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काशी तमिल संगमम 5.0: 28 नवंबर से 12 दिसंबर तक, 1,400 प्रतिभागी और 1,000 संस्थान जुड़ेंगे

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काशी तमिल संगमम 5.0: 28 नवंबर से 12 दिसंबर तक, 1,400 प्रतिभागी और 1,000 संस्थान जुड़ेंगे

सारांश

काशी तमिल संगमम का पाँचवाँ संस्करण 28 नवंबर से शुरू होगा — इस बार थीम है 'तिरुक्कुरल पढ़ें और समझें'। 1,400 प्रतिभागी, 1,000 संस्थान और वाराणसी-प्रयागराज-अयोध्या की यात्रा — यह आयोजन उत्तर-दक्षिण सांस्कृतिक सेतु को और मजबूत करने की कोशिश है।

मुख्य बातें

केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रल्हाद जोशी ने 22 अक्टूबर 2026 को काशी तमिल संगमम 5.0 के पंजीकरण पोर्टल का शुभारंभ किया।
आयोजन 28 नवंबर से 12 दिसंबर 2026 तक चलेगा; इस बार की थीम 'तिरुक्कुरल पढ़ें और समझें' है।
तमिलनाडु से लगभग 1,400 प्रतिभागी आएंगे जिन्हें 200-200 के सात समूहों में बाँटा जाएगा; प्रत्येक समूह की आठ दिवसीय यात्रा होगी।
यात्रा में वाराणसी , प्रयागराज और अयोध्या शामिल होंगे।
देशभर के 1,000 उच्च शिक्षण संस्थानों में विद्यार्थियों की भागीदारी के कार्यक्रम होंगे।
पहला संस्करण वर्ष 2022 में आयोजित हुआ था; IIT मद्रास , BHU और उत्तर प्रदेश सरकार प्रमुख सहयोगी हैं।

केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रल्हाद जोशी ने 22 अक्टूबर 2026 को काशी तमिल संगमम 5.0 के पंजीकरण पोर्टल का शुभारंभ किया। काशी और तमिलनाडु के सदियों पुराने सांस्कृतिक संबंधों को और गहरा करने वाला यह पाँचवाँ संस्करण 28 नवंबर से 12 दिसंबर 2026 तक आयोजित होगा। इस बार 1,000 उच्च शिक्षण संस्थानों में कार्यक्रम चलाए जाएंगे और तमिलनाडु से लगभग 1,400 प्रतिभागी इसमें भाग लेंगे।

इस बार की मुख्य विषयवस्तु

काशी तमिल संगमम 5.0 की केंद्रीय थीम 'तिरुक्कुरल पढ़ें और समझें' रखी गई है। तमिल भाषा के इस प्राचीन ग्रंथ में समाहित नैतिक और जीवन-मूल्यों को देश के युवाओं तथा विद्यार्थियों तक पहुँचाना इसका प्रमुख उद्देश्य है। शिक्षा मंत्रालय के अनुसार शैक्षणिक गतिविधियाँ, विभिन्न भाषाओं में अध्ययन सामग्री और व्यापक जनभागीदारी के ज़रिए यह प्रयास किया जाएगा कि तिरुक्कुरल की शिक्षाएँ केवल पाठ्यक्रम तक सीमित न रहें, बल्कि लोग उन्हें अपने दैनिक जीवन में भी अपनाएँ।

यात्रा की संरचना और प्रमुख गंतव्य

केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय के अनुसार, तमिलनाडु से आने वाले लगभग 1,400 प्रतिभागियों को 200-200 लोगों के सात समूहों में विभाजित किया जाएगा। प्रत्येक समूह आठ दिवसीय यात्रा करेगा — चार दिन यात्रा और चार दिन विभिन्न स्थलों के भ्रमण तथा निर्धारित कार्यक्रमों के लिए। इस दौरान प्रतिभागी वाराणसी, प्रयागराज और अयोध्या का दौरा करेंगे, जहाँ सांस्कृतिक, शैक्षणिक, विषय-आधारित और आध्यात्मिक गतिविधियाँ आयोजित होंगी।

शिक्षा मंत्री की प्रतिक्रिया

पंजीकरण पोर्टल के शुभारंभ पर प्रल्हाद जोशी ने कहा कि भारत में प्राचीन काल से ही सांस्कृतिक एकता की मजबूत परंपरा रही है। उन्होंने कहा, 'धार्मिक परंपराओं के तहत बड़ी संख्या में लोग काशी और रामेश्वरम की यात्रा करते रहे हैं — यह दोनों क्षेत्रों के बीच सदियों पुराने जुड़ाव को दर्शाता है।' उन्होंने बताया कि इस आयोजन के ज़रिए विद्यार्थियों, शिक्षकों, लेखकों, पेशेवरों, किसानों, कलाकारों, महिलाओं और आध्यात्मिक विद्वानों को एक मंच पर लाया जाएगा। जोशी ने यह भी जोड़ा कि यह आयोजन 'एक भारत, श्रेष्ठ भारत' की भावना को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

