13 अक्टूबर 2026 पंचांग: शारदीय नवरात्र तृतीया पर मां चंद्रघंटा पूजा, अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:49 से 12:36 बजे तक
सारांश
मुख्य बातें
13 अक्टूबर 2026 (मंगलवार) को शारदीय नवरात्र का तीसरा दिन है, जिसमें माँ दुर्गा के तीसरे स्वरूप मां चंद्रघंटा की पूजा-अर्चना की जाती है। पंचांग के अनुसार इस दिन आश्विन शुक्ल तृतीया तिथि रात 11:28 बजे तक रहेगी, जिसके पश्चात चतुर्थी तिथि का आरंभ होगा। विशेष मुहूर्तों और ग्रह-नक्षत्रों की अनुकूल स्थिति के कारण यह दिन धार्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
सूर्योदय, सूर्यास्त एवं चंद्रमा की स्थिति
इस दिन सूर्योदय सुबह 6:26 बजे और सूर्यास्त शाम 5:59 बजे होगा। चंद्रोदय सुबह 8:40 बजे और चंद्रास्त शाम 7:37 बजे होगा। पंचांग के अनुसार सूर्य देव कन्या राशि में तथा चंद्रमा तुला राशि में स्थित रहेंगे। ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार, सूर्य का कन्या राशि में होना व्यावहारिक और योजनाबद्ध कार्यशैली के लिए लाभकारी माना जाता है।
नक्षत्र एवं योग का विशेष प्रभाव
इस दिन सूर्य देव चित्रा नक्षत्र में रहेंगे। वैदिक ज्योतिष के अनुसार, चित्रा नक्षत्र के स्वामी मंगल ग्रह हैं, जिन्हें सूर्य का मित्र माना जाता है। सूर्य और मंगल के इस संयोग से व्यक्ति में आत्मविश्वास, साहस, पराक्रम और ऊर्जा की वृद्धि होती है। नौकरीपेशा लोगों के कार्य की उच्च अधिकारियों द्वारा सराहना हो सकती है, और प्रशासन तथा उच्च पदों से जुड़े लोगों को नई जिम्मेदारी या प्रमोशन मिलने के संकेत हैं।
मंगलवार को रात 8:23 बजे तक प्रीति योग रहेगा। वैदिक ज्योतिष में प्रीति योग 27 नित्य योगों में से दूसरा अत्यंत शुभ योग माना जाता है। 'प्रीति' का अर्थ प्रेम, स्नेह और मित्रता है। इस योग के देवता भगवान विष्णु को माना गया है, जो प्रेम और पालन के प्रतीक हैं।
शुभ मुहूर्त: अभिजीत और अमृतकाल
इस दिन अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:49 से दोपहर 12:36 बजे तक रहेगा। यह दिन का सर्वाधिक शुभ और फलदायी समय माना जाता है। ज्योतिष मान्यता के अनुसार, इस मुहूर्त में किए गए कार्यों से सभी प्रकार के अशुभ प्रभाव स्वतः नष्ट हो जाते हैं — यह वह बेला होती है जब सूर्य ठीक सिर के ऊपर स्थित रहते हैं।
इसके अतिरिक्त, शाम 4:13 से 5:56 बजे तक अमृतकाल रहेगा। पंचांग के अनुसार, अमृतकाल अत्यंत मंगलकारी और सकारात्मक ऊर्जा से भरपूर समय होता है। नए व्यापार, निवेश, पूजा-पाठ और महत्वपूर्ण यात्रा के लिए यह समय श्रेष्ठ माना गया है।
अशुभ काल: राहुकाल, गुलिक काल और यमगंड
मंगलवार को राहुकाल दोपहर 3:06 से 4:32 बजे तक रहेगा। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, इस अवधि में कोई नया या शुभ कार्य आरंभ करना अशुभ माना जाता है। पहले से चल रहे कार्य जारी रखे जा सकते हैं।
गुलिक काल दोपहर 12:13 से 1:39 बजे तक रहेगा, जिसे 'विषैला समय' भी कहा जाता है। माना जाता है कि इस काल में आरंभ किए गए कार्य नकारात्मक परिणाम दे सकते हैं। हालाँकि, बैंक में धन जमा करना, दान देना या निवेश करना इस काल में शुभ माना जाता है।
यमगंड काल सुबह 9:19 से 10:46 बजे तक रहेगा। यह समय मृत्यु के देवता यमराज से जुड़ा माना जाता है और नए कार्यों के आरंभ, यात्रा तथा धन के लेनदेन से बचने की सलाह दी जाती है। इसके साथ ही मंगलवार को दिशाशूल उत्तर दिशा में रहेगा, जिस दिशा में यात्रा करना इस दिन वर्जित माना गया है।
गौरतलब है कि शारदीय नवरात्र के तीसरे दिन मां चंद्रघंटा की पूजा करना अत्यंत फलदायी माना जाता है, और अभिजीत मुहूर्त में विशेष पूजा-अर्चना करने से शुभ फलों की प्राप्ति होती है।