भारतीय रेलवे का किफायती यात्रा पर जोर: नॉन-एसी कोचों की संख्या में वृद्धि और 45% सब्सिडी

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भारतीय रेलवे का किफायती यात्रा पर जोर: नॉन-एसी कोचों की संख्या में वृद्धि और 45% सब्सिडी

सारांश

भारतीय रेलवे ने नॉन-एसी जनरल और स्लीपर कोचों की संख्या बढ़ाने का निर्णय लिया है, जिससे यात्रा की लागत में कमी आएगी। प्रति यात्री 45 प्रतिशत तक की सब्सिडी दी जा रही है।

मुख्य बातें

नॉन-एसी कोचों की संख्या में वृद्धि से किफायती यात्रा की सुविधा।
प्रति यात्री 45 प्रतिशत सब्सिडी का लाभ।
सुरक्षा के लिए रोड ओवर ब्रिज और ऑटोमैटिक सिग्नलिंग में सुधार।
माल ढुलाई में बड़ा इजाफा हुआ है।
डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर का तेजी से निर्माण ।

नई दिल्ली, 18 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। भारतीय रेलवे यात्रियों को किफायती यात्रा प्रदान करने के लिए नॉन-एसी जनरल और स्लीपर कोचों की संख्या में वृद्धि कर रहा है। सरकार के अनुसार, किराए को कम करने के लिए प्रति यात्री औसतन करीब 45 प्रतिशत की सब्सिडी दी जा रही है।

रेल मंत्रालय के अनुसार, कुल कोचों में लगभग 70 प्रतिशत जनरल और स्लीपर क्लास के हैं। इसके अलावा, 2024-25 में लगभग 1,250 नए जनरल कोच जोड़े जाएंगे और 2025-26 में करीब 860 और कोच जोड़ने की योजना है।

रेलवे हर साल यात्रियों को करीब 60,000 करोड़ रुपए की सब्सिडी देता है। वहीं, मुंबई जैसे उपनगरीय क्षेत्रों के लिए लगभग 3,000 करोड़ रुपए की अतिरिक्त सब्सिडी दी जाती है।

रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि माल ढुलाई (फ्रेट) में भी बड़ा इजाफा हुआ है। यह 2013-14 के 1,055 मिलियन टन से बढ़कर अब लगभग 1,650 मिलियन टन हो गया है, जिससे भारतीय रेलवे दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा फ्रेट कैरियर बन गया है।

उन्होंने बताया कि रेलवे का विद्युतीकरण तेजी से बढ़ा है और अब लगभग 47,000 किलोमीटर ट्रैक इलेक्ट्रिफाई हो चुका है, अर्थात नेटवर्क का 99 प्रतिशत से अधिक भाग बिजली से चल रहा है।

ट्रैक निर्माण में भी तेजी आई है। पहले जहां करीब 15,000 किलोमीटर ट्रैक बनाए गए थे, वहीं अब यह बढ़कर लगभग 35,000 किलोमीटर हो गया है।

सुरक्षा के लिहाज से भी रेलवे ने बड़ा काम किया है। रोड ओवर ब्रिज (आरओबी) और रोड अंडर ब्रिज (आरयूबी) की संख्या लगभग 4,000 से बढ़कर 14,000 हो गई है। वहीं, ऑटोमैटिक सिग्नलिंग 1,500 किलोमीटर से बढ़कर 4,000 किलोमीटर से अधिक हो गई है।

रेल मंत्री ने बताया कि सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है, जिसके तहत ट्रैक और ट्रेन (रोलिंग स्टॉक) की मेंटेनेंस, नई तकनीक और कर्मचारियों की ट्रेनिंग पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

उन्होंने यह भी कहा कि एलएचबी कोच (ज्यादा सुरक्षित कोच) की संख्या तेजी से बढ़ी है और हाल के वर्षों में लगभग 48,000 कोच जोड़े गए हैं। इसके अलावा, लोकोमोटिव (इंजन) की संख्या लगभग 12,000 तक पहुंच गई है और वैगन (माल ढुलाई डिब्बे) की संख्या 2 लाख से अधिक हो गई है।

सरकार ने परियोजनाओं की निगरानी और पारदर्शिता बढ़ाने के लिए नीति आयोग और वित्त मंत्रालय के साथ मिलकर एक मजबूत सिस्टम स्थापित किया है।

रेल मंत्री ने बताया कि डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर (डीएफसी) में भी तेजी से काम किया गया है। अब तक लगभग 2,800 किलोमीटर कॉरिडोर तैयार हो चुका है, जहां प्रतिदिन लगभग 480 मालगाड़ियां चल रही हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि देश के आर्थिक विकास में भी सहायक है। सुरक्षा, विद्युतीकरण और ट्रैक निर्माण में सुधार से रेलवे को एक मजबूत नेटवर्क बनाने में मदद मिल रही है।
RashtraPress
14 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारतीय रेलवे नॉन-एसी कोच क्यों बढ़ा रहा है?
भारतीय रेलवे किफायती यात्रा को प्रोत्साहित करने के लिए नॉन-एसी कोचों की संख्या बढ़ा रहा है ताकि यात्रियों को कम किराए में यात्रा का अवसर मिले।
सरकार सब्सिडी कितनी दे रही है?
सरकार प्रति यात्री औसतन करीब 45 प्रतिशत की सब्सिडी दे रही है।
भारतीय रेलवे की सुरक्षा में क्या सुधार हुआ है?
रेलवे ने सुरक्षा के लिए रोड ओवर ब्रिज और ऑटोमैटिक सिग्नलिंग की संख्या बढ़ाई है।
माल ढुलाई में रेलवे का प्रदर्शन कैसा है?
भारतीय रेलवे ने माल ढुलाई में भी बड़ा इजाफा किया है, जो 2013-14 के 1,055 मिलियन टन से बढ़कर 1,650 मिलियन टन हो गया है।
डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर का क्या महत्व है?
डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर का निर्माण मालगाड़ियों की गति और संख्या को बढ़ाने में मदद करता है, जिससे व्यापार में सुधार होता है।
राष्ट्र प्रेस
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