काजीपेट रेल मैन्युफैक्चरिंग यूनिट से 5 वर्षों में 200 इंटरसिटी ट्रेनें, देशभर में शटल सेवा का लक्ष्य
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय रेल की काजीपेट रेल मैन्युफैक्चरिंग यूनिट अब पूर्णता के अंतिम चरण में है और अगले 5 वर्षों में यहाँ 200 इंटरसिटी रेलगाड़ियों का निर्माण किया जाएगा। रेल मंत्रालय ने 28 मई को यह जानकारी देते हुए बताया कि यह एक बहुमुखी रोलिंग स्टॉक मैन्युफैक्चरिंग यूनिट है जो भारत की शहरी-उपनगरीय और अंतर-शहरी परिवहन ज़रूरतों को नई दिशा देगी।
यूनिट की समीक्षा और योजना
केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव और केंद्रीय रेल राज्य मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू ने वरिष्ठ अधिकारियों के साथ एक उच्चस्तरीय बैठक में काजीपेट यूनिट को चालू करने की योजनाओं की विस्तृत समीक्षा की। मंत्रालय के अनुसार, शुरुआती चरण में इस यूनिट का पूरा ध्यान इंटरसिटी रेलगाड़ियों के उत्पादन पर केंद्रित रहेगा।
ट्रेनों की विशेषताएँ और डिज़ाइन
मंत्रालय ने बताया कि ये इंटरसिटी रेलगाड़ियाँ आधुनिक तकनीक से लैस होंगी। प्रमुख विशेषताओं में स्वचालित दरवाज़े, बेहतर वेंटिलेशन, 20 कोचों की संरचना और प्रत्येक कोच में 2 शौचालय शामिल हैं। इसके अलावा, झटके-रहित आधुनिक कपलर और बोगियाँ भी इन ट्रेनों में लगाई जाएँगी।
इन रेलगाड़ियों को 130 किलोमीटर प्रति घंटे की अधिकतम गति के लिए डिज़ाइन किया जाएगा। साथ ही, इनमें रीजेनरेटिव ब्रेकिंग सिस्टम होगा — जिसका अर्थ है कि ब्रेक लगाने पर उत्पन्न ऊर्जा को वापस विद्युत ग्रिड में भेजा जा सकेगा, जिससे ऊर्जा दक्षता बढ़ेगी और कार्बन उत्सर्जन में उल्लेखनीय कमी आएगी।
किसे होगा फायदा और कहाँ होगी तैनाती
रेल मंत्रालय के अनुसार, ये ट्रेनें मुख्यतः लगभग 300 किलोमीटर की दूरी तय करने वाले मार्गों पर तैनात की जाएँगी। इनमें बार-बार ठहराव होंगे ताकि कस्बों और शहरों के बीच आवागमन सुगम हो। उच्च शिक्षा के लिए आने-जाने वाले विद्यार्थी, स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुँचने वाले नागरिक और दैनिक कामकाज के लिए यात्रा करने वाले लोग — सभी को इन शटल-शैली की सेवाओं का सीधा लाभ मिलेगा।
सड़क परिवहन पर असर और पर्यावरण लाभ
मंत्रालय का अनुमान है कि इन ट्रेनों के परिचालन से सड़कों पर स्थानीय यातायात का एक बड़ा हिस्सा रेलवे की ओर स्थानांतरित हो सकता है। रीजेनरेटिव ब्रेकिंग और विद्युत-चालित संचालन के कारण ये ट्रेनें सड़क परिवहन की तुलना में काफी कम कार्बन उत्सर्जन करेंगी, जो भारत की हरित परिवहन प्रतिबद्धताओं के अनुरूप है।
आगे क्या
काजीपेट यूनिट के पूरी तरह चालू होने के बाद यह भारतीय रेल के रोलिंग स्टॉक उत्पादन नेटवर्क में एक महत्वपूर्ण कड़ी बन जाएगी। 200 इंटरसिटी ट्रेनों के उत्पादन का यह लक्ष्य देश में किफायती और टिकाऊ अंतर-शहरी परिवहन की बुनियाद को और मज़बूत करने की दिशा में एक ठोस कदम माना जा रहा है।