चैत्र नवरात्रि का दूसरा दिन: ब्रह्मचारिणी पूजा और शुभ मुहूर्त का संयोग
सारांश
Key Takeaways
- ब्रह्मचारिणी की पूजा का विशेष महत्व है।
- सर्वार्थ सिद्धि योग में कार्य सफल होते हैं।
- राहुकाल में नया कार्य न करें।
- विशेष मुहूर्त का ध्यान रखें।
- पूजा में सफेद वस्त्र और सफेद मिठाई अर्पित करें।
नई दिल्ली, 19 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। चैत्र नवरात्रि के दूसरे दिन, शुक्रवार को मां दुर्गा के दूसरे स्वरूप ब्रह्मचारिणी की पूजा का आयोजन किया जाएगा। ब्रह्मचारिणी की आराधना से तप, संयम, ज्ञान और वैराग्य की प्राप्ति होती है। मां को सफेद वस्त्र, चंदन, फूल और सफेद मिठाई अर्पित करने का विशेष महत्व है। इस दिन का खास महत्व इसलिए भी है क्योंकि पूरे दिन सर्वार्थ सिद्धि योग का संयोग बना हुआ है।
सर्वार्थ सिद्धि के साथ अमृत सिद्धि योग भी बन रहा है, जो शुक्रवार सुबह 6:25 बजे से लेकर देर रात 2:27 बजे तक रहेगा। साथ ही, शनिवार दोपहर 2:30 बजे से 3:18 बजे तक विजय मुहूर्त का समय है, जो नए कार्य, पूजा और मंत्र जाप के लिए शुभ माना जाता है।
19 मार्च को सूर्योदय सुबह 6:25 बजे और सूर्यास्त शाम 6:32 बजे होगा। वहीं, चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि पूरे दिन बनी रहेगी और अगले दिन यानी 21 मार्च की देर रात 2:30 बजे तक रहेगी। नक्षत्र रेवती भी अगले दिन देर रात 2:27 बजे तक रहेगा, इसके बाद अश्विनीयोग ब्रह्म रात 10:15 बजे तक रहेगा। करण बालव दोपहर 3:43 बजे तक रहेगा।
धार्मिक मान्यता के अनुसार, सर्वार्थ सिद्धि योग में आरंभ किए गए कार्य सफल होते हैं और राहुकाल में कोई भी नया कार्य या पूजा करना निष्फल होता है। दृक पंचांग के अनुसार, नवरात्रि के दूसरे दिन शुभ मुहूर्त में ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4:50 बजे से 5:38 बजे तक और अभिजित मुहूर्त दोपहर 12:05 बजे से 12:53 बजे तक रहेगा।
विजय मुहूर्त दोपहर 2:30 बजे से 3:18 बजे तक और गोधूलि मुहूर्त शाम 6:30 बजे से 6:54 बजे तक रहेगा। अमृत काल रात 12:13 बजे से 1:43 बजे तक रहेगा। वहीं, निशिता मुहूर्त रात 12:04 बजे से 12:52 बजे तक है।
अशुभ समय का ध्यान रखना आवश्यक है। शुक्रवार को राहुकाल सुबह 10:58 बजे से 12:29 बजे तक और यमगंड दोपहर 3:30 बजे से 5:01 बजे तक रहेगा। गुलिक काल सुबह 7:56 बजे से 9:27 बजे तक और वर्ज्य काल दोपहर 3:16 बजे से 4:46 बजे तक रहेगा। इस दौरान कोई भी नया या शुभ कार्य नहीं करना चाहिए।