नवरात्रि का रहस्य: कौन सी देवी किस अंग की रक्षा करती हैं? जानें दुर्गा कवच का महत्व

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नवरात्रि का रहस्य: कौन सी देवी किस अंग की रक्षा करती हैं? जानें दुर्गा कवच का महत्व

सारांश

नवरात्रि के पावन पर्व पर देवी दुर्गा की आराधना का महत्व जानें। इस लेख में जानिए कैसे दुर्गा कवच भक्तों की रक्षा करता है और कौन सी देवी किस अंग की सुरक्षा करती हैं।

मुख्य बातें

नवरात्रि के पर्व में शक्ति की आराधना का महत्व है।
दुर्गा कवच मानसिक और शारीरिक सुरक्षा प्रदान करता है।
कवच के विभिन्न रूप भक्तों के अंगों की रक्षा करते हैं।
नवरात्रि में व्रत और पूजा से सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
दुर्गा सप्तशती का पाठ रोग और नकारात्मकता से मुक्ति दिलाता है।

नई दिल्ली, 20 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। सनातन धर्म में भगवती की पूजा के लिए समर्पित चैत्र नवरात्रि का त्योहार अपनी विशेष महत्ता रखता है। माना जाता है कि नवरात्रि के नौ दिनों में शक्ति की उपासना करने से माता भक्तों को आरोग्य, शक्ति और आस्था का वरदान देती हैं और सभी प्रकार के भय से भी मुक्ति प्रदान करती हैं।

इस पर्व के दौरान अनेक भक्त पूरे नौ दिन व्रत रखकर माता दुर्गा की उपासना और पूजा-पाठ करते हैं। इस समय दुर्गा कवच (देवी कवच) का पाठ अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। यह मार्कंडेय पुराण में वर्णित दुर्गा सप्तशती का एक शक्तिशाली हिस्सा है, जिसे ब्रह्मा जी ने ऋषि मार्कंडेय को बताया था। दुर्गा कवच माता दुर्गा के विभिन्न रूपों द्वारा साधक के सम्पूर्ण शरीर की रक्षा करता है।

यह स्तोत्र न केवल शारीरिक सुरक्षा प्रदान करता है, बल्कि मानसिक शांति और आध्यात्मिक बल भी प्रदान करता है। धर्म शास्त्रों में कहा गया है कि दुर्गा सप्तशती का नियमित पाठ करने से भक्त भय, नकारात्मकता, शत्रु और रोग से मुक्त होते हैं। यह आरोग्य, समृद्धि, मनोकामनाओं की पूर्ति, सुख-शांति और मोक्ष प्रदान करने वाला माना जाता है।

दुर्गा सप्तशती के कवच में बताया गया है कि देवी के विभिन्न रूप भक्तों के अलग-अलग अंगों की रक्षा करते हैं। यह कवच साधक को सभी प्रकार के भय से मुक्त रखता है और सभी रोगों का नाश करता है। सच्चे मन से पाठ करने वाले को हर संकट से सुरक्षा मिलती है। नवरात्रि में सुबह या शाम इस कवच का पाठ करने से घर-परिवार में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

कवच में कहा गया है कि चामुंडा देवी सिर की रक्षा करती हैं, माता शैलजा आंखों की, विशालाक्षी कानों की सुरक्षा करती हैं। माहेश्वरी नाक, महाकाली मुंह की, सरस्वती जीभ की और वाराही देवी गर्दन की रक्षा करती हैं। अंबिका हृदय की रक्षा करती हैं और कौमारी भुजाओं की, चंडिका हाथों की, नारायणी उदर (पेट) की रक्षा करती हैं और माहेश्वरी कमर की सुरक्षा करती हैं।

देवी महालक्ष्मी जांघों की रक्षा, भैरवी घुटनों की सुरक्षा करती हैं, महाकाली पिंडलियों (जांघों के पीछे) की रक्षा करती हैं, जबकि ब्रह्मांड की देवी (दुर्गा) पैरों और संपूर्ण शरीर की रक्षा करती हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

जहां भक्त माता दुर्गा की आराधना करते हैं। इस दौरान दुर्गा कवच का पाठ करना न केवल सुरक्षा का प्रतीक है, बल्कि यह मानसिक और आध्यात्मिक बल भी प्रदान करता है।
RashtraPress
14 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नवरात्रि के दौरान क्या करना चाहिए?
नवरात्रि के दौरान व्रत रखकर माता दुर्गा की आराधना और दुर्गा कवच का पाठ करना चाहिए।
दुर्गा के कौन से रूप किस अंग की रक्षा करते हैं?
दुर्गा के विभिन्न रूप जैसे चामुंडा, शैलजा, माहेश्वरी आदि विभिन्न अंगों की रक्षा करते हैं।
दुर्गा सप्तशती का पाठ क्यों महत्वपूर्ण है?
दुर्गा सप्तशती का पाठ भय, नकारात्मकता, शत्रु और रोग से मुक्ति प्रदान करता है।
कवच का पाठ करने का सही समय क्या है?
कवच का पाठ सुबह या शाम को करना सर्वोत्तम माना जाता है।
राष्ट्र प्रेस
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