क्या आप नवरात्रि के पांचवे दिन मां स्कंदमाता की पूजा कर रहे हैं?

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क्या आप नवरात्रि के पांचवे दिन मां स्कंदमाता की पूजा कर रहे हैं?

सारांश

नवरात्रि के पांचवे दिन मां स्कंदमाता की पूजा का महत्व समझें। इस दिन की आराधना से संतान सुख, ज्ञान और शक्ति की प्राप्ति होती है। जानें कैसे मां स्कंदमाता का आशीर्वाद लें और अपने जीवन में सुख-समृद्धि लाएं।

Key Takeaways

  • मां स्कंदमाता की आराधना से संतान सुख की प्राप्ति होती है।
  • इस दिन की पूजा से मानसिक शक्ति और ज्ञान प्राप्त होता है।
  • पूजा विधि में साफ वस्त्र पहनना और मां को भोग अर्पित करना शामिल है।
  • मां स्कंदमाता का आशीर्वाद जीवन में सुख-समृद्धि लाता है।
  • भक्तों को शत्रुओं से रक्षा और स्वास्थ्य लाभ होता है।

नई दिल्ली, 25 सितंबर (राष्ट्र प्रेस)। आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि पर शुक्रवार को नवरात्रि का पांचवां दिन मनाया जा रहा है। इस दिन मां स्कंदमाता की पूजा की जाती है, जो कि माता पार्वती का मातृत्वपूर्ण अवतार हैं।

इनकी आराधना से भक्तों को संतान सुख, ज्ञान, शक्ति, और आध्यात्मिक विकास की प्राप्ति होती है। साथ ही, परिवार में सुख-समृद्धि का संचार होता है।

द्रिक पंचांग के अनुसार, इस दिन सूर्य कन्या राशि में और चंद्रमा दोपहर के 3 बजकर 23 मिनट तक तुला राशि में रहेंगे। इसके बाद वृश्चिक राशि में प्रविष्ट होंगे। इस दिन अभिजीत मुहूर्त सुबह 11 बजकर 48 मिनट से लेकर दोपहर 12 बजकर 36 मिनट तक रहेगा, जबकि राहुकाल का समय सुबह 10 बजकर 42 मिनट से दोपहर 12 बजकर 12 मिनट तक होगा।

पुराणों में बताया गया है कि भगवान स्कंद (कार्तिकेय) की माता होने के कारण इन्हें स्कंदमाता कहा जाता है। कमल पर विराजमान होने के कारण इन्हें पद्मासना देवी भी कहा जाता है। चार भुजाओं वाली मां स्कंदमाता अभय मुद्रा में अपने भक्तों को आशीर्वाद देती हैं और गोद में छह मुख वाले बाल स्कंद को धारण करती हैं। कमल पुष्प लिए ये देवी शांति, पवित्रता, और सकारात्मकता की प्रतीक हैं।

मां स्कंदमाता की पूजा करने से संतान सुख की प्राप्ति होती है और शत्रुओं का नाश होता है। सूर्यमंडल की अधिष्ठात्री होने के कारण इनकी उपासना करने वाला भक्त तेजस्वी और कांतिमय बनता है।

शास्त्रों में इनकी महिमा का वर्णन है कि इनकी भक्ति से भवसागर पार करना सरल हो जाता है और भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।

पूजा विधि के तहत, ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें, साफ वस्त्र पहनें और संभव हो तो पीले वस्त्र धारण करें, जो शांति और सकारात्मकता का प्रतीक है। माता की चौकी को साफ करें, फिर गंगाजल का छिड़काव करें। उन्हें पान, सुपारी, फूल, फल, अक्षत आदि अर्पित करें। श्रृंगार के सामान में लाल चुनरी, सिंदूर, अक्षत, लाल पुष्प (विशेषकर गुड़हल), चंदन, रोली आदि शामिल करें। इसके बाद, मिठाई का भोग लगाएं।

स्कंदमाता की कथा का पाठ करें और उनके मंत्रों का जाप करें। इसके बाद मां दुर्गा की आरती करें और आचमन कर पूरे घर में आरती दिखाना न भूलें। अंत में प्रसाद ग्रहण करें, जिससे संतान और स्वास्थ्य संबंधी बाधाएं दूर होती हैं।

मां स्कंदमाता की आराधना मन को एकाग्र और पवित्र बनाती है। यह पावन दिन भक्तों के लिए आध्यात्मिक उन्नति और सुख-समृद्धि का अवसर लेकर आता है।

Point of View

जिससे समाज में एकता और भाईचारे का भाव बढ़ता है।
NationPress
15/02/2026

Frequently Asked Questions

मां स्कंदमाता की पूजा का महत्व क्या है?
मां स्कंदमाता की पूजा से भक्तों को संतान सुख, ज्ञान, शक्ति और आध्यात्मिक विकास की प्राप्ति होती है।
नवरात्रि के पांचवे दिन क्या करना चाहिए?
इस दिन मां स्कंदमाता की पूजा विधि से करें। स्नान के बाद साफ वस्त्र पहनें और माता को फूल, फल, और श्रृंगार का सामान अर्पित करें।
क्या मां स्कंदमाता की पूजा से स्वास्थ्य लाभ होता है?
जी हां, मां स्कंदमाता की आराधना से स्वास्थ्य संबंधी बाधाएं दूर होती हैं और भक्त को मानसिक शांति मिलती है।
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