी तरह वे समाज और प्रशासन को भी बेहतर तरीके से चला सकती हैं। जैसे मैं अपने नगर निगम को अपने घर की तरह संभालती हूं, उसी तरह महिलाएं जिम्मेदारी मिलने पर बेहतर कार्य कर सकती हैं। सभी दलों को इस विधेयक का समर्थन करना चाहिए। विपक्ष के घरों में भी महिलाएं हैं और उनका सम्मान होना चाहिए। भारत में महिलाओं का सम्मान सर्वोपरि है।