वरूथिनी एकादशी: भगवान नारायण के लिए व्रत का सर्वश्रेष्ठ दिन, जानें शुभ और अशुभ समय
सारांश
Key Takeaways
- वरूथिनी एकादशी का व्रत 13 अप्रैल को है।
- इस दिन भगवान विष्णु की पूजा का विशेष महत्व है।
- व्रत से पिछले जन्मों के पाप नष्ट होते हैं।
- शुभ मुहूर्त ब्रह्म मुहूर्त और अभिजित मुहूर्त में हैं।
- अशुभ समय में राहुकाल और यमगंड ध्यान रखना चाहिए।
नई दिल्ली, 12 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। हिंदू पंचांग के मुताबिक, बैशाख मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को वरूथिनी एकादशी मनाई जाती है। इस वर्ष यह पवित्र व्रत 13 अप्रैल को, सोमवार के दिन, रखा जाएगा।
एकादशी तिथि 13 अप्रैल की रात को 1 बजकर 16 मिनट पर शुरू होगी और 14 अप्रैल की रात को 1 बजकर 8 मिनट पर समाप्त होगी। उदय तिथि के अनुसार भक्त 13 अप्रैल को दिनभर व्रत का पालन करेंगे। व्रत का पारण 14 अप्रैल को सूर्योदय के बाद शुभ मुहूर्त में किया जाएगा।
मान्यता है कि वरूथिनी एकादशी का व्रत भक्तों को सभी प्रकार की बाधाओं और पापों से रक्षा (वरूथ) करता है। इस दिन पूर्ण श्रद्धा से व्रत रखने, भगवान विष्णु की पूजा करने और विष्णु सहस्रनाम का पाठ करने से पिछले जन्मों के पापों का नाश होता है, सौभाग्य में वृद्धि होती है और मोक्ष का मार्ग प्रशस्त होता है। पुराणों में कहा गया है कि इस एकादशी का व्रत कई गुना पुण्य फल देता है।
बैशाख मास, कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि पर सूर्योदय 5 बजकर 58 मिनट पर होगा और सूर्यास्त 6 बजकर 46 मिनट पर होगा। नक्षत्र धनिष्ठा शाम 4 बजकर 3 मिनट तक रहेगा, इसके बाद शतभिषा रहेगा। योग शुभ शाम 5 बजकर 17 मिनट तक, करण बव दोपहर 1 बजकर 18 मिनट तक रहेगा।
वरूथिनी एकादशी के शुभ मुहूर्त में ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4 बजकर 28 मिनट से 5 बजकर 13 मिनट तक, अभिजित मुहूर्त दोपहर 11 बजकर 56 मिनट से 12 बजकर 47 मिनट तक और विजय मुहूर्त दोपहर 2 बजकर 30 मिनट से 3 बजकर 21 मिनट तक रहेगा। गोधूलि मुहूर्त शाम 6 बजकर 44 मिनट से 7 बजकर 7 मिनट तक रहेगा।
अशुभ समय की जानकारी के अनुसार, राहुकाल सुबह 7 बजकर 34 मिनट से 9 बजकर 10 मिनट तक, यमगंड सुबह 10 बजकर 46 मिनट से 12 बजकर 22 मिनट तक, गुलिक काल दोपहर 1 बजकर 58 मिनट से 3 बजकर 34 मिनट तक और दुर्मुहूर्त दोपहर 12 बजकर 47 मिनट से 1 बजकर 39 मिनट तक रहेगा।