9 अक्टूबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

शारदीय नवरात्रि 2026: दुर्गा सप्तशती के 13 अध्याय, नवदुर्गा और 5 शक्तिशाली मंत्रों का महत्व

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
शारदीय नवरात्रि 2026: दुर्गा सप्तशती के 13 अध्याय, नवदुर्गा और 5 शक्तिशाली मंत्रों का महत्व

सारांश

शारदीय नवरात्रि 11 अक्टूबर 2026 से शुरू हो रही है। दुर्गा सप्तशती — 700 श्लोकों और 13 अध्यायों का यह ग्रंथ — नवदुर्गा उपासना की जड़ है। महाकाली, महालक्ष्मी और महासरस्वती के तीन चरित्रों से नौ देवियों का विधान पुष्ट होता है।

मुख्य बातें

शारदीय नवरात्रि 2026 का आरंभ 11 अक्टूबर , रविवार से हो रहा है।
दुर्गा सप्तशती मार्कंडेय पुराण का हिस्सा है, जिसकी रचना महर्षि वेद व्यास ने की; इसमें 13 अध्याय और 700 श्लोक हैं।
ग्रंथ के तीन चरित्र — महाकाली, महालक्ष्मी, महासरस्वती — नवदुर्गा की उपासना का आधार हैं।
सप्तशती में महिषासुर, शुंभ-निशुंभ, चंड-मुंड और रक्तबीज के वध की कथाएँ वर्णित हैं।
'सर्वमंगल मांगल्ये', 'जयन्ती मंगला काली' सहित 5 प्रमुख मंत्र सुरक्षा, समृद्धि और मनोकामना पूर्ति के लिए विशेष फलदायी माने जाते हैं।

शारदीय नवरात्रि 2026 का शुभारंभ 11 अक्टूबर 2026, रविवार से हो रहा है। इन नौ दिनों में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की जाती है और घरों तथा मंदिरों में दुर्गा सप्तशती का पाठ विशेष रूप से किया जाता है। यह पवित्र ग्रंथ देवी आराधना की परंपरा का केंद्रबिंदु माना जाता है।

दुर्गा सप्तशती क्या है और इसकी रचना कैसे हुई

दुर्गा सप्तशती को 'देवी माहात्म्य' और 'चंडी पाठ' के नाम से भी जाना जाता है। यह मार्कंडेय पुराण का अभिन्न हिस्सा है, जिसकी रचना महर्षि वेद व्यास ने की। इस ग्रंथ में कुल 13 अध्याय और 700 श्लोक संकलित हैं, इसीलिए इसे 'सप्तशती' कहा जाता है।

इस ग्रंथ में देवी दुर्गा की संपूर्ण कथा, उनके रहस्य, कवच, अर्गला, कीलक और विभिन्न रूपों में प्रकटीकरण के प्रसंग विस्तार से वर्णित हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार यह ग्रंथ साधकों को भय, शोक और संकटों से मुक्ति दिलाने में सक्षम है।

तेरह अध्यायों का विस्तृत परिचय

पहले अध्याय में दैत्य मधु और कैटभ के वध की कथा है, जबकि दूसरे अध्याय में देवताओं के संयुक्त तेज से मां दुर्गा के अवतरण और महिषासुर की सेना के विनाश का वर्णन है। तीसरा अध्याय महिषासुर और उसके सेनापतियों के वध से संबंधित है।

चौथे अध्याय में इंद्र सहित देवताओं द्वारा मां की स्तुति की गई है। पाँचवें अध्याय में राक्षस शुंभ के सामने चंड-मुंड द्वारा देवी की सुंदरता का वर्णन, तथा छठे अध्याय में धुम्रलोचन वध का प्रसंग है।

सातवें अध्याय में चंड-मुंड वध और आठवें अध्याय में रक्तबीज के वध की कथा वर्णित है। नौवें और दसवें अध्याय में निशुंभ-शुंभ के वध का विस्तृत विवरण है। ग्यारहवें अध्याय में देवी से वरदान ग्रहण का प्रसंग है, जबकि बारहवें और तेरहवें अध्याय में देवी के चरित्र की महिमा और वैश्य सुरथ की कथा है, जिन्हें देवी का वरदान प्राप्त हुआ था।

नवदुर्गा और सप्तशती का संबंध

धार्मिक ग्रंथों के अनुसार देवी के ये विविध प्रकटीकरण और उनके रण-रूप ही आगे चलकर नवदुर्गा की उपासना की परंपरा का आधार बने। दुर्गा सप्तशती के 700 श्लोकों को तीन भागों में विभाजित किया गया है — प्रथम चरित्र (महाकाली), मध्यम चरित्र (महालक्ष्मी) और उत्तर चरित्र (महासरस्वती)।

गौरतलब है कि ये तीनों ही महाशक्ति के मूल स्वरूप हैं, जिनसे नौ अलग-अलग देवियों की आराधना का विधान पुष्ट होता है। इस प्रकार दुर्गा सप्तशती और नवदुर्गा की उपासना परस्पर पूरक हैं।

पाँच प्रमुख मंत्र और उनका महत्व

'सर्वमंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके। शरण्ये त्र्यंबके गौरी नारायणी नमोस्तुते॥' — यह मंत्र किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत, पारिवारिक सुख और सभी मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए अत्यंत फलदायी माना जाता है।

