12 अक्टूबर 2026 पंचांग: नवरात्रि द्वितीया पर मां ब्रह्मचारिणी पूजा, अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:50 से 12:36 बजे
सारांश
मुख्य बातें
आश्विन माह के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि के साथ 12 अक्टूबर 2026 (सोमवार) को शारदीय नवरात्रि का दूसरा दिन है, जिसमें दुर्गाजी के द्वितीय स्वरूप मां ब्रह्मचारिणी की पूजा-अर्चना विशेष रूप से फलदायी मानी गई है। पंचांग के अनुसार, इस दिन अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:50 से दोपहर 12:36 बजे तक रहेगा, जो दिन का सर्वाधिक शुभ समय माना जाता है। सोमवार होने के कारण यह दिन भगवान शिव की आराधना और चंद्र दर्शन के लिए भी उत्तम है।
तिथि, सूर्योदय और चंद्रोदय
द्वितीया तिथि रात 10:13 बजे तक रहेगी, उसके पश्चात तृतीया तिथि का आरंभ होगा। सूर्योदय सुबह 6:26 बजे और सूर्यास्त शाम 6:00 बजे होगा। वहीं चंद्रोदय सुबह 7:43 बजे एवं चंद्रास्त शाम 6:56 बजे रहेगा।
नक्षत्र, राशि और ग्रह स्थिति
पंचांग के अनुसार इस दिन सूर्य देव चित्रा नक्षत्र में विराजमान रहेंगे। वैदिक ज्योतिष में चित्रा नक्षत्र के स्वामी मंगल ग्रह हैं, जिन्हें सूर्य का मित्र माना गया है। इस संयोग से आत्मविश्वास, साहस, पराक्रम और ऊर्जा में वृद्धि होती है। नौकरीपेशा जातकों के कार्य की उच्च अधिकारियों द्वारा सराहना संभव है, और प्रशासन तथा उच्च पदों से जुड़े लोगों को नई जिम्मेदारी या प्रमोशन मिलने का संयोग बनता है।
सूर्य इस दिन कन्या राशि में रहेंगे, जिससे व्यावहारिक और योजनाबद्ध कार्यशैली लाभकारी सिद्ध होती है। चंद्रमा तुला राशि में विचरण करेंगे — ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार यह स्थिति जातक को मिलनसार, विनम्र और कूटनीतिक स्वभाव प्रदान करती है तथा जीवन में संतुलन और न्याय की प्रवृत्ति बढ़ाती है।
शुभ मुहूर्त
अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:50 से दोपहर 12:36 बजे तक रहेगा। यह दिन का आठवाँ मुहूर्त होता है जब सूर्य ठीक मस्तक के ऊपर स्थित होते हैं। मान्यता है कि इस काल में किए गए कार्यों से समस्त अशुभ प्रभाव और दोष स्वतः समाप्त हो जाते हैं। इसी प्रकार अमृतकाल दोपहर 2:33 से शाम 4:14 बजे तक रहेगा — यह समय नए व्यापार, निवेश, पूजा-पाठ और महत्वपूर्ण यात्रा के लिए सर्वश्रेष्ठ माना गया है।
योग और अशुभ काल
सोमवार को रात 8:31 बजे तक विष्कुम्भ योग रहेगा। यह 27 नित्य योगों में प्रथम योग है और सामान्यतः बाधा-युक्त माना जाता है। इसकी प्रथम 5 घटियों (लगभग 2 घंटे) में नया कार्य, विवाह, यात्रा या गृह प्रवेश न करने का परामर्श दिया जाता है।
राहुकाल सुबह 7:53 से 9:19 बजे तक रहेगा — इस अवधि में किसी नए या शुभ कार्य का आरंभ वर्जित माना गया है। यमगंड काल सुबह 10:46 से दोपहर 12:13 बजे तक है, जो नए व्यापार, यात्रा और धन लेनदेन के लिए अशुभ माना गया है। गुलिक काल दोपहर 1:40 से 3:06 बजे तक रहेगा — इस 'विषैले समय' में नए कार्यों से बचना उचित है, हालांकि बैंक में जमा, दान या निवेश इस काल में ग्राह्य माने जाते हैं।
दिशाशूल और विशेष सावधानी
सोमवार को दिशाशूल पूर्व दिशा में रहेगा। ज्योतिष और वास्तु शास्त्र के अनुसार इस दिन पूर्व दिशा की यात्रा या प्रस्थान अशुभ माना जाता है। अन्य दिशाओं में यात्रा को प्राथमिकता देना श्रेयस्कर होगा। गौरतलब है कि नवरात्रि के इस पावन अवसर पर मां ब्रह्मचारिणी की विधिवत पूजा, जप और ध्यान से साधक को तप, संयम और आत्मशक्ति की प्राप्ति होती है।