नवरात्र की अष्टमी पर सर्वार्थ सिद्धि और रवि योग का अद्भुत संयोग
सारांश
Key Takeaways
- नवरात्र की अष्टमी २६ मार्च को है।
- इस दिन मां महागौरी की पूजा की जाती है।
- सर्वार्थ सिद्धि योग और रवि योग का संयोग विशेष महत्व रखता है।
- अशुभ समय से बचना चाहिए।
- धार्मिक शास्त्रों के अनुसार यह दिन शुभ कार्यों के लिए उपयुक्त है।
नई दिल्ली, २५ मार्च (राष्ट्र प्रेस)। चैत्र नवरात्र के अष्टमी तिथि का आयोजन २६ मार्च को होगा। इस पावन दिन पर मां महागौरी की आराधना की जाती है। इसके साथ-साथ अशोक अष्टमी व्रत और मासिक दुर्गाष्टमी भी मनाई जाएगी। इस दिन सर्वार्थ सिद्धि योग और रवि योग का अनूठा संयोग बन रहा है, जो सभी शुभ कार्यों के लिए अत्यंत उपयुक्त माना जाता है।
अष्टमी तिथि पर मां महागौरी की पूजा से भक्तों को शक्ति, सौभाग्य और सुख की प्राप्ति होती है।
दृक पंचांग के अनुसार, गुरुवार को सूर्योदय ६ बजकर १८ मिनट पर और सूर्यास्त शाम ६ बजकर ३६ मिनट पर होगा। अष्टमी तिथि सुबह ११ बजकर ४८ मिनट तक है। उदयातिथि के अनुसार, पूरे दिन अष्टमी का महत्व रहेगा। नक्षत्र आर्द्रा शाम ४ बजकर १९ मिनट तक रहेगा।
धर्मशास्त्र के अनुसार, शुभ कार्य सर्वार्थ सिद्धि योग, अमृत काल या अभिजित मुहूर्त में करना बहुत ही शुभ होता है। वहीं, राहुकाल और दुर्मुहूर्त के दौरान किसी भी शुभ कार्य से बचना चाहिए।
गुरुवार को ब्रह्म मुहूर्त सुबह ४ बजकर ४५ मिनट से ५ बजकर ३१ मिनट तक, अभिजित मुहूर्त दोपहर १२ बजकर २ मिनट से १२ बजकर ५२ मिनट तक, विजय मुहूर्त दोपहर २ बजकर ३० मिनट से ३ बजकर १९ मिनट तक रहेगा। गोधूलि मुहूर्त ६ बजकर ३४ मिनट शाम से ६ बजकर ५८ मिनट तक, अमृत काल सुबह ६ बजकर ५० मिनट से ८ बजकर २१ मिनट तक और सर्वार्थ सिद्धि योग शाम ४ बजकर १९ मिनट से अगले दिन सुबह ६ बजकर १७ मिनट तक रहेगा। साथ ही, रवि योग शाम ४ बजकर १९ मिनट से अगले दिन सुबह ६ बजकर १७ मिनट तक रहेगा।
अशुभ समय की बात करें तो २६ मार्च को राहुकाल दोपहर १ बजकर ५९ मिनट से ३ बजकर ३१ मिनट तक, यमगंड सुबह ६ बजकर १८ मिनट से ७ बजकर ५० मिनट तक, गुलिक काल सुबह ९ बजकर २३ मिनट से १० बजकर ५५ मिनट तक रहेगा। वहीं, दुर्मुहूर्त सुबह १० बजकर २४ मिनट से ११ बजकर १३ मिनट तक रहेगा।