दंतेवाड़ा जंगल में सुरक्षा बलों का बड़ा ऑपरेशन: 75 डेटोनेटर, विस्फोटक और नक्सली साहित्य जब्त
सारांश
Key Takeaways
छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले के घने जंगलों में सुरक्षा बलों ने 3 मई 2026 को माओवादियों के एक गुप्त ठिकाने से विस्फोटकों और प्रतिबंधित सामग्रियों का बड़ा जखीरा बरामद किया। बारसूर पुलिस स्टेशन क्षेत्र के अंतर्गत तोडमा गाँव के निकट चलाए गए इस संयुक्त अभियान में 75 विद्युत डेटोनेटर, 500 ग्राम विस्फोटक, एक देसी राइफल और नक्सली साहित्य समेत अनेक सामग्रियाँ जब्त की गईं।
अभियान की पृष्ठभूमि
बस्तर मंडल में हाल के महीनों में माओवादियों के बड़े पैमाने पर आत्मसमर्पण के बाद, सुरक्षा बलों ने विद्रोहियों द्वारा छोड़े गए गुप्त ठिकानों की पहचान और उनमें छिपाई गई प्रतिबंधित सामग्री को जब्त करने के लिए पूरे क्षेत्र में तलाशी अभियान तेज कर दिए हैं। यह ऐसे समय में आया है जब राज्य सरकार बस्तर में नक्सल प्रभाव को जड़ से समाप्त करने के लिए लगातार खुफिया-आधारित ऑपरेशन चला रही है।
मुख्य घटनाक्रम
शनिवार को सटीक खुफिया जानकारी के आधार पर केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) की एक बटालियन और दंतेवाड़ा पुलिस की एक संयुक्त टीम ने तोडमा गाँव के घने जंगल में समन्वित तलाशी अभियान चलाया। अभियान में शामिल कर्मियों की सुरक्षा सुनिश्चित करते हुए पूरी कार्रवाई सावधानी और सटीकता के साथ अंजाम दी गई। शाम तक तलाशी दल के सभी सदस्य सुरक्षित रूप से बेस पर लौट आए।
बरामद सामग्री का विवरण
अभियान में बरामद सामग्री में 75 विद्युत डेटोनेटर, 500 ग्राम विस्फोटक, जिलेटिन स्टिक, सेफ्टी फ्यूज तार और संचार उपकरण शामिल हैं। इसके अलावा एक देसी राइफल, बैटरी, कैमरा फ्लैश, बिजली के तार, यूरिया पाउडर, ग्रेनेड पिन, दैनिक उपयोग की वस्तुएँ और नक्सली वैचारिक साहित्य भी जब्त किया गया। माना जा रहा है कि यह सामग्री माओवादी कार्यकर्ताओं द्वारा भविष्य के उपयोग के लिए छुपाकर रखी गई थी।
कानूनी प्रक्रिया और अगले कदम
अधिकारियों ने बरामद वस्तुओं से संबंधित विस्तृत जब्ती पंचनामा तैयार करने सहित आवश्यक कानूनी औपचारिकताएँ शुरू कर दी हैं। गौरतलब है कि यह बरामदगी बस्तर डिवीजन में नक्सली अवशेषों को नष्ट करने के लिए जारी सुरक्षा अभियानों की एक कड़ी है। इतनी बड़ी मात्रा में सामग्री का मिलना विद्रोहियों के पूर्व संसाधन-संचय की विशालता को उजागर करता है।
विशेषज्ञ क्या कहते हैं
सुरक्षा विश्लेषकों के अनुसार, आत्मसमर्पण के बाद इस प्रकार के जखीरे की बरामदगी यह दर्शाती है कि माओवादी नेटवर्क अपने पीछे हथियार और विस्फोटक छोड़ जाते हैं, जो भविष्य में बड़ा खतरा बन सकते हैं। खुफिया-आधारित अभियानों की बढ़ती सफलता इस बात का संकेत है कि सुरक्षा बलों की पकड़ बस्तर के दूरदराज इलाकों में भी मजबूत हो रही है। आने वाले हफ्तों में ऐसे और अभियान चलाए जाने की संभावना है।