क्या गुप्त नवरात्रि के नवमी पर सर्वार्थ सिद्धि योग का अद्भुत संयोग है?

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क्या गुप्त नवरात्रि के नवमी पर सर्वार्थ सिद्धि योग का अद्भुत संयोग है?

सारांश

गुप्त नवरात्रि के नवमी पर सर्वार्थ सिद्धि योग का अद्भुत संयोग इस दिन साधकों के लिए विशेष महत्व रखता है। जानें इस दिन के शुभ मुहूर्त और राहुकाल के समय के बारे में।

मुख्य बातें

गुप्त नवरात्रि के नवमी पर सर्वार्थ सिद्धि योग का महत्व।
विशेष मुहूर्त और उपायों की जानकारी।
दीपोत्सव कार्तिगाई दीपम का पर्व भी है।

नई दिल्ली, 26 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। सनातन धर्म में किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत से पहले पंचांग का ध्यान रखना बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। माघ मास की शुक्ल पक्ष नवमी तिथि इस बार विशेष महत्व रखती है, क्योंकि यह गुप्त नवरात्रि का नौवां दिन है और साथ ही इस दिन सर्वार्थ सिद्धि योग का संयोग भी है।

गुप्त नवरात्रि के दौरान साधक गुप्त रूप से मां दुर्गा की आराधना करते हैं और यह नवरात्रि सामान्य नवरात्रि की अपेक्षा अधिक गहन साधना के लिए जानी जाती है। दृक पंचांग के अनुसार, 27 जनवरी को मंगलवार, नवमी तिथि शाम 7 बजकर 5 मिनट तक रहेगी। इस दिन सर्वार्थ सिद्धि योग का शुभ संयोग सुबह 11 बजकर 8 मिनट से शुरू होकर अगले दिन यानी 28 जनवरी की सुबह 7 बजकर 11 मिनट तक रहेगा।

सर्वार्थ सिद्धि योग सभी प्रकार के कार्यों में सफलता दिलाने वाला माना जाता है। गुप्त नवरात्रि के इस अंतिम दिन पर यह योग मां दुर्गा की कृपा प्राप्त करने और किसी भी पूजा-पाठ, जप, हवन या नए कार्य की शुरुआत के लिए बेहद अनुकूल है। साधक इस दौरान मंत्र जाप, दुर्गा सप्तशती पाठ या विशेष अनुष्ठान करते हैं। मंगलवार को चंद्रमा मेष राशि में गोचर करेंगे।

नक्षत्र की बात करें तो भरणी नक्षत्र सुबह 11 बजकर 8 मिनट तक रहेगा, उसके बाद कृत्तिका नक्षत्र शुरू होगा। सूर्योदय 7 बजकर 12 मिनट और सूर्यास्त शाम 5 बजकर 56 मिनट पर होगा।

शुभ मुहूर्त की बात करें तो ब्रह्म मुहूर्त सुबह 5 बजकर 26 मिनट से 6 बजकर 19 मिनट तक, अभिजित मुहूर्त दोपहर 12 बजकर 13 मिनट से 12 बजकर 55 मिनट तक, विजय मुहूर्त दोपहर 2 बजकर 21 मिनट से 3 बजकर 4 मिनट तक रहेगा। वहीं, अशुभ समय से बचना भी जरूरी है। राहुकाल दोपहर 3 बजकर 15 मिनट से 4 बजकर 36 मिनट तक रहेगा। यमगंड सुबह 9 बजकर 53 मिनट से 11 बजकर 13 मिनट तक और गुलिक काल दोपहर 12 बजकर 34 मिनट से 1 बजकर 55 मिनट तक रहेगा। इस दौरान कोई भी नया या शुभ कार्य नहीं करना चाहिए।

27 जनवरी को दक्षिण भारत में मनाए जाने वाला पर्व कार्तिगाई दीपम भी है। यह तमिल संस्कृति के सबसे पुराने उत्सवों में से एक माना जाता है। इस दिन शाम को घरों, मंदिरों और गलियों में तेल के दीपक जलाए जाते हैं। पर्व को 'कार्तिगाई दीपम' या 'कार्तिकाई दीपम' दोनों नाम से जाना जाता है। जिस दिन कृत्तिका नक्षत्र का प्रभाव सबसे अधिक होता है, उसी दिन यह दीपोत्सव मनाया जाता है।

पौराणिक कथा के अनुसार, इस दिन भगवान शिव ने अपनी श्रेष्ठता दिखाने के लिए स्वयं को प्रकाश की ज्योति में परिवर्तित कर दिया था। इससे भगवान विष्णु और ब्रह्मा को अपनी सीमा का बोध हुआ था। इसलिए कार्तिगाई दीपम भगवान शिव की महिमा और प्रकाश के प्रतीक के रूप में मनाया जाता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

गुप्त नवरात्रि क्या है?
गुप्त नवरात्रि एक विशेष नवरात्रि है जिसमें साधक गुप्त रूप से मां दुर्गा की आराधना करते हैं।
सर्वार्थ सिद्धि योग का क्या महत्व है?
सर्वार्थ सिद्धि योग सभी प्रकार के कार्यों में सफलता दिलाने वाला योग है।
राहुकाल का समय कब है?
राहुकाल 27 जनवरी को दोपहर 3 बजकर 15 मिनट से 4 बजकर 36 मिनट तक रहेगा।
राष्ट्र प्रेस
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