चैत्र नवरात्र में दूब घास का महत्व: पूजा से लेकर औषधीय लाभ तक
सारांश
Key Takeaways
- दूब घास का महत्व आध्यात्मिक और औषधीय दोनों है।
- यह रक्त रोकने और घाव भरने में सहायता करती है।
- आंतरिक उपयोग से पेट संबंधी समस्याओं में राहत मिलती है।
नई दिल्ली, 21 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। चैत्र नवरात्र के दौरान दूब घास का महत्व अत्यधिक बढ़ जाता है, क्योंकि मां जगदम्बा की पूजा में इसका होना आवश्यक है। मां को इस पावन पर्व पर दूब घास अर्पित की जाती है। कन्या पूजन के समय भी दूब घास का उपयोग पैर छूने के लिए किया जाता है। जबकि लोग दूब घास के आध्यात्मिक महत्व को समझते हैं, क्या आप जानते हैं कि यह शरीर को आंतरिक और बाहरी पोषण प्रदान करती है?
आयुर्वेद में दूब घास को 'अमृता' के नाम से जाना जाता है। इसके गुण न केवल मनुष्यों के लिए, बल्कि कई पशुओं के लिए भी लाभकारी हैं। दूब घास को कफ और वात को संतुलित करने वाली औषधि माना गया है। यदि आपके शरीर में वात और कफ असंतुलित हैं, तो इसका सेवन उन दोषों को संतुलित कर सकता है, लेकिन इसके उपयोग से पहले इसके आंतरिक और बाहरी लाभों को जानना अनिवार्य है।
अब बात करते हैं इसके बाहरी उपयोग की। दूब घास में रक्त को रोकने की अद्भुत क्षमता होती है। यदि आपको चोट लगने पर रक्त बह रहा है या पुराने घाव से खून आता है, तो आप दूब घास का लेप कर सकते हैं। यह न केवल रक्त को रोकने में सहायक है, बल्कि घाव को भरने और संक्रमण से बचाने में भी मदद करता है। गर्मियों में, नाक से खून आने और सिरदर्द की समस्या आम होती है। ऐसे में दूब का रस नाक में डालने से राहत मिलती है। आप मुल्तानी मिट्टी को भिगोकर इसे सूंघ भी सकते हैं। इसके अलावा, गर्मियों में यदि आपकी त्वचा जल जाती है, तो दूब का लेप भी उपयोगी होता है।
अब इसके आंतरिक उपयोग की बात करते हैं। दूब घास का सेवन पेट संबंधी समस्याओं और मासिक धर्म के दर्द के लिए किया जा सकता है। इसके लिए, डॉक्टरी सलाह के बाद ही दूब के रस का सेवन करें।