25 सितंबर 2026
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आईआईटी खड़गपुर और आईआरआईएमईई में 5 साल का MOU, वंदे भारत स्टाफ को मिलेगा विशेष तकनीकी प्रशिक्षण

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आईआईटी खड़गपुर और आईआरआईएमईई में 5 साल का MOU, वंदे भारत स्टाफ को मिलेगा विशेष तकनीकी प्रशिक्षण

सारांश

आईआईटी खड़गपुर और आईआरआईएमईई के बीच हुए 5 साल के MOU से वंदे भारत के परिचालन कर्मचारियों को TCMS, ट्रैक्शन और पुनर्योजी ब्रेकिंग जैसी जटिल तकनीकों में आवासीय प्रशिक्षण मिलेगा — यह ऐसे समय में आया है जब रेलवे 260 स्लीपर ट्रेनसेट खरीदने की तैयारी में है।

मुख्य बातें

आईआईटी खड़गपुर और आईआरआईएमईई, जमालपुर के बीच 25 सितंबर 2026 को 5 वर्षीय MOU पर हस्ताक्षर हुए।
प्रशिक्षण में TCMS , उन्नत कर्षण प्रणाली , रोलिंग स्टॉक निदान , विद्युत सुरक्षा और पुनर्योजी ब्रेकिंग शामिल होंगे।
भारतीय रेलवे वर्तमान में 79 वंदे भारत ट्रेनें चला रहा है और 260 स्लीपर ट्रेनसेट खरीदने की योजना है, जिनमें से 60 निर्माणाधीन हैं।
MOU पर प्रोफेसर स्वगता दासगुप्ता (आईआईटी खड़गपुर) और प्रेम प्रकाश (आईआरआईएमईई) ने हस्ताक्षर किए।
वंदे भारत मालगाड़ी के प्रोटोटाइप का परीक्षण भी समानांतर रूप से जारी है।

भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) खड़गपुर और भारतीय रेलवे यांत्रिक एवं विद्युत अभियांत्रिकी संस्थान (आईआरआईएमईई), जमालपुर के बीच 25 सितंबर 2026 को एक पाँच वर्षीय समझौता ज्ञापन (MOU) पर हस्ताक्षर किए गए, जिसके तहत वंदे भारत ट्रेनों के परिचालन कर्मचारियों को अर्ध-उच्च गति रेल प्रौद्योगिकी में उन्नत प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा। यह साझेदारी ऐसे समय में आई है जब भारतीय रेलवे देशभर में वंदे भारत बेड़े को तेज़ी से विस्तार दे रहा है और 260 वंदे भारत स्लीपर ट्रेनसेट खरीदने की योजना पर काम चल रहा है।

MOU की मुख्य शर्तें और प्रशिक्षण ढाँचा

आईआईटी खड़गपुर के रेलवे अनुसंधान केंद्र (CRR) द्वारा समन्वित इस कार्यक्रम के तहत भारतीय रेलवे के अधिकारियों को विशेष आवासीय प्रशिक्षण दिया जाएगा। प्रशिक्षण मॉड्यूल में उन्नत कर्षण एवं प्रणोदन प्रणाली, विद्युत सुरक्षा, ट्रेन नियंत्रण एवं प्रबंधन प्रणाली (TCMS), रोलिंग स्टॉक निदान, स्थिति निगरानी, विश्वसनीयता अभियांत्रिकी और पुनर्योजी ब्रेकिंग जैसे महत्वपूर्ण विषय शामिल हैं।

संस्थान के अनुसार, इस पहल में कक्षा शिक्षण, प्रयोगशाला प्रयोग, व्यावहारिक अनुभव और क्षेत्र भ्रमण — चारों आयामों को एकीकृत किया जाएगा, ताकि स्वदेशी रेलवे प्रौद्योगिकियों को सुरक्षित और अधिक विश्वसनीय बनाया जा सके।

हस्ताक्षर करने वाले अधिकारी

MOU पर आईआईटी खड़गपुर की ओर से डीन ऑफ आउटरीच प्रोफेसर स्वगता दासगुप्ता और आईआरआईएमईई की ओर से डीन प्रेम प्रकाश ने हस्ताक्षर किए। प्रोफेसर विक्रांत राचेरला (आईआईटी खड़गपुर) और सिद्धार्थ शंकर (आईआरआईएमईई) इस समझौते के नोडल अधिकारी के रूप में कार्यरत रहेंगे।

वंदे भारत बेड़े का विस्तार और प्रशिक्षण की ज़रूरत

भारतीय रेलवे वर्तमान में विभिन्न मार्गों पर 79 वंदे भारत ट्रेनें संचालित कर रहा है। इसके अलावा, हावड़ा और कामाख्या (असम) के बीच एक वंदे भारत स्लीपर ट्रेन भी परिचालन में है। रेलवे की 260 वंदे भारत स्लीपर ट्रेनसेट खरीदने की योजना है, जिनमें से 60 का निर्माण अभी जारी है। साथ ही, वंदे भारत मालगाड़ी के एक प्रोटोटाइप का परीक्षण भी चल रहा है।

गौरतलब है कि जैसे-जैसे स्लीपर ट्रेनों की संख्या बढ़ेगी, उनके संचालन और रखरखाव के लिए प्रशिक्षित कर्मचारियों की माँग भी तेज़ी से बढ़ेगी — और यही इस MOU की मूल आवश्यकता है।

