नवरात्र विशेष: इस अद्भुत 'दौना' तुलसी के अर्पण से माँ दुर्गा होंगी खुश!
सारांश
Key Takeaways
- दौना तुलसी माँ दुर्गा को प्रिय है।
- इसकी सुगंध और औषधीय गुण अद्भुत हैं।
- घर में इसकी उगाई से सकारात्मक ऊर्जा आती है।
- यह स्वास्थ्य के लिए भी फायदेमंद है।
- नवरात्र में इसकी पूजा से लक्ष्मी की कृपा प्राप्त होती है।
नई दिल्ली, १८ मार्च (राष्ट्र प्रेस)। माँ दुर्गा की पूजा का पावन पर्व चैत्र नवरात्र १९ मार्च से आरम्भ हो रहा है। इस समय में देवी की पूजा में अनेक प्रकार के फूल और पत्तियाँ चढ़ाई जाती हैं। सामान्यतः तुलसी को देवी के समक्ष अर्पित नहीं किया जाता है, परंतु एक विशेष प्रकार की तुलसी है, जिसे दौना कहा जाता है और यह भगवती को अत्यंत प्रिय मानी जाती है। इसे दवना, मरुआ या वन तुलसी भी कहा जाता है।
देवी की पूजा में सामान्य तुलसी का प्रयोग वर्जित है, लेकिन दौना की पत्तियाँ और फूल माँ दुर्गा को विशेष रूप से पसंद हैं। नवरात्र के दौरान इसे अर्पित करने से माँ प्रसन्न होती हैं और घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। दौना एक छोटा, सुगंधित औषधीय पौधा है, जिसकी ऊँचाई १-२ फुट होती है। इसके पत्ते गुलदाउदी के समान कटावदार और तीव्र, मनमोहक सुगंधित होते हैं। यह सुगंध इतनी आकर्षक होती है कि यह ब्रांडेड परफ्यूम को भी मात दे सकती है।
धार्मिक परंपरा के अनुसार, दौना भगवान विष्णु और माँ लक्ष्मी के लिए भी प्रिय है, लेकिन विशेषकर नवरात्र में इसे माँ दुर्गा को अर्पित करने की परंपरा है। वास्तुशास्त्र के अनुसार, घर में दौना का पौधा लगाने से लक्ष्मी की कृपा बनी रहती है, वातावरण शुद्ध होता है और परिवार में सुख-समृद्धि आती है।
यह न केवल पूजा को पूर्णता देता है, बल्कि घर को सुगंधित भी करता है और स्वास्थ्य लाभ भी प्रदान करता है। यह पौधा आसानी से घर में उगाया जा सकता है और यह छोटे आकार के बावजूद अद्भुत प्रभाव वाला है।
दौना के औषधीय गुण भी अद्भुत हैं। आयुर्वेद में इसे कफ, वात, कृमि रोग, विष, सूजन, जोड़ों के दर्द, सर्दी-खांसी, जुकाम, पुराना बुखार, गर्भाशय दर्द और पेट की समस्याओं में बहुत लाभकारी माना गया है। यह पित्तवर्धक, दर्द निवारक और घाव भरने में भी सहायक है। पत्तियाँ, बीज, डंठल और जड़ सभी औषधीय रूप से उपयोगी होते हैं।
अमेरिका की नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन के अनुसार, शोधकर्ताओं ने कई अध्ययनों का विश्लेषण किया और देखा कि तुलसी का सेवन डायबिटीज, हृदय रोग, तनाव और मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में मदद करता है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि किसी भी अध्ययन में तुलसी के सेवन से गंभीर नुकसान नहीं देखा गया।
विशेष रूप से वन तुलसी एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर होती है, जो शरीर को फ्री रेडिकल्स से बचाती है। औषधीय गुणों से परिपूर्ण वन तुलसी को आयुर्वेद में महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है और इसका उपयोग टॉनिक के रूप में किया जाता है, जो शरीर की ऊर्जा और जीवन शक्ति बढ़ाने में मददगार है।
वन तुलसी की सुगंध भी तीव्र होती है, जो प्राकृतिक रूप से मच्छरों को भगाने का कार्य करती है और हवा को शुद्ध रखती है। वन तुलसी के सेवन से कई स्वास्थ्य लाभ मिलते हैं। यह श्वसन तंत्र को मजबूत बनाती है, बलगम को निकालने में सहायता करती है और अस्थमा, ब्रोंकाइटिस, खांसी जैसी सांस की समस्याओं में राहत प्रदान करती है। इसमें एंटीऑक्सीडेंट और एंटी-माइक्रोबियल गुण होते हैं, जिससे संक्रमण से लड़ने की क्षमता बढ़ती है। तनाव को कम कर मानसिक स्वास्थ्य में सुधार लाने में सहायक होती है। यह दिल को स्वस्थ रखने और सूजन को कम करने में भी मदद करती है।