केजरीवाल की विभाजनकारी राजनीति पंजाब में नहीं चलेगी: SAD नेता दलजीत सिंह चीमा
सारांश
मुख्य बातें
शिरोमणि अकाली दल (SAD) के वरिष्ठ नेता दलजीत सिंह चीमा ने 9 जून 2026 को चंडीगढ़ में आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल के उस एक्स पोस्ट को बेबुनियाद करार दिया, जिसमें केजरीवाल ने दावा किया था कि प्रवर्तन निदेशालय (ED) हिंदू व्यापारियों को निशाना बना रहा है। चीमा ने कहा कि धर्म की आड़ में भ्रष्टाचार को छुपाने की कोशिश पंजाब की जनता पर नहीं चलेगी।
केजरीवाल के एक्स पोस्ट पर चीमा का पलटवार
दलजीत सिंह चीमा ने कहा कि अरविंद केजरीवाल ने भ्रष्टाचार उन्मूलन के संकल्प के साथ राजनीति में कदम रखा था, लेकिन आज उनके अपने मंत्रियों के ठिकानों पर छापेमारी हो रही है। उन्होंने मनीष सिसोदिया और सत्येंद्र जैन के यहाँ हुई छापेमारी का हवाला देते हुए कहा कि केजरीवाल के आवास पर भी जाँच एजेंसियाँ पहुँच चुकी हैं।
चीमा ने खरड़ में हुई हालिया छापेमारी का विशेष उल्लेख किया, जिसमें कथित तौर पर ₹22 लाख छत से नीचे फेंके गए थे और AAP के राज्य अध्यक्ष का नाम भी सामने आया था। उन्होंने कहा कि इस मामले में केजरीवाल को खुद सामने आकर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए थी।
धर्म के नाम पर राजनीति का विरोध
चीमा ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि कोई व्यक्ति गलत काम करते हुए पकड़ा जाता है — चाहे वह हिंदू हो, मुस्लिम, सिख या ईसाई — उसके विरुद्ध कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए। उनके अनुसार, अपने नेताओं को बचाने के लिए सांप्रदायिक कोण निकालना न केवल राजनीतिक रूप से कमज़ोर है, बल्कि पंजाब की परिपक्व जनता इसे समझती भी है। उन्होंने कहा, 'विभाजनकारी राजनीति पंजाब में काम नहीं आने वाली।'
केंद्र सरकार के 12 वर्षों का मूल्यांकन
केंद्र सरकार के 12 वर्ष पूरे होने पर चीमा ने संतुलित प्रतिक्रिया दी। उन्होंने स्वीकार किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यकाल में सुरक्षा क्षेत्र में देश मज़बूत हुआ है और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की छवि में सकारात्मक बदलाव आया है। लेकिन साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि इन वर्षों में संवैधानिक संस्थाओं को दबाने के आरोप भी लगे हैं, जिन्हें नकारा नहीं जा सकता।
चीमा ने चुनाव आयोग और केंद्रीय जाँच एजेंसियों पर लगे आरोपों को गंभीर बताते हुए कहा कि इस दिशा में एक स्पष्ट रूपरेखा बनाकर उसे ज़मीन पर उतारने की ज़रूरत है।
किसान और बेरोज़गारी: अनसुलझे सवाल
चीमा ने मोदी सरकार से किसानों की न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) की लंबित माँग पर ध्यान देने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि कृषि क्षेत्र की अनदेखी नहीं की जा सकती। इसके अलावा, उन्होंने बेरोज़गारी को एक गंभीर चुनौती बताते हुए कहा कि देश के युवा विदेशों में रोज़गार तलाशने जा रहे हैं, लेकिन वहाँ भी उन्हें निराशा हाथ लग रही है और वे खाली हाथ लौट रहे हैं। यह स्थिति नीति-निर्माताओं के लिए गहरी चिंता का विषय होनी चाहिए।