क्या कुमारस्वामी ने 600 से अधिक दिव्यांग कर्मचारियों और उनके परिवारों के साथ मनाया संक्रांति पर्व?

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क्या कुमारस्वामी ने 600 से अधिक दिव्यांग कर्मचारियों और उनके परिवारों के साथ मनाया संक्रांति पर्व?

सारांश

कुमारस्वामी ने दिव्यांग कर्मचारियों के साथ मनाया संक्रांति पर्व। इस समारोह में उनकी मेहनत और योगदान को सराहा गया। जानें इस खास अवसर की पूरी कहानी और दिव्यांगों के जीवन में बदलाव।

Key Takeaways

  • 600 से अधिक दिव्यांग कर्मचारियों के साथ समारोह आयोजित किया गया।
  • कुमारस्वामी ने दिव्यांगों के लिए आर्थिक सशक्तिकरण पर जोर दिया।
  • इस कार्यक्रम ने समाज में एकता का संदेश दिया।

बेंगलुरु, 15 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। केंद्रीय भारी उद्योग एवं इस्पात मंत्री एचडी कुमारस्वामी ने गुरुवार को बेंगलुरु के बाहरी इलाके बिदादी स्थित अपने फार्महाउस में बेंगलुरु इलेक्ट्रिसिटी सप्लाई कंपनी (बेसकॉम) और कर्नाटक पावर ट्रांसमिशन कॉरपोरेशन लिमिटेड (केपीटीसीएल) के विभिन्न विभागों में कार्यरत 600 से अधिक दिव्यांग कर्मचारियों और उनके परिवारों के साथ संक्रांति पर्व मनाया।

पिछले सात वर्षों से कुमारस्वामी हर साल दिव्यांग कर्मचारियों और उनके परिजनों के साथ संक्रांति उत्सव आयोजित कर रहे हैं। इस अवसर पर उन्होंने कर्मचारियों और उनके परिवारों से बातचीत की और पारंपरिक संक्रांति प्रसाद ‘एल्लु-बेला’ (तिल और गुड़) बांटकर खुशी साझा की।

दिव्यांग कर्मचारी अपने माता-पिता, जीवनसाथी और बच्चों के साथ कार्यक्रम में पहुंचे। उत्सव के दौरान उन्होंने मंत्री को एल्लु-बेला खिलाया, जिससे माहौल भावुक और उल्लासपूर्ण हो गया।

कुमारस्वामी ने कहा, “आप सभी को देखकर मेरा हृदय भावनाओं से भर जाता है। ईश्वर ने मुझे आपकी सहायता करने का एक छोटा सा अवसर दिया। आप जो प्रेम और स्नेह मुझ पर बरसाते हैं, उसने मेरे जीवन को सच्चा अर्थ दिया है।”

मंत्री की आंखों में आंसू देखकर वहां मौजूद कई लोग भावुक हो गए और उन्होंने उनके स्वास्थ्य की कामना की।

उन्होंने कहा, “आप सभी समाज के लिए प्रेरणास्रोत हैं। आपने सरकारी वेतन के सहारे सम्मानजनक जीवन बनाया है। आपकी प्रगति समाज के लिए उदाहरण है। मैं कामना करता हूं कि आप और आपके बच्चे और ऊंचाइयों को छुएं।”

कुमारस्वामी ने याद दिलाया कि वर्ष 2006 में मुख्यमंत्री रहते हुए ‘जनता दर्शन’ कार्यक्रमों के दौरान बड़ी संख्या में दिव्यांग लोग रोजगार की मांग लेकर आते थे। उनकी स्थिति से प्रभावित होकर उन्होंने बेसकॉम और केपीटीसीएल के विभिन्न विभागों में 600 से अधिक दिव्यांग व्यक्तियों को अनुबंध के आधार पर नियुक्त किया था।

हालांकि 2018 तक उनकी सेवाएं नियमित नहीं हुई थीं। 2018 में दोबारा मुख्यमंत्री बनने के बाद कुमारस्वामी ने सभी दिव्यांग कर्मचारियों की सेवाओं को नियमित किया। ऊर्जा विभाग में 300 एसएसएलसी उत्तीर्ण और 300 स्नातक उम्मीदवारों को नियुक्ति दी गई। 14 जनवरी 2019 को संक्रांति के अवसर पर उनकी सेवाओं के नियमितीकरण के आदेश जारी किए गए, जिससे 600 से अधिक परिवारों में खुशी आई।

सभा को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा, “जब भी मुझे अवसर मिला, मैंने अपनी पूरी क्षमता से दिव्यांगों की मदद की है। भविष्य में भी जो शारीरिक रूप से कमजोर हैं, उनके लिए मेरा दिल हमेशा संवेदनशील रहेगा।”

उन्होंने समाज से अपील की कि दिव्यांगों के प्रति केवल सहानुभूति ही नहीं, बल्कि आर्थिक सशक्तिकरण पर भी ध्यान दिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा, “मेरे लिए वे भगवान के समान हैं।”

दिव्यांग कर्मचारियों ने मंत्री के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि अनुबंध काल में उन्हें मात्र 3,000 रुपये वेतन मिलता था। सेवाएं नियमित होने के बाद अब उनकी आय 80,000 से 90,000 रुपये तक है और कुछ मामलों में एक लाख रुपये से अधिक भी है। उन्होंने कहा, “आज हम अपने घर बना चुके हैं, कारें खरीदी हैं और बच्चों को अच्छी शिक्षा दे पा रहे हैं। यह सब कुमारस्वामी की वजह से संभव हुआ है। इसी कारण हम हर साल उनके साथ संक्रांति मनाते हैं।”

Point of View

तो हम सबके लिए एक बेहतर भविष्य बना सकते हैं।
NationPress
15/01/2026

Frequently Asked Questions

कुमारस्वामी ने कब और कहाँ संक्रांति पर्व मनाया?
उन्होंने 15 जनवरी को बेंगलुरु के बाहरी इलाके बिदादी में अपने फार्महाउस में संक्रांति पर्व मनाया।
कितने दिव्यांग कर्मचारियों ने इस समारोह में भाग लिया?
इस समारोह में 600 से अधिक दिव्यांग कर्मचारी और उनके परिवार शामिल हुए।
इस कार्यक्रम का उद्देश्य क्या था?
इसका उद्देश्य दिव्यांग कर्मचारियों के योगदान को मान्यता देना और उनके साथ एकता का अनुभव साझा करना था।
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