वंदे भारत की जटिल तकनीकी संरचना

सामान्य रेकों के विपरीत, जिनमें एक अलग लोकोमोटिव की ज़रूरत होती है, वंदे भारत ट्रेनसेट में कई डिब्बों में इलेक्ट्रिक ट्रैक्शन मोटर लगी होती हैं। प्रत्येक मोटर-युक्त डिब्बा स्वयं और दो अन्य बिना मोटर के डिब्बों को संचालित कर सकता है, जिससे समग्र प्रणाली की संरचना अत्यंत जटिल हो जाती है। इन ट्रेनों में अत्याधुनिक नियंत्रण तकनीक का उपयोग होता है, जो ऑपरेटरों के लिए उन्नत प्रशिक्षण को अनिवार्य बनाती है।

आगे की राह

अधिकारियों के अनुसार, ट्रेन में तैनात कर्मचारियों को उन्नत प्रणालियों में आने वाली समस्याओं की पहचान और समाधान की विशेषज्ञता की आवश्यकता होगी — विशेष रूप से लंबी दूरी की स्लीपर ट्रेनों के संदर्भ में, जहाँ मार्ग में तकनीकी खराबी को तत्काल संभालना होता है। यह MOU भारतीय रेलवे के स्वदेशीकरण एजेंडे को शैक्षणिक अनुसंधान क्षमता से जोड़ने का एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसका संदर्भ बड़ा है — भारतीय रेलवे 260 वंदे भारत स्लीपर ट्रेनसेट खरीदने जा रहा है और इन ट्रेनों की विकेंद्रीकृत ट्रैक्शन संरचना पारंपरिक लोकोमोटिव-आधारित प्रशिक्षण से मौलिक रूप से अलग है। असली सवाल यह है कि क्या पाँच साल की यह साझेदारी उस पैमाने पर प्रशिक्षित जनशक्ति तैयार कर पाएगी जो तेज़ी से बढ़ते बेड़े की माँग करेगी। अकादमिक-रेलवे सहयोग की पिछली मिसालें बताती हैं कि ऐसे MOU अक्सर कागज़ पर मज़बूत और ज़मीन पर कमज़ोर साबित होते हैं — जब तक कि प्रशिक्षण बैचों की संख्या और समयसीमा सार्वजनिक न की जाए।
RashtraPress
25 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

आईआईटी खड़गपुर और आईआरआईएमईई के बीच MOU क्या है?
यह 25 सितंबर 2026 को हस्ताक्षरित एक 5 वर्षीय समझौता ज्ञापन है, जिसके तहत भारतीय रेलवे के वंदे भारत परिचालन कर्मचारियों को आईआईटी खड़गपुर में उन्नत तकनीकी प्रशिक्षण दिया जाएगा। इस साझेदारी का समन्वय आईआईटी खड़गपुर के रेलवे अनुसंधान केंद्र (CRR) द्वारा किया जाएगा।
वंदे भारत स्टाफ को किन विषयों में प्रशिक्षण मिलेगा?
प्रशिक्षण मॉड्यूल में उन्नत कर्षण एवं प्रणोदन प्रणाली, TCMS (ट्रेन नियंत्रण एवं प्रबंधन प्रणाली), विद्युत सुरक्षा, रोलिंग स्टॉक निदान, स्थिति निगरानी, विश्वसनीयता अभियांत्रिकी और पुनर्योजी ब्रेकिंग शामिल हैं। इसमें कक्षा, प्रयोगशाला, व्यावहारिक और क्षेत्र भ्रमण — चारों स्तर पर शिक्षा दी जाएगी।
भारतीय रेलवे की वंदे भारत स्लीपर ट्रेनसेट खरीद योजना क्या है?
भारतीय रेलवे की 260 वंदे भारत स्लीपर ट्रेनसेट खरीदने की योजना है, जिनमें से 60 का निर्माण अभी जारी है। इसके अलावा हावड़ा और कामाख्या (असम) के बीच एक स्लीपर ट्रेन पहले से परिचालन में है और वंदे भारत मालगाड़ी के प्रोटोटाइप का परीक्षण भी चल रहा है।
वंदे भारत ट्रेनों के लिए उन्नत प्रशिक्षण क्यों ज़रूरी है?
वंदे भारत ट्रेनसेट में कई डिब्बों में इलेक्ट्रिक ट्रैक्शन मोटर लगी होती हैं और प्रत्येक मोटर-युक्त डिब्बा दो अन्य बिना मोटर डिब्बों को चला सकता है, जो इसे पारंपरिक लोकोमोटिव से तकनीकी रूप से कहीं अधिक जटिल बनाता है। अत्याधुनिक नियंत्रण तकनीक के कारण ऑपरेटरों को विशेष प्रशिक्षण अनिवार्य है, विशेष रूप से लंबी दूरी की स्लीपर ट्रेनों के लिए।
इस MOU पर किसने हस्ताक्षर किए?
MOU पर आईआईटी खड़गपुर की डीन ऑफ आउटरीच प्रोफेसर स्वगता दासगुप्ता और आईआरआईएमईई के डीन प्रेम प्रकाश ने हस्ताक्षर किए। प्रोफेसर विक्रांत राचेरला (आईआईटी खड़गपुर) और सिद्धार्थ शंकर (आईआरआईएमईई) नोडल अधिकारी के रूप में कार्यरत हैं।
राष्ट्र प्रेस
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