अमेरिका-ईरान वार्ता नाकाम, ईरानी प्रतिनिधिमंडल पाकिस्तान से लौट गया

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अमेरिका-ईरान वार्ता नाकाम, ईरानी प्रतिनिधिमंडल पाकिस्तान से लौट गया

सारांश

अमेरिका और ईरान के बीच हुई विस्तृत बातचीत के बावजूद कोई समाधान नहीं निकला, जिसके बाद ईरानी प्रतिनिधिमंडल पाकिस्तान से रवाना हो गया। जानिए इस वार्ता का क्या हुआ और आगे क्या हो सकता है।

Key Takeaways

  • अमेरिका-ईरान वार्ता का कोई ठोस परिणाम नहीं निकला।
  • ईरानी प्रतिनिधिमंडल ने पाकिस्तान से लौटने का निर्णय लिया।
  • ईरान ने अमेरिकी मांगों को ठुकरा दिया।
  • ईरानी दूतावास ने समय का दबाव बनाने का आरोप लगाया।
  • ईरान का रुख अपने अधिकारों की रक्षा के प्रति दृढ़ है।

इस्लामाबाद, 12 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। अमेरिका और ईरान के बीच हुई घंटों की बातचीत के बावजूद कोई ठोस परिणाम नहीं निकला। वार्ता के निष्कर्ष के बाद, ईरानी प्रतिनिधिमंडल पाकिस्तान से रवाना हो गया है। इससे पहले, अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस भी इस्लामाबाद से अपने देश लौटने के लिए निकल चुके थे।

ईरानी प्रतिनिधिमंडल में कुल 71 सदस्य शामिल थे। मेहर न्यूज एजेंसी के अनुसार, इस डेलिगेशन में पार्लियामेंट स्पीकर मोहम्मद बाघेर ग़ालिबफ़ और विदेश मंत्री अब्बास अराघची शामिल थे। वार्ता खत्म होने के बाद ये सभी पाकिस्तान से निकल गए हैं।

ईरानी दूतावास ने अमेरिका-ईरान वार्ता पर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कहा, "यूएस अपने उपराष्ट्रपति को आधी दुनिया पार करके इस्लामाबाद ले गया। 21 घंटे की बातचीत हुई। अमेरिका ने ऐसी मांगें कीं जो वे युद्ध से नहीं हासिल कर सकते थे। ईरान ने पूरी तरह से ना कहा। वार्ता खत्म हो गई है। स्ट्रेट अब भी बंद है और उपराष्ट्रपति खाली हाथ लौट रहे हैं।"

एक यूजर के सवाल का जवाब देते हुए ईरानी दूतावास ने कहा, "वे स्टॉपवॉच लेकर आए थे, जबकि हम कैलेंडर लेकर बैठे थे। नतीजे पर कभी शक नहीं हुआ।"

ईरानी दूतावास का कहना है कि अमेरिका ने बातचीत के दौरान समय का दबाव बनाया। अमेरिका को जल्द निर्णय चाहिए था, जबकि ईरान लंबी रणनीति के साथ बैठा था। ईरान धैर्यपूर्वक बातचीत के पक्ष में था।

ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बाकई ने कहा कि ईरान अमेरिका के पिछले वादे तोड़ने को "न भूला है और न भूलेगा।" इससे इस्लामाबाद में बातचीत के दौरान गहरे अविश्वास का संकेत मिलता है। उन्होंने कहा कि किसी ने भी वार्ता के एक राउंड में नतीजे की उम्मीद नहीं की थी।

इस्माइल बाकई ने एक विस्तृत पोस्ट में कहा, "कूटनीति हमारे लिए ईरानी सरजमीं के रक्षकों के संघर्ष को जारी रखना है। हम अमेरिका द्वारा वादों को तोड़ने और उसके पिछले कड़वे अनुभवों को कभी नहीं भूलेंगे।" हालांकि, ईरान वार्ता की शुरुआत से पहले भी अमेरिका के साथ विश्वास की कमी को दोहराता रहा है।

उन्होंने बातचीत को तेज और लंबा बताते हुए कहा, "आज इस्लामाबाद में ईरान के डेलिगेशन के लिए एक व्यस्त दिन था। पाकिस्तान की कोशिशों से शुरू हुई बातचीत अब तक बिना किसी रुकावट के जारी है और दोनों पक्षों के बीच कई संदेश और टेक्स्ट का आदान-प्रदान हुआ।"

ईरानी डेलिगेशन की प्रण पर जोर देते हुए, बाकई ने कहा, "ईरान की ओर से बातचीत में हमारे अधिकारों और हितों की रक्षा के लिए पूरी काबिलियत का इस्तेमाल किया जा रहा है। हमारे प्रियजनों और साथी देशवासियों के नुकसान ने हमारे इरादों को और मजबूत किया है।"

Point of View

क्योंकि दोनों देशों के बीच का अविश्वास और टकराव नई ऊंचाइयों पर पहुँच गया है। ईरान का यह सख्त रुख स्पष्ट करता है कि वह अपने अधिकारों के प्रति गंभीर है।
NationPress
13/04/2026

Frequently Asked Questions

ईरानी प्रतिनिधिमंडल में कितने सदस्य थे?
ईरानी प्रतिनिधिमंडल में कुल 71 सदस्य शामिल थे।
अमेरिका और ईरान के बीच वार्ता का मुख्य मुद्दा क्या था?
मुख्य मुद्दा अमेरिकी मांगें थीं, जिन्हें ईरान ने ठुकरा दिया।
ईरानी दूतावास ने वार्ता को लेकर क्या कहा?
ईरानी दूतावास ने कहा कि अमेरिका ने वार्ता के दौरान समय का दबाव बनाया।
इस वार्ता का क्या परिणाम निकला?
वार्ता का कोई ठोस परिणाम नहीं निकला और ईरानी प्रतिनिधिमंडल ने पाकिस्तान से लौटने का निर्णय लिया।
क्या ईरान अमेरिका के साथ बातचीत जारी रखेगा?
ईरान ने विश्वास की कमी के कारण अमेरिका के साथ बातचीत को लेकर संदेह व्यक्त किया है।
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