8 अगस्त 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

क्या गुप्त नवरात्रि के दूसरे दिन द्विपुष्कर योग है? जानें शुभ-अशुभ समय

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
क्या गुप्त नवरात्रि के दूसरे दिन द्विपुष्कर योग है? जानें शुभ-अशुभ समय

सारांश

गुप्त नवरात्रि के दूसरे दिन द्विपुष्कर योग का विशेष महत्व है। इस समय मां दुर्गा की गुप्त साधना की जाती है। जानिए इस दिन के शुभ और अशुभ समय के बारे में, ताकि आप अपने कार्यों को सही समय पर कर सकें।

मुख्य बातें

गुप्त नवरात्रि का विशेष महत्व है।
द्विपुष्कर योग में किए गए कार्यों का फल बढ़ता है।
शुभ मुहूर्त का ध्यान रखें।
अशुभ समय में कार्य न करें।
मां दुर्गा की गुप्त साधना करें।

नई दिल्ली, 19 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। सनातन धर्म में नवरात्रि के साथ-साथ गुप्त नवरात्रि का भी विशेष महत्व है। मंगलवार को गुप्त नवरात्रि का दूसरा दिन है और इस दिन द्विपुष्कर योग बन रहा है। यह दिन मां दुर्गा की गुप्त साधना के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।

गुप्त नवरात्रि सामान्य नवरात्रि की तुलना में अधिक गोपनीय होती है। इस दौरान साधक विशेष सिद्धियां प्राप्त करने के लिए मां दुर्गा की गुप्त रूप से आराधना करते हैं। गुप्त नवरात्रि में की गई साधना के परिणाम काफी शक्तिशाली माने जाते हैं।

सनातन धर्म में पंचांग का विशेष महत्व है, क्योंकि इसके सभी अंग – तिथि, नक्षत्र, योग, करण और वार किसी भी कार्य की शुभता को निर्धारित करते हैं। दृक पंचांग के अनुसार 20 जनवरी को शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि है, जो 21 जनवरी की सुबह 2 बजकर 42 मिनट तक रहेगी। श्रवण नक्षत्र दोपहर 1 बजकर 6 मिनट तक रहेगा, इसके बाद धनिष्ठा नक्षत्र प्रारंभ होगा। योग की बात करें तो सिद्धि शाम 8 बजकर 1 मिनट तक चलेगा। करण बालव है, जो दोपहर 2 बजकर 31 मिनट तक रहेगा और फिर कौलव करण प्रारंभ होगा।

मंगलवार को चंद्रमा मकर राशि में संचरण करेंगे। सूर्योदय 7 बजकर 14 मिनट पर और सूर्यास्त शाम 5 बजकर 50 मिनट पर होगा। इस दिन द्विपुष्कर योग दोपहर 1 बजकर 6 मिनट से 21 जनवरी की सुबह 2 बजकर 42 मिनट तक रहेगा। द्विपुष्कर योग में किए गए शुभ कार्यों, पूजा-पाठ, व्रत या अन्य मंगल कार्यों के फल कई गुना बढ़ जाते हैं।

शुभ मुहूर्त देखें तो ब्रह्म मुहूर्त 5 बजकर 27 मिनट से 6 बजकर 21 मिनट तक, अभिजित मुहूर्त 12 बजकर 11 मिनट से 12 बजकर 53 मिनट तक रहेगा। इसके अलावा, विजय मुहूर्त और गोधूलि मुहूर्त का भी संयोग बन रहा है। इन समयों में पूजा या शुभ कार्य करना विशेष फलदायी होता है।

किसी भी नए और शुभ काम करने के लिए अशुभ समय या राहुकाल का विचार महत्वपूर्ण है। राहुकाल दोपहर 3 बजकर 11 मिनट से 4 बजकर 31 मिनट तक रहेगा। इस दौरान कोई शुभ कार्य शुरू नहीं करना चाहिए। अन्य अशुभ काल में यमगंड 9 बजकर 53 मिनट से 11 बजकर 13 मिनट और गुलिक काल 12 बजकर 32 मिनट से 1 बजकर 52 मिनट तक रहेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो उन्हें जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में सफलता दिला सकती हैं।
RashtraPress
8 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

गुप्त नवरात्रि और सामान्य नवरात्रि में क्या अंतर है?
गुप्त नवरात्रि सामान्य नवरात्रि की तुलना में अधिक गोपनीय होती है, जहां साधक गुप्त रूप से साधना करते हैं।
द्विपुष्कर योग क्या है?
द्विपुष्कर योग एक विशेष योग है, जिसमें किए गए कार्यों का फल कई गुना बढ़ जाता है।
इस दिन के शुभ मुहूर्त क्या हैं?
ब्रह्म मुहूर्त 5:27 से 6:21, अभिजित मुहूर्त 12:11 से 12:53 तक है।
राहुकाल का समय क्या है?
राहुकाल दोपहर 3:11 से 4:31 तक रहेगा।
गुप्त नवरात्रि में साधना का महत्व क्या है?
गुप्त नवरात्रि में की गई साधना के परिणाम अधिक शक्तिशाली माने जाते हैं।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 4 महीने पहले
  2. 4 महीने पहले
  3. 6 महीने पहले
  4. 6 महीने पहले
  5. 6 महीने पहले
  6. 6 महीने पहले
  7. 10 महीने पहले
  8. 1 साल पहले