अकाली दल भाजपा का प्रवक्ता बन गया है: पंजाब वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा का हमला
सारांश
मुख्य बातें
पंजाब के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने बुधवार, 12 अगस्त को चंडीगढ़ में मीडिया से बात करते हुए शिरोमणि अकाली दल (शिअद) पर तीखा हमला बोला और आरोप लगाया कि अकाली दल अब स्वतंत्र राजनीतिक दल की तरह नहीं, बल्कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) के प्रवक्ता की तरह काम कर रहा है। उनके अनुसार, शिअद ने अपने बुनियादी सिद्धांत पूरी तरह त्याग दिए हैं।
ईडी पत्र विवाद पर चीमा का पलटवार
चीमा ने कहा कि प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा डीजीपी को भेजे गए एक पत्र को शिअद आम आदमी पार्टी (AAP) को बदनाम करने के हथियार के रूप में इस्तेमाल कर रहा है। उन्होंने इसे 'हैरानी की बात' बताते हुए कहा कि यह रवैया साफ दर्शाता है कि शिअद केंद्रीय जांच एजेंसियों की आवाज़ बन चुका है। उनके शब्दों में, 'चिट्टा पार्टी' (शिअद) अब 'ईडी पार्टी' (BJP) की सहयोगी शाखा के रूप में काम कर रही है।
2007–2017 के शासन पर सीधा हमला
चीमा ने जनता को 2007 से 2017 के शिअद-BJP शासनकाल की याद दिलाई और इस दौर को पंजाब के सामाजिक ताने-बाने, अर्थव्यवस्था और युवाओं के लिए विनाशकारी करार दिया। उन्होंने कहा कि पंजाब के लोग बड़े पैमाने पर फैली नशे की समस्या, श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी की बेअदबी और व्यापक भ्रष्टाचार को नहीं भूले हैं — जिसके चलते राज्य को 'उड़ता पंजाब' जैसी दर्दनाक पहचान मिली थी।
उन्होंने आरोप लगाया कि उस दौर में माता-पिता को अपनी ज़मीन, घर और जीवन भर की कमाई बेचनी पड़ी, सिर्फ इसलिए कि वे अपने बच्चों को सरकार-पोषित ड्रग माफिया के चंगुल से बचाने के लिए विदेश भेज सकें।
केंद्रीय एजेंसियों के दुरुपयोग का आरोप
आम आदमी पार्टी (AAP) नेता चीमा ने BJP नेतृत्व वाली केंद्र सरकार पर डॉ. बी.आर. अंबेडकर द्वारा निर्मित संविधान को सुनियोजित ढंग से कमज़ोर करने का आरोप लगाया। उनका कहना था कि ED, CBI और आयकर विभाग जैसी केंद्रीय एजेंसियों का उपयोग लगातार विपक्षी नेताओं को डराने, स्थानीय प्रशासन को धमकाने और चुनी हुई राज्य सरकारों को अस्थिर करने के लिए किया जाता है।
उन्होंने पश्चिम बंगाल और बिहार का उदाहरण देते हुए कहा कि AAP नेतृत्व को भी इसी तरह निशाना बनाया गया। चीमा के अनुसार, जब भी चुनाव नज़दीक आते हैं या कोई विपक्षी सरकार मज़बूती से खड़ी होती है, तो इन एजेंसियों की मशीनरी सक्रिय हो जाती है।
राजनीतिक संदर्भ और आगे की दिशा
यह बयान ऐसे समय में आया है जब पंजाब में AAP सरकार और केंद्र के बीच तनाव बढ़ रहा है, और शिअद अपनी राजनीतिक प्रासंगिकता पुनः स्थापित करने की कोशिश में है। गौरतलब है कि 2022 के विधानसभा चुनाव में शिअद को ऐतिहासिक हार का सामना करना पड़ा था। आलोचकों का कहना है कि शिअद का यह रुख उसे पंजाब के मतदाताओं से और दूर कर सकता है।