पश्चिम बंगाल में 200 से अधिक सीटें जीतकर सरकार बनाने का दावा: केशव मौर्य
सारांश
Key Takeaways
- भाजपा 200 से अधिक सीटें जीतने का आत्मविश्वास रखती है।
- ममता बनर्जी की सरकार को भाजपा द्वारा चुनौती दी जा रही है।
- एसआईआर प्रक्रिया को लेकर ममता के बयानों पर सवाल उठाए गए हैं।
- मुद्रा योजना ने स्वरोजगार को बढ़ावा दिया है।
- भाजपा की सरकार आने पर कानून व्यवस्था में सुधार का आश्वासन।
लखनऊ, 8 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनावों को लेकर एक बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि बंगाल में भाजपा 200 से अधिक सीटें जीतकर सरकार बनाएगी।
लखनऊ में पत्रकारों से बातचीत करते हुए उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि बंगाल में भाजपा के पक्ष में आंधी नहीं, तूफान चल रहा है। जनता ने पीएम मोदी पर भरोसा जताते हुए भाजपा और कमल के फूल को अपने दिल में जगह दी है। पिछले 25 वर्षों से कम्युनिस्टों ने बंगाल को लूटा और बर्बाद किया है। ममता बनर्जी के 15 वर्षों के शासन ने वहां त्राहिमाम मचा दिया है। टीएमसी अब घुसपैठियों और भ्रष्टाचारियों का एक संगठित गिरोह बन चुकी है। इस समय का माहौल भाजपा के पक्ष में है। 294 में से 200 से अधिक सीटें जीतकर भाजपा सरकार बनाएगी। 4 मई को ममता बनर्जी की विदाई निश्चित है।
एसआईआर के मुद्दे पर ममता बनर्जी के बयान पर पलटवार करते हुए उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि एसआईआर एक प्रक्रिया है। चुनाव आयोग एक संवैधानिक संस्था है और किसी भी अभियान के दौरान, यदि किसी नाम छूट जाता है, तो उसे शामिल करने के लिए समय दिया जाता है। एसआईआर पहले बार नहीं हो रहा है, चुनाव आयोग समय-समय पर इसे करता रहा है।
उन्होंने कहा कि एसआईआर पर सवाल उठाना ममता बनर्जी के डर को दर्शाता है जो चुनाव परिणाम के आने से पहले ही महसूस हो रहा है। ममता दीदी चुनाव परिणाम से पहले ही हार मान रही हैं। वोटर लिस्ट से घुसपैठियों के नाम काट दिए गए हैं, जिससे वह बौखला गई हैं। टीएमसी के शासन में बंगाल में कानून व्यवस्था ध्वस्त है। भाजपा की सरकार बनने के बाद वहां कानून का राज होगा।
मुद्रा योजना का जिक्र करते हुए उपमुख्यमंत्री ने कहा कि पीएम मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में ‘प्रधानमंत्री मुद्रा योजना’ के 11 वर्ष जन-जन के सपनों को साकार करने वाली एक परिवर्तनकारी यात्रा का प्रतीक हैं। उत्तर प्रदेश में भी ‘मुद्रा योजना’ ने स्वरोजगार को नई गति देकर जन-जन को आर्थिक सशक्तीकरण से जोड़ा है। यह पहल ‘विकसित भारत’ के संकल्प को साकार करने की प्रभावी शक्ति बन चुकी है।