'ऊं जयन्ती मंगला काली भद्रकाली कपालिनी दुर्गा क्षमा शिवा धात्री स्वाहा स्वधा नमोस्तुते॥' — इस मंत्र का जाप जीवन में विजय, संकटों के निवारण और मां दुर्गा की कृपा से उन्नति के लिए किया जाता है।

'शूलेन पाहि नो देवि पाहि खड्गेन चाम्बिके। घण्टास्वनेन नः पाहि चापज्यानिःस्वनेन च॥' — यह मंत्र एक आध्यात्मिक सुरक्षा कवच बनाता है, जो नकारात्मक ऊर्जा, बुरी नज़र, भय और शत्रुओं से रक्षा करता है।

'सर्वाबाधाप्रशमनं त्रैलोक्यस्याखिलेश्वरि। एवमेव त्वया कार्यमस्मद्वैरिविनाशनम्॥' — तीनों लोकों की पीड़ा हरने वाली मां से प्रत्यक्ष और गुप्त शत्रुओं के विनाश तथा जीवन की बड़ी बाधाओं को शांत करने की प्रार्थना इस मंत्र के माध्यम से की जाती है।

'सर्वाबाधा विनिर्मुक्तो धनधान्यसुतान्वितः। मनुष्यो मत्प्रसादेन भविष्यति नसंशयः॥' — मान्यता है कि इस मंत्र के नियमित जाप से मां दुर्गा की अनुकंपा से घर में धन-धान्य, सुख-समृद्धि और संतान सुख की प्राप्ति होती है।

नवरात्रि में पाठ का विशेष महत्व

धार्मिक परंपरा के अनुसार दुर्गा सप्तशती का पाठ विशेष रूप से नवरात्रों में किया जाता है और मान्यता है कि यह भक्तों को अचूक फल देता है। इस नवरात्रि 11 अक्टूबर से प्रारंभ हो रही आराधना के साथ श्रद्धालु इन मंत्रों का जाप करके देवी का आशीर्वाद प्राप्त कर सकते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

जिसमें बुराई के हर रूप के विरुद्ध महाशक्ति की विजय का दर्शन है। नवरात्रि के व्यावसायीकरण के इस दौर में जहाँ आयोजनों की भव्यता पर ज़ोर है, वहाँ यह समझना ज़रूरी है कि इस ग्रंथ की मूल प्रासंगिकता उसके श्लोकों की गहराई में है, न केवल अनुष्ठान में। नवदुर्गा और सप्तशती के तीन चरित्रों का सीधा संबंध बताता है कि भारतीय दर्शन में शक्ति को कभी एकायामी नहीं देखा गया।
RashtraPress
9 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दुर्गा सप्तशती क्या है और इसे यह नाम क्यों दिया गया?
दुर्गा सप्तशती मार्कंडेय पुराण का एक भाग है जिसमें 700 श्लोक और 13 अध्याय हैं — '700 श्लोक' होने के कारण इसे 'सप्तशती' कहते हैं। इसकी रचना महर्षि वेद व्यास ने की और इसे 'देवी माहात्म्य' व 'चंडी पाठ' के नाम से भी जाना जाता है।
नवदुर्गा और दुर्गा सप्तशती का आपस में क्या संबंध है?
दुर्गा सप्तशती में देवी के विविध प्रकटीकरण और युद्ध-रूप ही नवदुर्गा उपासना की परंपरा का आधार बने। ग्रंथ के तीन चरित्र — महाकाली, महालक्ष्मी और महासरस्वती — महाशक्ति के मूल स्वरूप हैं, जिनसे नौ देवियों की आराधना का विधान पुष्ट होता है।
शारदीय नवरात्रि 2026 कब से शुरू हो रही है?
शारदीय नवरात्रि 2026 का शुभारंभ 11 अक्टूबर 2026, रविवार से हो रहा है। इन नौ दिनों में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की विधि-विधान से पूजा और दुर्गा सप्तशती का पाठ किया जाता है।
दुर्गा सप्तशती के 13 अध्यायों में क्या-क्या वर्णित है?
पहले तीन अध्यायों में मधु-कैटभ वध, मां दुर्गा का अवतरण और महिषासुर के वध की कथा है। चौथे से दसवें अध्याय में शुंभ-निशुंभ, चंड-मुंड, धुम्रलोचन और रक्तबीज के वध का वर्णन है, जबकि ग्यारहवें से तेरहवें अध्याय में देवी स्तुति, वरदान और वैश्य सुरथ की कथा है।
नवरात्रि में दुर्गा सप्तशती का पाठ क्यों किया जाता है और इसके क्या लाभ हैं?
धार्मिक मान्यता के अनुसार दुर्गा सप्तशती का पाठ भय, शोक और सभी प्रकार के कष्टों से मुक्ति दिलाता है। नवरात्रि में इसका पाठ विशेष रूप से फलदायी माना जाता है और इसके मंत्र सुरक्षा, धन-समृद्धि तथा मनोकामना पूर्ति के लिए जपे जाते हैं।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 घंटा पहले
  2. 2 घंटे पहले
  3. कल
  4. 2 दिन पहले
  5. 6 महीने पहले
  6. 1 साल पहले
  7. 1 साल पहले
  8. 1 साल पहले