गंगा किनारे 26 जिलों में जैविक खेती से बदल रही है यूपी की तस्वीर
सारांश
Key Takeaways
- जैविक खेती से किसानों की आय में वृद्धि हो रही है।
- रासायनिक खाद की निर्भरता कम हो रही है।
- गंगा की स्वच्छता में सुधार हो रहा है।
- ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त किया जा रहा है।
- किसानों को तकनीकी सहायता और प्रोत्साहन मिल रहा है।
लखनऊ, 15 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। मां गंगा के तट पर उत्तर प्रदेश में अब धार्मिक आस्था के साथ-साथ आर्थिक समृद्धि की नई लहर भी प्रवाहित हो रही है। योगी सरकार ने गंगा के किनारे स्थित 26 जिलों में जैविक खेती का एक ऐसा मॉडल विकसित किया है, जो न केवल किसानों की आय में वृद्धि कर रहा है, बल्कि प्रदेश की कृषि प्रणाली को भी नई दिशा प्रदान कर रहा है।
नमामि गंगे योजना के अंतर्गत गंगा के दोनों किनारों पर 5-5 किलोमीटर के क्षेत्र में 3,370 जैविक क्लस्टर स्थापित किए गए हैं, जिससे लगभग 90 हजार किसान परिवार आत्मनिर्भर बन चुके हैं। योगी सरकार इन क्षेत्रों में ऑर्गेनिक गांव विकसित कर रासायनिक मुक्त खेती को मिशन मोड में आगे बढ़ा रही है। जैविक और प्राकृतिक कृषि को अपनाने से किसानों की उत्पादन लागत में कमी आई है। रासायनिक उर्वरक और कीटनाशकों पर निर्भरता कम होने से न केवल लागत में कमी आई है, बल्कि उच्च गुणवत्ता वाले उत्पादों के लिए बाजार में बेहतर मूल्य भी मिल रहा है।
यह पहल केवल कृषि सुधार तक सीमित नहीं है। इससे गंगा की सफाई, मिट्टी की गुणवत्ता, भूजल संरक्षण और ग्रामीण अर्थव्यवस्था सभी को लाभ मिल रहा है। केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं के माध्यम से किसानों को प्रशिक्षण, तकनीकी सहायता और प्रोत्साहन प्रदान किया जा रहा है। प्राकृतिक उर्वरकों और पारंपरिक कृषि तकनीकों को बढ़ावा देकर टिकाऊ कृषि का एक मॉडल तैयार किया जा रहा है।
वहीं, वर्ष 2024-25 में नमामि गंगे परियोजना के तहत राज्य स्वच्छ गंगा मिशन द्वारा अब तक 35 जनपदों में जिला स्तर पर प्राकृतिक खेती की कार्यशालाएं आयोजित की जा चुकी हैं। आगामी वित्तीय वर्ष में बाकी जनपदों में भी कार्यशालाओं का आयोजन किया जाएगा।
एक अधिकारी ने बताया कि प्रदेश के 26 गंगा तटवर्ती जिलों में चल रहे इस अभियान के तहत अब तक 3,370 जैविक क्लस्टर स्थापित किए जा चुके हैं, जिनसे किसान परिवार सीधे जुड़े हैं और आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। गंगा के दोनों किनारों पर ऑर्गेनिक बेल्ट का विकास इस मॉडल के लिए किया गया है, जहां गांव स्तर पर ऑर्गेनिक गांवों का निर्माण हो रहा है, जिससे लोगों को जैविक खाद्य पदार्थों की उपलब्धता सुनिश्चित की जा रही है।
इस योजना की विशेषता यह है कि एक ओर जहां किसानों की आय में वृद्धि हो रही है, वहीं दूसरी ओर लोग कीटनाशकों से प्रभावित वस्तुओं से होने वाली बीमारियों से भी बचे रह रहे हैं। किसानों का रासायनिक खाद और कीटनाशकों पर खर्च घटा है, वहीं दूसरी ओर मिट्टी की उर्वरता में सुधार हुआ है। इसके परिणामस्वरूप जैविक उत्पादों को बाजार में प्रीमियम रेट मिल रहा है और रसायन-मुक्त उत्पादन से उपभोक्ताओं के बीच मांग भी बढ़ी है।