जगन का आरोप: चंद्रबाबू ने आंध्र प्रदेश को 'जंगल राज' में बदला, सांसद मिथुन रेड्डी के काफिले पर हमला
सारांश
मुख्य बातें
पूर्व मुख्यमंत्री और वाईएसआर कांग्रेस पार्टी (वाईएसआरसीपी) के अध्यक्ष वाईएस जगन मोहन रेड्डी ने 16 अक्टूबर 2026 को ताडेपल्ली से मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू पर कड़ा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि उन्होंने आंध्र प्रदेश को 'जंगल राज' में बदल दिया है। यह बयान उस दिन आया जब पुंगनूर में वाईएसआरसीपी के लोकसभा फ्लोर लीडर और राजमपेट के सांसद पीवी मिथुन रेड्डी के काफिले पर कथित तौर पर तेलुगु देशम पार्टी (टीडीपी) के कार्यकर्ताओं ने हमला किया। स्थानीय निकाय चुनावों के नामांकन के पहले दिन ही अन्नामय्या जिले में हिंसा भड़क उठी।
हमले का विवरण
पुंगनूर कस्बे में 16 अक्टूबर को नामांकन प्रक्रिया के दौरान सांसद मिथुन रेड्डी के काफिले पर पत्थरों, लाठियों और लोहे की छड़ों से हमला किया गया। भीड़ ने काफिले में शामिल वाहनों को क्षतिग्रस्त कर उन्हें पलट दिया। सांसद नामांकन केंद्र में प्रवेश कर गए, जहाँ पुलिस ने उन्हें एक कमरे में सुरक्षित पहुँचाया। हमलावरों द्वारा उस कमरे में भी घुसने की कोशिश के कारण पुलिस को स्थिति नियंत्रित करने में कड़ी मशक्कत करनी पड़ी। सांसद की कमीज पर खून के दाग देखे गए और उनके सुरक्षा गार्ड भी घायल हो गए।
इसी दिन रायचोटी कस्बे में वाईएसआरसीपी कार्यालय के पास खड़े कई वाहनों में आग लगा दी गई, जिससे क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया। वाईएसआरसीपी ने इन दोनों घटनाओं की जिम्मेदारी टीडीपी पर थोपी है।
जगन मोहन रेड्डी की प्रतिक्रिया
जगन मोहन रेड्डी ने कहा, 'हिंसक राजनीति चंद्रबाबू के लिए कोई नई बात नहीं है। उन्होंने आंध्र प्रदेश को जंगल राज में बदल दिया है। हम ऐसी स्थिति देख रहे हैं जहाँ लोकसभा में हमारे पार्टी नेता को भी सुरक्षा नहीं मिल रही है।' उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू स्थानीय निकाय चुनाव शांतिपूर्ण और निष्पक्ष तरीके से कराने के इच्छुक नहीं हैं।
जगन ने कहा कि गठबंधन सरकार के ढाई साल के शासन के बाद जनता में तीव्र असंतोष है और इसी कारण सरकार हिंसा, हमलों और धमकियों का सहारा ले रही है। उन्होंने चंद्रबाबू पर पुलिस तंत्र का दुरुपयोग कर चुनावी अनियमितताएँ कराने का आरोप भी लगाया।
वाईएसआरसीपी की कानूनी रणनीति
जगन मोहन रेड्डी ने स्पष्ट किया कि वाईएसआरसीपी उपलब्ध सभी कानूनी और संवैधानिक माध्यमों से इन 'अन्यायों' का सामना करेगी। उन्होंने माँग की कि निष्पक्ष एवं स्वतंत्र चुनाव सुनिश्चित करने के लिए केंद्रीय अर्धसैनिक बलों की तैनाती की जाए और पार्टी इस माँग को न्यायपालिका के समक्ष भी रखेगी।
इसी क्रम में वाईएसआरसीपी के तिरुपति सांसद मद्दिला गुरुमूर्ति ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, भारत के मुख्य न्यायाधीश, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला, भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त, आंध्र प्रदेश के राज्यपाल, राज्य चुनाव आयुक्त और राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष को अलग-अलग अभ्यावेदन भेजे।
राजनीतिक पृष्ठभूमि
गौरतलब है कि यह हिंसा आंध्र प्रदेश में स्थानीय निकाय चुनावों के नामांकन के पहले दिन हुई, जो राज्य में पहले से चल रहे राजनीतिक तनाव का संकेत है। टीडीपी के नेतृत्व वाली गठबंधन सरकार और वाईएसआरसीपी के बीच सत्ता परिवर्तन के बाद से राज्य में राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता तीखी हो गई है। यह ऐसे समय में आया है जब दोनों दल स्थानीय निकाय चुनावों में वर्चस्व स्थापित करने के लिए जोर-आजमाइश में लगे हैं।
क्या होगा आगे
वाईएसआरसीपी के सांसदों और नेताओं द्वारा शीर्ष संवैधानिक पदों पर अभ्यावेदन भेजे जाने के बाद इस मामले में केंद्रीय हस्तक्षेप की संभावना बढ़ गई है। पार्टी के अनुसार वह इस मुद्दे को अदालतों तक ले जाएगी। आने वाले दिनों में नामांकन प्रक्रिया के दौरान और अधिक सुरक्षा बलों की तैनाती या न्यायालय के हस्तक्षेप की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।