8 जुलाई 2026
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मारवाड़-जैसलमेर रेल इंफ्रास्ट्रक्चर में बड़ा बदलाव: वंदे भारत के कोच 8 से बढ़कर 20, शेखावत बोले — 'जीवन रेखा' बनी रेलवे

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मारवाड़-जैसलमेर रेल इंफ्रास्ट्रक्चर में बड़ा बदलाव: वंदे भारत के कोच 8 से बढ़कर 20, शेखावत बोले — 'जीवन रेखा' बनी रेलवे

सारांश

जोधपुर में वंदे भारत के कोच 8 से बढ़कर 20 हुए, भगत की कोठी मेगा टर्मिनस बनेगा और 'कवच' से 2 करोड़ यात्रियों को सुरक्षा — केंद्रीय मंत्री शेखावत ने मारवाड़-जैसलमेर रेल इंफ्रास्ट्रक्चर में बड़े बदलाव की तस्वीर पेश की।

मुख्य बातें

जोधपुर-दिल्ली कैंट वंदे भारत एक्सप्रेस के कोच 8 से बढ़ाकर 20 किए गए, यात्री माँग के चलते।
भगत की कोठी रेलवे स्टेशन को मेगा टर्मिनस के रूप में पुनर्विकसित किया जा रहा है — बेंगलुरु, हैदराबाद, चेन्नई, पुणे से सीधी कनेक्टिविटी का लक्ष्य।
स्वदेशी 'कवच' सुरक्षा प्रणाली देशभर में 2 करोड़ से अधिक दैनिक यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करती है।
केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने 22 मई को जोधपुर में उद्घाटन कार्यक्रम को संबोधित किया।
जोधपुर अब देश के चुनिंदा रेलवे हब्स में शामिल, अगली पीढ़ी की ट्रेनों के रखरखाव की सुविधाएँ विकसित।

केंद्रीय संस्कृति और पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने 22 मई को जोधपुर में आयोजित जोधपुर-दिल्ली कैंट वंदे भारत एक्सप्रेस के विस्तार और अन्य रेलवे सेवाओं के उद्घाटन कार्यक्रम में कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारतीय रेलवे अब केवल परिवहन का साधन नहीं, बल्कि देश की 'जीवन रेखा' बन चुकी है। उन्होंने कहा कि पिछले 12 वर्षों में मारवाड़ और पश्चिमी राजस्थान को करोड़ों रुपए की रेलवे परियोजनाओं की सौगात मिली है।

वंदे भारत का विस्तार: 8 से 20 कोच

शेखावत ने बताया कि जोधपुर से चलने वाली वंदे भारत ट्रेन को यात्रियों का अभूतपूर्व समर्थन मिला है। इसी के मद्देनज़र प्रधानमंत्री के निर्देश पर ट्रेन के कोचों की संख्या 8 से बढ़ाकर 20 कर दी गई है। उन्होंने कहा कि अब जोधपुर में भी अमेरिका, जापान, फ्रांस और स्विट्जरलैंड जैसी आधुनिक रेल प्रणालियों के स्तर की ट्रेनें वंदे भारत एक्सप्रेस के रूप में दौड़ रही हैं — यह रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव और प्रधानमंत्री मोदी के संयुक्त प्रयासों का नतीजा है।

स्वदेशी 'कवच' प्रणाली: 2 करोड़ यात्रियों की सुरक्षा

केंद्रीय मंत्री ने 'मेक इन इंडिया' और 'सुरक्षित भारत' अभियान का उल्लेख करते हुए स्वदेशी रेलवे सुरक्षा प्रणाली 'कवच' को सरकार की मजबूत राजनीतिक इच्छाशक्ति का प्रतीक बताया। उनके अनुसार यह तकनीक मानवीय गलती या तकनीकी खराबी की स्थिति में भी दो ट्रेनों की टक्कर रोकने में सक्षम है और देशभर में रोज़ाना यात्रा करने वाले 2 करोड़ से अधिक यात्रियों को सुरक्षा कवच प्रदान करती है।

भगत की कोठी: मेगा टर्मिनस के रूप में पुनर्विकास

शेखावत ने बताया कि भगत की कोठी रेलवे स्टेशन को स्टेशन पुनर्विकास योजना के तहत आधुनिक मेगा टर्मिनस के रूप में विकसित किया जा रहा है। इस विकास के बाद जोधपुर की सीधी रेल कनेक्टिविटी बेंगलुरु, हैदराबाद, चेन्नई और पुणे जैसे दक्षिण भारतीय शहरों से स्थापित हो सकेगी। यह मारवाड़ क्षेत्र के प्रवासी लोगों के लिए विशेष रूप से राहत की बात होगी।

