शारदीय नवरात्रि 2026: 11 अक्टूबर से शुरू पर्व, नौ दिन नौ देवियाँ — जानें पूजा क्रम और महत्व
सारांश
मुख्य बातें
शारदीय नवरात्रि 2026 का पावन पर्व 11 अक्टूबर, रविवार से आरंभ हो रहा है। इन नौ दिनों में मां दुर्गा के नौ विशिष्ट स्वरूपों की विधिवत पूजा-अर्चना की जाती है। देशभर के करोड़ों श्रद्धालु व्रत रखते हैं, माता की आराधना करते हैं और अपने घर-परिवार की सुख-समृद्धि के लिए प्रार्थना करते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार, प्रत्येक दिन मां के एक विशेष स्वरूप को समर्पित है, जिसका अपना अलग आध्यात्मिक महत्व है।
प्रथम से तृतीय दिन : शक्ति, संयम और साहस
नवरात्रि के पहले दिन (11 अक्टूबर) मां शैलपुत्री की पूजा होती है। उन्हें पर्वतराज हिमालय की पुत्री माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार उनकी आराधना से भक्तों को शक्ति, स्थिरता और आत्मविश्वास का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
दूसरे दिन (12 अक्टूबर) मां ब्रह्मचारिणी की पूजा की जाती है। यह स्वरूप तप, त्याग और संयम का प्रतीक है। मान्यता है कि इनकी उपासना से धैर्य, आत्मबल और विपरीत परिस्थितियों में डटे रहने की शक्ति मिलती है।
तीसरे दिन (13 अक्टूबर) मां चंद्रघंटा की पूजा होती है। उनके मस्तक पर अर्धचंद्र सुशोभित होने के कारण यह नाम पड़ा। मान्यता है कि इनकी आराधना से भय और परेशानियों से मुक्ति मिलती है तथा साहस में वृद्धि होती है।
चतुर्थ से षष्ठी : ऊर्जा, ममता और विजय
चौथे दिन (14 अक्टूबर) मां कूष्मांडा की पूजा की जाती है। इन्हें ऊर्जा और सृजन शक्ति का स्वरूप माना गया है। मान्यता है कि इनकी पूजा से घर में सुख-समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
पाँचवें दिन (15 अक्टूबर) मां स्कंदमाता की आराधना होती है। इन्हें भगवान कार्तिकेय की माता माना जाता है। भक्त इनसे बुद्धि, शांति और संतान सुख की कामना करते हैं। यह स्वरूप ममता और वात्सल्य का भी प्रतीक है।
छठे दिन (16 अक्टूबर) मां कात्यायनी की पूजा की जाती है। इन्हें शक्ति और साहस का स्वरूप माना गया है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इनकी पूजा से वैवाहिक जीवन में सुख-शांति और मनोकामनाओं की पूर्ति होती है।
सप्तमी से नवमी : कल्याण, पवित्रता और सिद्धि
सातवें दिन (17 अक्टूबर) मां कालरात्रि की आराधना की जाती है। यह स्वरूप देखने में उग्र अवश्य है, किंतु धार्मिक मान्यता के अनुसार भक्तों के लिए ये सदैव कल्याणकारी हैं। इनकी पूजा से भय दूर होता है और साहस का संचार होता है।
अष्टमी (18 अक्टूबर) को मां महागौरी की पूजा होती है। ये शांति, पवित्रता और सौम्यता की देवी मानी जाती हैं। इस दिन अनेक घरों में कन्या पूजन भी किया जाता है और परिवार की सुख-शांति व समृद्धि की कामना की जाती है।
नवमी (19 अक्टूबर), जो नवरात्रि का नौवाँ और अंतिम दिन है, मां सिद्धिदात्री को समर्पित है। इन्हें समस्त सिद्धियाँ प्रदान करने वाली देवी माना गया है। इस दिन अनेक परिवारों में कन्या पूजन और हवन का आयोजन होता है। मान्यता है कि मां सिद्धिदात्री की उपासना से आध्यात्मिक शक्ति और कार्यों में सफलता का आशीर्वाद मिलता है।
नवरात्रि का आध्यात्मिक और सामाजिक महत्व
शारदीय नवरात्रि केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि यह भारतीय संस्कृति में सामूहिक शक्ति-आराधना का पर्व है। यह ऐसे समय में आता है जब शरद ऋतु की शुरुआत के साथ प्रकृति में भी नई ऊर्जा का संचार होता है। पूरे देश में गरबा, डाँडिया, जागरण और दुर्गा पूजा के भव्य आयोजन इस पर्व को राष्ट्रीय उत्सव का रूप देते हैं। 19 अक्टूबर को नवमी के बाद 20 अक्टूबर को विजयादशमी (दशहरा) का पर्व मनाया जाएगा, जो बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक है।