1,000 संस्थानों में विद्यार्थियों की भागीदारी

देशभर के 1,000 उच्च शिक्षण संस्थानों में विद्यार्थियों की भागीदारी से जुड़े कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इनका उद्देश्य अलग-अलग विषयों और भाषाई पृष्ठभूमि से आने वाले विद्यार्थियों के बीच तिरुक्कुरल की शिक्षाओं की समझ विकसित करना है। इन कार्यक्रमों में ग्रंथ का व्यवस्थित अध्ययन, शोध तथा विभिन्न शैक्षणिक गतिविधियाँ शामिल होंगी।

आयोजन की पृष्ठभूमि और भागीदार संस्थाएँ

काशी तमिल संगमम का पहला संस्करण वर्ष 2022 में आयोजित हुआ था। तब से चार संस्करणों के दौरान काशी और तमिलनाडु के बीच ज्ञान, भाषा, परंपराओं और जीवन-अनुभवों का आदान-प्रदान होता रहा है। इस आयोजन का संचालन केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय का उच्च शिक्षा विभाग करता है। इसमें IIT मद्रास, काशी हिंदू विश्वविद्यालय (BHU), चेन्नई स्थित शास्त्रीय तमिल केंद्रीय संस्थान, उत्तर प्रदेश सरकार और केंद्र सरकार के विभिन्न मंत्रालयों का सहयोग रहता है। गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब केंद्र सरकार राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत भारतीय भाषाओं और ज्ञान-परंपराओं को मुख्यधारा की शिक्षा से जोड़ने पर ज़ोर दे रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

फिर भी यह सवाल बना रहता है कि इस आयोजन का असर तात्कालिक उत्सव से आगे कितनी दूर तक जाता है। तिरुक्कुरल को थीम बनाना एक सोचा-समझा कदम है — यह ग्रंथ उत्तर और दक्षिण दोनों में समान रूप से आदर पाता है — लेकिन 1,000 संस्थानों में इसकी गहराई और गुणवत्ता सुनिश्चित करना असली परीक्षा होगी। यह आयोजन राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के उस लक्ष्य से सीधे जुड़ता है जो भारतीय भाषाओं और ज्ञान-परंपराओं को आधुनिक शिक्षा में केंद्रीय स्थान देना चाहता है। देखना यह होगा कि क्या यह सांस्कृतिक सेतु नीतिगत निरंतरता में तब्दील होता है, या प्रत्येक संस्करण एक नई शुरुआत बनकर रह जाता है।
RashtraPress
22 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

काशी तमिल संगमम 5.0 क्या है और यह कब होगा?
काशी तमिल संगमम 5.0 केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय द्वारा आयोजित वार्षिक सांस्कृतिक-शैक्षणिक कार्यक्रम है जो काशी और तमिलनाडु के बीच सदियों पुराने संबंधों को मजबूत करता है। इसका पाँचवाँ संस्करण 28 नवंबर से 12 दिसंबर 2026 तक चलेगा।
काशी तमिल संगमम 5.0 की थीम क्या है?
इस बार की मुख्य थीम 'तिरुक्कुरल पढ़ें और समझें' रखी गई है। इसका उद्देश्य तमिल भाषा के प्राचीन ग्रंथ तिरुक्कुरल में समाहित नैतिक और जीवन-मूल्यों को युवाओं और विद्यार्थियों तक पहुँचाना है।
काशी तमिल संगमम 5.0 में कितने लोग भाग लेंगे?
तमिलनाडु से लगभग 1,400 प्रतिभागी इसमें हिस्सा लेंगे। इन्हें 200-200 लोगों के सात समूहों में बाँटा जाएगा और प्रत्येक समूह आठ दिवसीय यात्रा करेगा जिसमें वाराणसी, प्रयागराज और अयोध्या शामिल हैं।
पंजीकरण पोर्टल का शुभारंभ किसने और कब किया?
केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रल्हाद जोशी ने 22 अक्टूबर 2026 को काशी तमिल संगमम 5.0 के पंजीकरण पोर्टल का शुभारंभ किया। उन्होंने इस अवसर पर काशी और रामेश्वरम के बीच सदियों पुराने धार्मिक-सांस्कृतिक जुड़ाव का उल्लेख किया।
काशी तमिल संगमम में कौन-से संस्थान सहयोग करते हैं?
इस आयोजन में IIT मद्रास, काशी हिंदू विश्वविद्यालय (BHU), चेन्नई स्थित शास्त्रीय तमिल केंद्रीय संस्थान, उत्तर प्रदेश सरकार और केंद्र सरकार के विभिन्न मंत्रालय सहयोग करते हैं। आयोजन का संचालन केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय का उच्च शिक्षा विभाग करता है।
राष्ट्र प्रेस
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