रफीकुल इस्लाम का भागवत पर पलटवार: 'भारत सभी धर्मों का, कभी हिंदू राष्ट्र नहीं रहा'

Click to start listening
रफीकुल इस्लाम का भागवत पर पलटवार: 'भारत सभी धर्मों का, कभी हिंदू राष्ट्र नहीं रहा'

सारांश

AIUDF विधायक रफीकुल इस्लाम ने RSS प्रमुख मोहन भागवत के हिंदू राष्ट्र वाले बयान को सीधे चुनौती दी है। उनका तर्क है कि मुगल और ब्रिटिश शासन के बावजूद भारत कभी एकधर्मीय राष्ट्र नहीं बना — और संविधान इसकी धर्मनिरपेक्ष पहचान की गारंटी देता है।

Key Takeaways

  • AIUDF विधायक रफीकुल इस्लाम ने 29 अप्रैल 2025 को RSS प्रमुख मोहन भागवत के हिंदू राष्ट्र वाले बयान की आलोचना की।
  • इस्लाम ने कहा कि भारत की धर्मनिरपेक्षता संविधान में स्पष्ट रूप से दर्ज है।
  • उन्होंने तर्क दिया कि मुगल (सदियों) और अंग्रेज (लगभग 200 वर्ष) शासन के बावजूद भारत कभी एकधर्मीय राष्ट्र नहीं बना।
  • भागवत ने हाल के एक कार्यक्रम में कहा था कि भारत पहले से ही हिंदू राष्ट्र है, घोषणा की जरूरत नहीं।
  • इस्लाम ने भागवत से अपील की कि वे वरिष्ठ नेता की जिम्मेदारी निभाते हुए जनता को गुमराह न करें।

असम से ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (AIUDF) के विधायक रफीकुल इस्लाम ने मंगलवार, 29 अप्रैल 2025 को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत के उस बयान की कड़ी आलोचना की, जिसमें उन्होंने भारत को पहले से ही एक हिंदू राष्ट्र बताया था। विधायक ने जोर देकर कहा कि भारत का धर्मनिरपेक्ष स्वरूप संविधान में स्पष्ट रूप से दर्ज है और यह देश सभी धर्मों के अनुयायियों का समान रूप से है।

रफीकुल इस्लाम का बयान

समाचार एजेंसी राष्ट्र प्रेस से बातचीत में AIUDF विधायक रफीकुल इस्लाम ने स्पष्ट शब्दों में कहा, "भारत कभी भी हिंदू राष्ट्र नहीं रहा। यह हमेशा से एक धर्मनिरपेक्ष देश रहा है। भारत सिर्फ हिंदुओं, मुसलमानों या ईसाइयों का ही नहीं है, बल्कि यह सभी धर्मों के लोगों का है। देश की धर्मनिरपेक्षता का उल्लेख संविधान में भी किया गया है।"

उन्होंने मोहन भागवत के बयान को गुमराह करने वाला बताते हुए कहा कि भारत की पहचान विभिन्न ऐतिहासिक कालखंडों में समावेशी बनी रही है।

ऐतिहासिक संदर्भ: मुगल से ब्रिटिश शासन तक

विधायक ने ऐतिहासिक तर्क देते हुए कहा, "जब मुगलों ने सदियों तक भारत पर शासन किया, तब भी यह मुस्लिम राष्ट्र नहीं बना। जब अंग्रेजों ने लगभग 200 वर्षों तक शासन किया, तब भी यह ईसाई राष्ट्र नहीं बना। यहां तक कि पिछले 12 वर्षों में जब नरेंद्र मोदी देश के प्रधानमंत्री रहे हैं, तब भी भारत को हिंदू राष्ट्र बनाने का कोई प्रयास नहीं किया गया।"

गौरतलब है कि यह बयान ऐसे समय में आया है जब हिंदू राष्ट्र की अवधारणा पर राष्ट्रीय स्तर पर बहस तेज हो गई है और विभिन्न राजनीतिक दलों ने इस पर अपनी-अपनी प्रतिक्रियाएं दी हैं।