जोधपुर बना राष्ट्रीय रेलवे हब

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि जोधपुर अब देश के चुनिंदा रेलवे हब्स में शामिल हो गया है, जहाँ अगली पीढ़ी की ट्रेनों के रखरखाव की सुविधाएँ विकसित की गई हैं। गौरतलब है कि पहले भारतीय रेलवे में देरी और अव्यवस्था को सामान्य माना जाता था, लेकिन पिछले एक दशक से अधिक समय में इस धारणा में व्यापक बदलाव आया है। यह ऐसे समय में आया है जब पश्चिमी राजस्थान के पर्यटन और व्यापार को बेहतर कनेक्टिविटी की दरकार थी।

आगे की राह

भगत की कोठी मेगा टर्मिनस का पुनर्विकास पूरा होने के बाद मारवाड़ क्षेत्र की दक्षिण भारत से सीधी रेल कनेक्टिविटी क्षेत्रीय आर्थिक और पर्यटन संभावनाओं को नई दिशा दे सकती है। रेलवे के आधुनिकीकरण की यह प्रक्रिया आने वाले वर्षों में और गति पकड़ने की उम्मीद है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली कसौटी क्रियान्वयन की समयसीमा होगी — स्टेशन पुनर्विकास परियोजनाएँ देशभर में अक्सर घोषणा से काफी पीछे रही हैं। 'कवच' प्रणाली की क्षमता को लेकर सरकार के दावे उत्साहजनक हैं, पर रेलवे सुरक्षा विशेषज्ञ लंबे समय से इसके राष्ट्रव्यापी रोलआउट की धीमी गति पर सवाल उठाते रहे हैं। मारवाड़ क्षेत्र की दक्षिण भारत से सीधी कनेक्टिविटी का वादा प्रवासी समुदाय के लिए महत्वपूर्ण है, लेकिन यह तभी साकार होगा जब भगत की कोठी परियोजना निर्धारित समय पर पूरी हो।
RashtraPress
8 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जोधपुर वंदे भारत एक्सप्रेस में कोचों की संख्या कितनी बढ़ाई गई?
जोधपुर से चलने वाली वंदे भारत एक्सप्रेस के कोचों की संख्या 8 से बढ़ाकर 20 कर दी गई है। यह निर्णय यात्रियों की बढ़ती माँग को देखते हुए प्रधानमंत्री के निर्देश पर लिया गया।
भगत की कोठी रेलवे स्टेशन का पुनर्विकास क्यों हो रहा है?
भगत की कोठी रेलवे स्टेशन को स्टेशन पुनर्विकास योजना के तहत आधुनिक मेगा टर्मिनस के रूप में विकसित किया जा रहा है। इससे जोधपुर की सीधी रेल कनेक्टिविटी बेंगलुरु, हैदराबाद, चेन्नई और पुणे जैसे दक्षिण भारतीय शहरों से स्थापित हो सकेगी, जिससे मारवाड़ क्षेत्र के प्रवासियों को विशेष लाभ मिलेगा।
रेलवे 'कवच' प्रणाली क्या है और यह कितने यात्रियों की सुरक्षा करती है?
'कवच' एक स्वदेशी रेलवे सुरक्षा प्रणाली है जो मानवीय गलती या तकनीकी खराबी की स्थिति में दो ट्रेनों की टक्कर रोकने में सक्षम है। केंद्रीय मंत्री शेखावत के अनुसार यह प्रणाली देशभर में रोज़ाना यात्रा करने वाले 2 करोड़ से अधिक यात्रियों को सुरक्षा प्रदान करती है।
मारवाड़-जैसलमेर रेल इंफ्रास्ट्रक्चर में क्या-क्या बदलाव हुए हैं?
पिछले 12 वर्षों में मारवाड़ और पश्चिमी राजस्थान को करोड़ों रुपए की रेलवे परियोजनाएँ मिली हैं। इनमें वंदे भारत एक्सप्रेस का विस्तार, भगत की कोठी मेगा टर्मिनस का पुनर्विकास, और जोधपुर को राष्ट्रीय रेलवे हब के रूप में विकसित करना शामिल है।
जोधपुर को राष्ट्रीय रेलवे हब क्यों माना जा रहा है?
जोधपुर अब देश के चुनिंदा रेलवे हब्स में शामिल हो गया है, जहाँ अगली पीढ़ी की ट्रेनों के रखरखाव की सुविधाएँ विकसित की गई हैं। वंदे भारत एक्सप्रेस के विस्तार और भगत की कोठी मेगा टर्मिनस परियोजना इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं।
राष्ट्र प्रेस
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