नवरात्रि द्वितीया: कालकाजी पीठाधीश्वर ने बताई मां ब्रह्मचारिणी की महिमा, झंडेवालान में उमड़े श्रद्धालु
सारांश
मुख्य बातें
नई दिल्ली के कालका जी मंदिर के पीठाधीश्वर महंत सुरेंद्रनाथ अवधूत ने नवरात्रि के दूसरे दिन, 12 अक्टूबर 2026 को, मां ब्रह्मचारिणी की महिमा का विस्तार से वर्णन किया। उन्होंने बताया कि देवी ने भगवान शिव को पति के रूप में पाने के लिए कठोर तपस्या और ब्रह्मचर्य का पालन किया था, जिसके कारण उन्हें 'ब्रह्मचारिणी' नाम प्राप्त हुआ। इसी पावन अवसर पर झंडेवालान मंदिर में भी बड़ी संख्या में भक्त माता के दर्शन के लिए पहुँचे।
मां ब्रह्मचारिणी का स्वरूप और महत्व
महंत सुरेंद्रनाथ अवधूत ने कहा, 'नवरात्रि के दूसरे दिन ब्रह्मचारिणी भगवती की उपासना की जाती है। भगवान शिव को वर रूप में प्राप्त करने के लिए भगवती ने कठोर व्रत और ब्रह्मचर्य का पालन किया था। इसलिए भगवती का नाम ब्रह्मचारिणी पड़ा। मां ब्रह्मचारिणी की आराधना करने से साधक के जीवन में आने वाली समस्त कठिनाइयाँ दूर हो जाती हैं और देवी का विशेष आशीर्वाद मिलता है।'
उन्होंने आगे जोड़ा कि मां ब्रह्मचारिणी के बीज मंत्र का अनुष्ठान करने से भक्तों के मार्ग में आने वाली सभी बाधाएँ समाप्त हो जाती हैं। महंत के अनुसार, मां ब्रह्मचारिणी हजारों वर्षों तक भगवान शिव की साधना में लीन रहीं और अंततः उन्हें वर के रूप में प्राप्त किया।
झंडेवालान मंदिर में पूजा विधि और दर्शन का समय
झंडेवालान मंदिर के पुजारी पंडित केशव जोशी ने नवरात्रि के दूसरे दिन व्रत रखने वाले भक्तों को पूजा की विधि और नियम समझाए। उन्होंने कहा, 'आज ब्रह्मचारिणी का द्वितीय दिवस है। मां भगवती ने भगवान शिव को पाने के लिए कठोर तप किया था, इसलिए इनका नाम ब्रह्मचारिणी है। जो लोग ब्रह्मचारिणी की पूजन-ध्यान करते हैं, उनकी मनोकामना को भगवती उसी तरह से पूर्ण करेंगी।'
पंडित केशव जोशी ने बताया कि झंडेवालान मंदिर में दर्शन का समय तड़के 4 बजे से रात 12:30 बजे तक निरंतर रहता है, जिससे श्रद्धालु दिनभर माता के दर्शन कर सकते हैं।
श्रद्धालुओं की भावनाएँ
झंडेवालान मंदिर में दर्शन के लिए पहुँची एक महिला श्रद्धालु ने बताया कि तूफान और बवंडर के बावजूद वे मंदिर पहुँचीं, क्योंकि उनका मानना था कि मातारानी ने उन्हें बुलाया था। उन्होंने कहा, 'एक समय ऐसा तूफान और बवंडर आया कि हम सोच रहे थे कि हम मंदिर तक कैसे पहुँचेंगे, लेकिन मातारानी ने हमें बुलाया था, इसलिए हम सब कुछ होने के बावजूद आए।'
एक अन्य श्रद्धालु ने कहा, 'नवरात्रि में मां के दर्शन करने का इंतजार रहता है। मां का रूप देखते ही रहने का मन करता है।' तीसरे श्रद्धालु ने कहा, 'मां सबके कष्ट और संकट को दूर करती हैं। लाखों की संख्या में भक्त मां के दर्शन करने आते हैं।'
नवरात्रि और मां ब्रह्मचारिणी की पूजा का महत्व
नवरात्रि के नौ दिनों में माँ दुर्गा के नौ स्वरूपों की आराधना की जाती है। द्वितीया तिथि को मां ब्रह्मचारिणी की पूजा का विशेष विधान है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इनकी उपासना से सिद्धि, तप और संयम की प्राप्ति होती है। यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में नवरात्रि पर्व की धूम मची है और मंदिरों में विशेष आयोजन किए जा रहे हैं।
इस वर्ष दिल्ली के प्रमुख मंदिरों में नवरात्रि उत्सव को लेकर भव्य तैयारियाँ की गई हैं और श्रद्धालुओं की भारी भीड़ दर्शन के लिए उमड़ रही है।