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क्या इंदौर दूषित पानी मामले में सरकार ने सही कदम उठाए?

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क्या इंदौर दूषित पानी मामले में सरकार ने सही कदम उठाए?

सारांश

इंदौर में दूषित पानी की त्रासदी ने सरकार को सख्त कदम उठाने पर मजबूर किया। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने दो सीनियर अधिकारियों को निलंबित किया और नगर आयुक्त का स्थानांतरण किया। जानें इस मामले में क्या कुछ हुआ।

मुख्य बातें

मुख्यमंत्री मोहन यादव ने सख्त कार्रवाई की है।
भागीरथपुरा में दूषित पानी के कारण जनहानि हुई।
सरकार की प्रशासनिक लापरवाही पर सवाल उठे हैं।

भोपाल, 2 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने गुरुवार को भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पानी की घटना के संबंध में इंदौर नगर निगम के दो सीनियर अधिकारियों को तुरंत निलंबित करने और नगर आयुक्त का स्थानांतरण करने का आदेश दिया, जिसमें कई लोगों की जान गई।

एडिशनल कमिश्नर रोहित सिसोनिया और सार्वजनिक स्वास्थ्य विभाग के इंचार्ज सुपरिटेंडेंट इंजीनियर संजीव श्रीवास्तव को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। अधिकारियों ने बताया कि इंदौर नगर निगम के कमिश्नर दिलीप कुमार यादव का स्थानांतरण किया गया है।

सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा, "राज्य सरकार इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पीने के पानी के कारण हुई घटना में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं करेगी। इस मामले में कड़ी कार्रवाई की जा रही है।"

यह बड़ा निर्णय गुरुवार को भोपाल में सीएम यादव की अध्यक्षता में हुई एक उच्च स्तरीय बैठक के बाद लिया गया, जिसमें संबंधित नगर निगम अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए।

भागीरथपुरा में हुई इस त्रासदी, जहां लोगों ने दूषित पानी पिया, जिसके कारण कई मौतें और बीमारियां हुईं। इसके बाद लोगों में आक्रोश फैल गया और सरकार की आलोचना होने लगी। भाजपा के नेताओं ने भी इस घटना को शर्मनाक करार दिया।

वरिष्ठ भाजपा नेता और मध्य प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती ने इस घटना पर गहरा दुख व्यक्त किया, इसे पूरे राज्य प्रशासन के लिए "शर्म" और "अपमान" बताया।

एक्स पर किए गए अपने पोस्ट में उमा भारती ने कहा, "इंदौर को देश के सबसे स्वच्छ शहर होने के लिए पुरस्कार मिले हैं, लेकिन ऐसी बदसूरती, गंदगी और जहरीला पानी जिसने इतनी जानें ले लीं, और मरने वालों की संख्या हर दिन बढ़ रही है।"

उमा भारती ने बिना किसी का नाम लिए इस संकट से निपटने के तरीकों की आलोचना करते हुए कहा, "कौन कह रहा है कि इंदौर में हमारी योजना काम नहीं आई? जब आप कुछ नहीं कर पा रहे हैं, तो आप बिसलेरी की बोतलें क्यों पी रहे हैं? इस पाप का कोई स्पष्टीकरण नहीं है।"

भागीरथपुरा में दूषित पानी की सप्लाई के कारण हुई मौतों की सही संख्या को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। राज्य प्रशासन और इंदौर के मेयर पुष्यमित्र भार्गव अलग-अलग आंकड़े बता रहे हैं, जिससे घटना को लेकर विवाद बढ़ गया है।

संपादकीय दृष्टिकोण

और इस तरह की लापरवाहियों को बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। राज्य सरकार को इस मामले में जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए।
RashtraPress
25 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

इंदौर में दूषित पानी से कितने लोगों की जान गई?
अभी तक इस घटना में हुई मौतों की सही संख्या स्पष्ट नहीं है, लेकिन कई लोगों की जान गई है।
मुख्यमंत्री ने किसे निलंबित किया?
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने इंदौर नगर निगम के दो सीनियर अधिकारियों को निलंबित किया है।
इस घटना के बाद सरकार ने क्या कदम उठाए?
सरकार ने तत्काल कार्रवाई करते हुए अधिकारियों को निलंबित किया और नगर आयुक्त का स्थानांतरण किया।
राष्ट्र प्रेस
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