भागवत का मूल बयान

हाल ही में एक कार्यक्रम में RSS प्रमुख मोहन भागवत ने कहा था कि भारत को हिंदू राष्ट्र घोषित करने की कोई आवश्यकता नहीं है, क्योंकि यह पहले से ही एक हिंदू राष्ट्र है। उन्होंने यह भी कहा कि RSS से अक्सर भारत को हिंदू राष्ट्र घोषित करने के लिए कहा जाता है, लेकिन जो पहले से मौजूद है उसे घोषित करने की कोई जरूरत नहीं है।

भारत का भविष्य: सभी धर्मों का समावेश

रफीकुल इस्लाम ने कहा, "भारत हिंदुओं, मुसलमानों, ईसाइयों, बौद्धों, सिखों और सभी का है। मुझे उम्मीद है कि मोहन भागवत, एक वरिष्ठ व्यक्ति होने के नाते, भारत की जनता को गुमराह नहीं करेंगे।" विधायक ने यह भी कहा कि भारत भविष्य में भी सभी धर्मों के अनुयायियों का देश बना रहेगा और संविधान की धर्मनिरपेक्ष भावना अक्षुण्ण रहेगी।

Point of View

लेकिन संवैधानिक आधार पर ठोस है — भारत का संविधान वास्तव में 'धर्मनिरपेक्ष' शब्द को 42वें संशोधन (1976) से प्रस्तावना में शामिल करता है। हालांकि, यह बहस केवल शब्दार्थ की नहीं है — RSS का तर्क सांस्कृतिक राष्ट्रवाद पर आधारित है, जबकि विपक्ष संवैधानिक ढांचे की दुहाई देता है। असली सवाल यह है कि क्या 'हिंदू राष्ट्र' की अवधारणा कानूनी है या सांस्कृतिक — और इस फर्क को मुख्यधारा की बहस अक्सर नजरअंदाज करती है। इस्लाम का ऐतिहासिक तर्क — कि न मुगल, न अंग्रेज, न मोदी सरकार ने भारत को एकधर्मीय बनाया — तथ्यात्मक रूप से सटीक है, लेकिन यह भागवत की सांस्कृतिक परिभाषा का सीधा खंडन नहीं करता।
NationPress
29/04/2026

Frequently Asked Questions

मोहन भागवत ने हिंदू राष्ट्र पर क्या कहा था?
RSS प्रमुख मोहन भागवत ने हाल के एक कार्यक्रम में कहा था कि भारत को हिंदू राष्ट्र घोषित करने की जरूरत नहीं है क्योंकि यह पहले से ही एक हिंदू राष्ट्र है। उन्होंने कहा कि जो पहले से मौजूद है, उसे घोषित करने की आवश्यकता नहीं होती।
रफीकुल इस्लाम ने भागवत के बयान का विरोध क्यों किया?
AIUDF विधायक रफीकुल इस्लाम ने कहा कि भारत का संविधान देश को धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र घोषित करता है और यह सभी धर्मों के लोगों का देश है। उन्होंने भागवत के बयान को गुमराह करने वाला बताया और कहा कि ऐतिहासिक रूप से भी भारत कभी एकधर्मीय राष्ट्र नहीं रहा।
AIUDF क्या है और रफीकुल इस्लाम कौन हैं?
ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (AIUDF) असम का एक राजनीतिक दल है। रफीकुल इस्लाम इस दल के विधायक हैं जो असम विधानसभा में पार्टी का प्रतिनिधित्व करते हैं।
भारत के संविधान में धर्मनिरपेक्षता का उल्लेख कहां है?
भारत के संविधान की प्रस्तावना में 'धर्मनिरपेक्ष' शब्द 42वें संशोधन (1976) के माध्यम से जोड़ा गया था। यह भारत को एक ऐसे राष्ट्र के रूप में परिभाषित करता है जो किसी एक धर्म को राजकीय धर्म नहीं मानता।
क्या भारत में हिंदू राष्ट्र की मांग नई है?
नहीं, हिंदू राष्ट्र की अवधारणा पर बहस दशकों पुरानी है। RSS और हिंदुत्व समर्थक संगठन सांस्कृतिक आधार पर इसे परिभाषित करते हैं, जबकि विपक्षी दल और अल्पसंख्यक समूह संवैधानिक धर्मनिरपेक्षता की दुहाई देते हैं।
Nation Press