क्या भारत के कोल्हापुरी चप्पलों के कारीगरी को मिलेगी वैश्विक पहचान? इटली की दिग्गज कंपनी प्राडा ने साइन किया एमओयू : पीयूष गोयल

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क्या भारत के कोल्हापुरी चप्पलों के कारीगरी को मिलेगी वैश्विक पहचान? इटली की दिग्गज कंपनी प्राडा ने साइन किया एमओयू : पीयूष गोयल

सारांश

इटली की दिग्गज फैशन कंपनी प्राडा ने भारत की दो सरकारी कंपनियों के साथ मिलकर कोल्हापुरी-स्टाइल सैंडल बनाने के लिए एक समझौता किया है। केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल की मानें तो इससे भारत के चप्पल उद्योग को वैश्विक पहचान मिलने की संभावना है। क्या कोल्हापुरी चप्पलें अब एक नया मुकाम पाने जा रही हैं?

Key Takeaways

  • भारत के कोल्हापुरी चप्पल का निर्यात १ अरब डॉलर तक बढ़ सकता है।
  • प्राडा के साथ समझौता भारतीय हस्तशिल्प को वैश्विक पहचान दिलाएगा।
  • स्थानीय कारीगरों को मिलेगी नई आर्थिक संभावनाएं।
  • प्राडा की चप्पलें फरवरी २०२६ में लॉन्च होंगी।
  • भारत और इटली के बीच साझेदारी और मजबूत होगी।

नई दिल्ली, १२ दिसंबर (राष्ट्र प्रेस)। केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने बताया कि अब कोल्हापुरी चप्पलों का निर्यात हर साल १ अरब डॉलर तक पहुँचने की संभावनाएं बढ़ गई हैं। यह अवसर इसलिए आया है क्योंकि इटली की प्रसिद्ध फैशन कंपनी प्राडा ने भारत की दो सरकारी कंपनियों के साथ मिलकर कोल्हापुरी-स्टाइल सैंडल बनाने के लिए एक समझौता (एमओयू) किया है।

गोयल ने कहा कि उन्हें बहुत खुशी हुई जब उन्हें पता चला कि प्राडा और भारत के कोल्हापुरी चप्पल बनाने वाले कारीगर एक साथ काम करने जा रहे हैं। उन्होंने उल्लेख किया कि वह अक्सर सोचते थे कि कोल्हापुरी चप्पलें, जो अपने खूबसूरत डिज़ाइन, हाथ से बनी कला, चमकीले रंग और पहनने में आरामदायक होती हैं, फिर भी एक बड़ा वैश्विक ब्रांड क्यों नहीं बन पातीं।

गोयल ने आगे कहा कि उन्हें खुशी है कि प्राडा ने इस कला को पहचाना और अब दुनियाभर में लोग कोल्हापुरी चप्पलों को एक नए रूप में देखेंगे। उनका सपना है कि भारत से कोल्हापुरी चप्पलों का निर्यात १ अरब डॉलर तक पहुँचे और अब यह लक्ष्य संभव हो गया है।

इटली के उपप्रधानमंत्री और विदेश मंत्री एंटोनियो तजानी से मिलने के बाद पीयूष गोयल ने कहा कि यह लक्ष्य इसलिए भी संभव है क्योंकि जो लोग एक बार कोल्हापुरी चप्पल पहन लेते हैं, वे फिर कोई और चप्पल पहनना नहीं चाहते।

यह समझौता मुंबई में इटली के कॉन्सुलेट जनरल (वाणिज्य दूतावास) में हुआ। इसमें लिडकॉम और लिडकार नाम की दो सरकारी कंपनियां शामिल हैं। प्राडा की तकनीकी टीम ने कोल्हापुर जाकर वहां के कारीगरों से मिलकर पारंपरिक तरीके से चप्पल बनाने की प्रक्रिया को समझा।

प्राडा की कोल्हापुरी-स्टाइल सैंडल को फरवरी २०२६ में दुनिया के ४० चुनिंदा प्राडा स्टोर्स और उसके ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर लॉन्च किया जाएगा।

इससे पहले, इस साल प्राडा को कारीगरों को श्रेय दिए बिना १.२ लाख रुपए में कोल्हापुरी-स्टाइल सैंडल बेचने के लिए आलोचना का सामना करना पड़ा था। इसके बाद कंपनी ने अपने अधिकारियों को भारत भेजा।

गोयल ने कहा कि भारत यूरोपियन यूनियन (ईयू) के साथ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट करने के लिए प्रतिबद्ध है और वह इटली के साथ तकनीक, रक्षा, कपड़ा, कृषि और खाद्य प्रसंस्करण जैसे क्षेत्रों में और मजबूत साझेदारी बनाना चाहता है।

-- राष्ट्र प्रेस

दुर्गेश बहादुर/एबीएस

Point of View

बल्कि यह भारतीय हस्तशिल्प को भी एक वैश्विक मंच पर लाने का एक महत्वपूर्ण कदम है। यह भारत के लिए आर्थिक विकास का एक नया अवसर प्रस्तुत करता है, जिसमें स्थानीय कारीगरों की कला और मेहनत को मान्यता मिलेगी।
NationPress
05/02/2026

Frequently Asked Questions

कोल्हापुरी चप्पलें क्या हैं?
कोल्हापुरी चप्पलें भारत के महाराष्ट्र राज्य की पारंपरिक चप्पलें हैं, जो अपने अद्वितीय डिज़ाइन और हस्तकला के लिए प्रसिद्ध हैं।
प्राडा ने भारत के साथ कौन सा समझौता किया है?
प्राडा ने कोल्हापुरी-स्टाइल सैंडल बनाने के लिए भारत की दो सरकारी कंपनियों के साथ एक समझौता (एमओयू) किया है।
कोल्हापुरी चप्पलों का निर्यात कब तक बढ़ सकता है?
केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल के अनुसार, कोल्हापुरी चप्पलों का निर्यात हर साल 1 अरब डॉलर तक पहुँच सकता है।
इस समझौते का क्या महत्व है?
यह समझौता भारतीय हस्तशिल्प को वैश्विक पहचान दिलाने में मदद करेगा और स्थानीय कारीगरों को एक नया मंच प्रदान करेगा।
कब लॉन्च होगा प्राडा की कोल्हापुरी-स्टाइल सैंडल?
प्राडा की कोल्हापुरी-स्टाइल सैंडल को फरवरी 2026 में लॉन्च किया जाएगा।
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