क्या जया एकादशी भगवान नारायण की कृपा प्राप्ति का सर्वोत्तम दिन है? जानें भद्रा और राहुकाल

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क्या जया एकादशी भगवान नारायण की कृपा प्राप्ति का सर्वोत्तम दिन है? जानें भद्रा और राहुकाल

सारांश

जया एकादशी 29 जनवरी को है, जो भगवान विष्णु की कृपा और मनोकामनाओं की पूर्ति का दिन है। जानें इसके महत्व, भद्रा और राहुकाल के बारे में। यह व्रत विशेष रूप से पापों का नाश और मोक्ष प्राप्ति में सहायक है।

Key Takeaways

  • जया एकादशी का व्रत विशेष फलदायी होता है।
  • यह दिन भगवान विष्णु की कृपा प्राप्ति के लिए श्रेष्ठ है।
  • उपवास से पापों का नाश और मोक्ष की प्राप्ति होती है।
  • भद्रा और राहुकाल का ध्यान रखें।
  • धन और समृद्धि के लिए यह व्रत महत्वपूर्ण है।

नई दिल्ली, 28 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। सनातन धर्म में एकादशी तिथि को भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त करने का सबसे उत्तम दिन माना जाता है। 29 जनवरी को जया एकादशी है, जो नारायण की कृपा प्राप्ति और अत्यंत फलदायी सिद्ध होती है। यह व्रत पापों का नाश करने, मनोकामनाओं की पूर्ति और मोक्ष प्राप्ति में सहायक माना जाता है।

दृक पंचांग के अनुसार, जया एकादशी की तिथि 28 जनवरी को शाम 4 बजकर 35 मिनट से प्रारंभ हो रही है और यह 29 जनवरी को दोपहर 1 बजकर 55 मिनट तक रहेगी। शुक्ल पक्ष की यह एकादशी भगवान विष्णु के साथ-साथ माता लक्ष्मी की आराधना के लिए भी अत्यंत शुभ होती है। व्रत रखने वाले भक्तों को पारण करने का समय द्वादशी तिथि में ही करना चाहिए, जो 29 जनवरी को एकादशी समाप्त होने के बाद शुरू होगी।

गुरुवार को चंद्रमा वृषभ राशि में संचार करेंगे। नक्षत्र की बात करें तो रोहिणी नक्षत्र सुबह 7 बजकर 31 मिनट तक रहेगा, उसके बाद मृगशिरा नक्षत्र प्रारंभ होगा। सूर्योदय 7 बजकर 11 मिनट पर और सूर्यास्त शाम 5 बजकर 58 मिनट पर होगा। शुभ कार्यों के लिए कई महत्वपूर्ण मुहूर्त हैं, जैसे ब्रह्म मुहूर्त 5 बजकर 25 मिनट से 6 बजकर 18 मिनट तक, अभिजित मुहूर्त 12 बजकर 13 मिनट से 12 बजकर 56 मिनट तक, विजय मुहूर्त 2 बजकर 22 मिनट से 3 बजकर 5 मिनट तक है। वहीं, अमृत काल रात 9 बजकर 26 मिनट से 10 बजकर 54 मिनट तक रहेगा, जो पूजा-पाठ के लिए विशेष रूप से अनुकूल है।

हालांकि, शुभ कार्यों में बाधा न आए, इसके लिए अशुभ समय का विशेष ध्यान रखें। गुरुवार को भद्रा सुबह 7 बजकर 11 मिनट से दोपहर 1 बजकर 55 मिनट तक प्रभावी रहेगा। राहुकाल दोपहर 1 बजकर 55 मिनट से 3 बजकर 16 मिनट तक रहेगा, इस दौरान कोई नया कार्य या पूजा-आरंभ न करें।

जया एकादशी के व्रत में भक्त उपवास रखकर भगवान नारायण की पूजा, विष्णु सहस्रनाम का पाठ, भजन-कीर्तन और दान-पुण्य करते हैं। यह व्रत विशेषकर धन, समृद्धि और स्वास्थ्य लाभ और परिवार के कल्याण के लिए किया जाता है। धार्मिक मान्यता है कि एकादशी के दिन व्रत-पूजन से सौ गुना फल मिलता है।

Point of View

बल्कि यह समाज में सामूहिक एकता और समृद्धि का प्रतीक भी है। एकादशी व्रत के पीछे का उद्देश्य न केवल व्यक्तिगत मोक्ष है, बल्कि यह समाज के कल्याण की दिशा में भी एक कदम है।
NationPress
08/02/2026

Frequently Asked Questions

जया एकादशी का महत्व क्या है?
जया एकादशी भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त करने का सबसे उत्तम दिन है। इस दिन उपवास रखने से पापों का नाश और मोक्ष की प्राप्ति होती है।
भद्रा और राहुकाल का समय क्या है?
भद्रा सुबह 7 बजकर 11 मिनट से दोपहर 1 बजकर 55 मिनट तक प्रभावी रहेगी और राहुकाल दोपहर 1 बजकर 55 मिनट से 3 बजकर 16 मिनट तक रहेगा।
कब करना चाहिए पारण?
पारण का समय द्वादशी तिथि में करना चाहिए, जो 29 जनवरी को एकादशी समाप्त होने के बाद शुरू होगी।
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