11 अक्टूबर 2026 पंचांग: शारदीय नवरात्र प्रतिपदा, घटस्थापना मुहूर्त और मां शैलपुत्री पूजा विधि
सारांश
मुख्य बातें
11 अक्टूबर 2026 को शारदीय नवरात्र का शुभारंभ हो रहा है। आश्विन शुक्ल प्रतिपदा के इस पावन दिन घटस्थापना (कलश स्थापना) के साथ मां दुर्गा के प्रथम स्वरूप मां शैलपुत्री की पूजा-अर्चना की जाएगी। पंचांग के अनुसार प्रतिपदा तिथि रात 9:31 बजे तक रहेगी, जिसके पश्चात द्वितीया तिथि प्रारंभ हो जाएगी।
सूर्योदय, सूर्यास्त और चंद्र गति
इस रविवार सुबह 6:26 बजे सूर्योदय और शाम 6:01 बजे सूर्यास्त होगा। चंद्रोदय सुबह 6:47 बजे और चंद्रास्त शाम 6:19 बजे होगा। सुबह 10:03 बजे तक चंद्रमा कन्या राशि में रहेगा और उसके बाद तुला राशि में प्रवेश करेगा। वैदिक ज्योतिष के अनुसार, कन्या राशि में चंद्रमा की स्थिति मन को विश्लेषणात्मक और संवेदनशील बनाती है क्योंकि कन्या राशि के स्वामी बुध, चंद्रमा के मित्र ग्रह हैं।
नक्षत्र और ग्रह स्थिति
पंचांग के अनुसार इस दिन सूर्य देव चित्रा नक्षत्र में स्थित रहेंगे। चित्रा नक्षत्र के स्वामी मंगल ग्रह हैं, जिन्हें सूर्य का मित्र माना जाता है। वैदिक ज्योतिष की मान्यता के अनुसार, सूर्य और मंगल के इस संयोग से व्यक्ति में आत्मविश्वास, साहस और ऊर्जा का संचार होता है। इसके अतिरिक्त, नौकरीपेशा लोगों के कार्य की उच्च अधिकारियों द्वारा सराहना होने और प्रशासन तथा उच्च पदों से जुड़े लोगों को नई जिम्मेदारी या प्रमोशन मिलने की संभावना बताई जाती है।
सूर्य इस दिन कन्या राशि में स्थित रहेंगे। ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार, इस दौरान व्यावहारिक और योजनाबद्ध तरीके से कार्य करना लाभकारी माना जाता है।
शुभ मुहूर्त: अभिजीत और अमृतकाल
इस दिन अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:50 बजे से दोपहर 12:36 बजे तक रहेगा। यह दिन का सर्वश्रेष्ठ और फलदायी समय माना जाता है — लगभग 48 मिनट की यह बेला तब होती है जब सूर्य ठीक सिर के ऊपर होते हैं। मान्यता है कि इस मुहूर्त में किए गए कार्यों के सभी प्रकार के अशुभ दोष स्वतः नष्ट हो जाते हैं।
अमृतकाल इस दिन दोपहर 3:53 बजे से शाम 5:32 बजे तक रहेगा। पंचांग के अनुसार यह समय नए व्यापार, निवेश, पूजा-पाठ और महत्वपूर्ण यात्रा के लिए श्रेष्ठ माना गया है।
वैधृति योग और अशुभ काल
रविवार को रात 9:05 बजे तक वैधृति योग रहेगा। वैदिक ज्योतिष में यह 27 नित्य योगों में अंतिम एवं 27वाँ योग है। संस्कृत में 'वैधृति' का अर्थ 'पूर्णतः धारण करना' या 'रोकना' होता है। इस योग की स्वामिनी दैत्यों की माता दिति मानी जाती हैं।
राहुकाल शाम 4:34 बजे से 6:01 बजे तक रहेगा — इस अवधि में नए या शुभ कार्यों की शुरुआत वर्जित मानी जाती है। गुलिक काल दोपहर 3:07 बजे से 4:34 बजे तक और यमगंड काल दोपहर 12:13 बजे से 1:40 बजे तक रहेगा। इन तीनों अशुभ कालों में नया कार्य, यात्रा या धन-लेनदेन से परहेज करने की सलाह दी जाती है। गौरतलब है कि गुलिक काल में बैंक में पैसे जमा करना, दान देना या पहले से चल रहे कार्य जारी रखे जा सकते हैं।
दिशाशूल और सावधानियाँ
रविवार को दिशाशूल पश्चिम दिशा में रहेगा। ज्योतिष और वास्तु शास्त्र के अनुसार, जिस दिशा में दिशाशूल हो, उस दिशा में यात्रा करना या निकलना अशुभ माना जाता है। अतः इस दिन पश्चिम दिशा की ओर यात्रा आरंभ करने से बचना उचित रहेगा।
नवरात्र के इस पहले दिन घटस्थापना के लिए अभिजीत मुहूर्त सर्वोत्तम माना जा रहा है, और श्रद्धालुओं से आग्रह है कि वे राहुकाल एवं अन्य अशुभ कालों से पूर्व पूजा-विधि संपन्न करें।