पापमोचनी एकादशी: भगवान नारायण की कृपा पाने का सुनहरा अवसर, राहुकाल को ध्यान में रखें
सारांश
Key Takeaways
- पापमोचनी एकादशी का धार्मिक महत्व है।
- द्विपुष्कर योग व्रत का फल कई गुना बढ़ाता है।
- राहुकाल के समय विशेष कार्य करने से बचें।
- इस दिन भगवान नारायण की कृपा प्राप्त करें।
- शुभ मुहूर्त का ध्यान रखें।
नई दिल्ली, 14 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। सनातन धर्म में भगवान नारायण को समर्पित एकादशी तिथि का विशेष धार्मिक महत्व है। होलिका दहन और चैत्र नवरात्रि के बीच आने वाली कृष्ण पक्ष की यह एकादशी पापमोचनी एकादशी कहलाती है, जो इस वर्ष रविवार को है। यह व्रत भगवान नारायण को समर्पित है और इसे पापों से मुक्ति दिलाने वाला माना जाता है।
एकादशी पर द्विपुष्कर योग का निर्माण हो रहा है, जिसे धार्मिक कार्यों के लिए अत्यधिक शुभ माना जाता है। इस योग में पूजा, दान और व्रत का फल कई गुना बढ़ जाता है। दृक पंचांग के अनुसार, चैत्र मास के कृष्ण पक्ष में पापमोचनी एकादशी सुबह 8 बजकर 10 मिनट पर आरंभ होकर 15 मार्च की सुबह 9 बजकर 16 मिनट तक रहेगी। उदयातिथि के अनुसार, 15 मार्च को पूरे दिन एकादशी तिथि का मान होगा।
रविवार को सूर्योदय सुबह 6 बजकर 31 मिनट पर और सूर्यास्त शाम 6 बजकर 29 मिनट पर होगा। नक्षत्र श्रवण रहेगा, जो 16 मार्च की सुबह 5 बजकर 56 मिनट तक फिर धनिष्ठा में परिवर्तित होगा। योग परिघ सुबह 10 बजकर 25 मिनट तक और करण बालव रहेगा।
रविवार के शुभ मुहूर्त की बात करें तो ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4 बजकर 55 मिनट से 5 बजकर 43 मिनट तक, अभिजित मुहूर्त दोपहर 12 बजकर 6 मिनट से 12 बजकर 54 मिनट तक, विजय मुहूर्त दोपहर 2 बजकर 30 मिनट से 3 बजकर 18 मिनट तक और गोधूलि मुहूर्त शाम 6 बजकर 27 मिनट से 6 बजकर 51 मिनट तक रहेगा।
इसके अलावा, अमृत काल शाम 7 बजकर 3 मिनट से 8 बजकर 43 मिनट तक रहेगा। रविवार को अति शुभ द्विपुष्कर योग भी बन रहा है।
15 मार्च को राहुकाल शाम 5 बजे से 6 बजकर 29 मिनट तक रहेगा। यमगंड दोपहर 12 बजकर 30 मिनट से 2 बजे तक और गुलिक काल दोपहर 3 बजकर 30 मिनट से 5 बजे तक रहेगा। इसके साथ ही, दुर्मुहूर्त शाम 4 बजकर 54 मिनट से 5 बजकर 41 मिनट तक रहेगा। इन समयों में कोई शुभ या नया कार्य वर्जित होता है।