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नवरात्रि के तीसरे दिन: मां चंद्रघंटा की उपासना से प्राप्त करें शांति और साहस का आशीर्वाद

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नवरात्रि के तीसरे दिन: मां चंद्रघंटा की उपासना से प्राप्त करें शांति और साहस का आशीर्वाद

सारांश

नवरात्रि के तीसरे दिन मां चंद्रघंटा की पूजा से भक्तों को शांति, साहस और आध्यात्मिक शक्ति का आशीर्वाद मिलता है। जानें कैसे इस दिन की साधना जीवन में सकारात्मक परिवर्तन ला सकती है।

मुख्य बातें

मां चंद्रघंटा की उपासना से शांति और साहस की प्राप्ति होती है।
उनका घंटा नकारात्मकता को समाप्त करता है।
साधना और ध्यान से मानसिक शांति मिलती है।
मां भक्तों को संकटों से उबारती हैं।
यह स्वरूप संतुलन और शक्ति का प्रतीक है।

नोएडा, 21 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। नवरात्रि के इस पावन पर्व के तीसरे दिन, भक्तजन मां दुर्गा के तृतीय रूप, मां चंद्रघंटा की विधिपूर्वक पूजा-अर्चना करते हैं। धार्मिक परंपराओं के अनुसार, इस दिन मां चंद्रघंटा की उपासना से भक्तों को शांति, साहस और आध्यात्मिक शक्ति की प्राप्ति होती है। मां का यह स्वरूप अत्यंत तेजस्वी और दिव्य माना जाता है, जो अपने भक्तों के सभी कष्टों का निवारण करती हैं।

मां चंद्रघंटा के मस्तक पर अर्धचंद्र सुशोभित है, जिससे उन्हें “चंद्रघंटा” नाम मिला है। उनके हाथ में विभिन्न अस्त्र-शस्त्र होते हैं, और उनका स्वरूप सदैव युद्ध के लिए तत्पर दिखाई देता है। मां का यह रूप शांति और शक्ति का अद्भुत संगम है। उनके घंटे की ध्वनि नकारात्मक शक्तियों का नाश करती है और वातावरण को पवित्र बनाती है।

धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, देवासुर संग्राम के समय मां चंद्रघंटा के घंटे की ध्वनि ने असुरों में भय उत्पन्न किया, जिससे उनका विनाश हुआ। यह घंटानाद केवल युद्ध का प्रतीक नहीं, बल्कि आध्यात्मिक ऊर्जा और सकारात्मक कंपन का भी प्रतीक है। शास्त्रों में नाद (ध्वनि) को ब्रह्मांड की मूल शक्ति माना गया है। संगीत और सुरों को वशीकरण का बीज मंत्र कहा गया है, जो मन और आत्मा को नियंत्रित करने की क्षमता रखते हैं। मां चंद्रघंटा की आराधना से व्यक्ति के जीवन में मानसिक शांति, आत्मविश्वास और निर्भीकता का संचार होता है।

विशेष रूप से इस दिन साधना और ध्यान करने से मन एकाग्र होता है और नकारात्मक विचारों से मुक्ति मिलती है। मां अपने भक्तों को हर प्रकार के भय और संकट से उबारकर उन्हें सुख-समृद्धि का आशीर्वाद प्रदान करती हैं। नवरात्रि के तीसरे दिन श्रद्धालु विधिपूर्वक मां की पूजा करते हैं, दुर्गा सप्तशती का पाठ करते हैं और भक्ति-भाव से मां का स्मरण करते हैं। मां चंद्रघंटा का यह दिव्य स्वरूप केवल शक्ति का प्रतीक नहीं है, बल्कि यह संदेश भी देता है कि जीवन में संतुलन, शांति और साहस बनाए रखना ही सच्ची साधना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि समाज में सकारात्मकता और सहयोग की भावना को भी प्रोत्साहित करता है। मां चंद्रघंटा की उपासना से न केवल भक्तों का मनोबल बढ़ता है, बल्कि यह उनके जीवन में संतुलन और शांति भी लाती है।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मां चंद्रघंटा की उपासना का महत्व क्या है?
मां चंद्रघंटा की उपासना से भक्तों को शांति, साहस और आध्यात्मिक शक्ति की प्राप्ति होती है।
क्या मां चंद्रघंटा का घंटा विशेष महत्व रखता है?
हां, मां चंद्रघंटा का घंटा नकारात्मक शक्तियों का नाश करता है और सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है।
नवरात्रि के तीसरे दिन विशेष पूजा विधि क्या है?
इस दिन भक्तजन मां की विधिपूर्वक पूजा करते हैं, दुर्गा सप्तशती का पाठ करते हैं और भक्ति-भाव से मां का स्मरण करते हैं।
राष्ट्र प्रेस
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