केरल चुनाव: जॉन ब्रिटास ने 9 अप्रैल को डाक कर्मचारियों के लिए सवैतनिक छुट्टी की मांग की

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केरल चुनाव: जॉन ब्रिटास ने 9 अप्रैल को डाक कर्मचारियों के लिए सवैतनिक छुट्टी की मांग की

सारांश

केरल के सांसद जॉन ब्रिटास ने केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया से विधानसभा चुनाव के दिन डाक कर्मचारियों के लिए सवैतनिक अवकाश का अनुरोध किया है। यह कदम कर्मचारियों के मतदान अधिकारों की रक्षा के लिए उठाया गया है।

Key Takeaways

  • जॉन ब्रिटास ने 9 अप्रैल को डाक कर्मचारियों के लिए सवैतनिक अवकाश की मांग की।
  • मतदान के अधिकार की सुरक्षा आवश्यक है।
  • अन्य राज्यों में भी डाक कर्मचारियों को छुट्टी दी जा रही है।
  • लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 अनिवार्यता को स्पष्ट करता है।
  • डाक कर्मचारियों के अधिकारों का सम्मान होना चाहिए।

नई दिल्ली, 5 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। केरल से राज्यसभा के सांसद जॉन ब्रिटास ने केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया से 9 अप्रैल को विधानसभा चुनाव के दौरान डाक कर्मचारियों को सवैतनिक अवकाश देने का आग्रह किया है।

ब्रिटास ने अपने पत्र में केंद्रीय मंत्री से अनुरोध किया है कि डाक कर्मचारियों को उनके मताधिकार का प्रयोग करने में सक्षम बनाने के लिए तत्काल हस्तक्षेप किया जाए।

उन्होंने केरल डाक सर्कल द्वारा जारी निर्देशों पर चिंता व्यक्त की है, जिसमें कहा गया है कि डाक कर्मचारियों को आवश्यक सेवाओं के अंतर्गत अनुपस्थित मतदाता (एवीई) माना गया है, और उन्हें बेहद सीमित समय में डाक मतपत्र का विकल्प चुनने का निर्देश दिया गया है।

ब्रिटास ने बताया कि 19 मार्च के परिपत्र में प्रपत्र 12डी को 20 मार्च तक एकत्र करने और संबंधित कलेक्ट्रेटों में 22 मार्च तक जमा करने का निर्देश दिया गया था, जबकि ये दोनों दिन छुट्टियों के थे। इससे अनुपालन में कठिनाई हुई और निर्देशों की मनमानी प्रकृति को लेकर चिंताएं बढ़ गईं।

उन्होंने जोर दिया कि लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 135बी के तहत मतदान के दिन कर्मचारियों को सवैतनिक अवकाश देना अनिवार्य है ताकि वे अपने मताधिकार का प्रयोग कर सकें।

ब्रिटास ने कहा कि यदि कुछ सेवाओं को आवश्यक माना जाता है, तो भी लंबे समय से चली आ रही प्रशासनिक प्रथा के अनुसार मतदान के दिन केवल न्यूनतम आवश्यक कार्य किए जाते हैं, और कर्मचारियों को व्यक्तिगत रूप से मतदान करने का अवसर दिया जाता है।

उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि असम समेत अन्य राज्यों में जहां चुनाव हो रहे हैं, वहां डाक कर्मचारियों को वैधानिक प्रावधानों के अनुसार मतदान के दिन छुट्टी दी जा रही है।

ब्रिटास ने कहा कि पिछले विधानसभा चुनावों में, डाक प्रतिष्ठानों ने केवल कुछ आवश्यक व्यवस्थाओं को छोड़कर मतदान के दिन छुट्टी का पालन किया था।

उन्होंने कहा कि वर्तमान विचलन कानून के प्रयोग में असंगति और कर्मचारियों के लोकतांत्रिक अधिकारों के अनावश्यक हनन को लेकर चिंता व्यक्त की।

ब्रिटास ने कहा कि मतदान का अधिकार भारत के लोकतांत्रिक ढांचे का मूल आधार है, और उन्होंने केंद्रीय मंत्री से इस मामले की तत्काल जांच करने और यह सुनिश्चित करने के लिए उचित निर्देश जारी करने का आग्रह किया कि केरल में डाक कर्मचारियों को मतदान के दिन वैधानिक सवैतनिक अवकाश दिया जाए, केवल उन सीमित आवश्यक व्यवस्थाओं के अधीन जो बिल्कुल अपरिहार्य हों।

Point of View

जॉन ब्रिटास का अनुरोध महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह डाक कर्मचारियों के लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा की दिशा में एक निर्णायक कदम है। अगर अन्य राज्यों में इस प्रकार की छुट्टियों की व्यवस्था हो सकती है, तो केरल में भी इसे लागू किया जाना चाहिए।
NationPress
09/04/2026

Frequently Asked Questions

जॉन ब्रिटास ने किससे अवकाश की मांग की?
जॉन ब्रिटास ने केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया से 9 अप्रैल को डाक कर्मचारियों के लिए सवैतनिक अवकाश की मांग की।
डाक कर्मचारियों को अवकाश क्यों चाहिए?
उन्हें अपने मताधिकार का प्रयोग करने के लिए मतदान के दिन सवैतनिक अवकाश की आवश्यकता है।
क्या अन्य राज्यों में भी ऐसा अवकाश दिया जाता है?
हां, असम समेत कई अन्य राज्यों में चुनाव के दिन डाक कर्मचारियों को वैधानिक अवकाश दिया जा रहा है।
लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 135बी का क्या महत्व है?
इस धारा के तहत मतदान के दिन कर्मचारियों को सवैतनिक अवकाश देना अनिवार्य है।
क्या केरल में पिछले चुनावों में ऐसा अवकाश दिया गया था?
हाँ, पिछले विधानसभा चुनावों में डाक कर्मचारियों ने केवल कुछ आवश्यक व्यवस्थाओं को छोड़कर मतदान के दिन छुट्टी का पालन किया था।
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